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शहर की सड़कें जाम, पटरियों पर दुकान
basti
Updated Sun, 28 Jan 2018 11:33 PM IST
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पटरियों तक फैली दुकानें।
- फोटो : amar ujala
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शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर तमाम दावे-वादे करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। पुलिस प्रशासन से लेकर इसके लिए जिम्मेदार अन्य विभाग भी एक-दूसरे के सिर ठीकरा फोड़कर अपना दामन बचाने में जुटे हैं। इनके इस रवैये का खामियाजा शहर में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति भुगत रहा है। बिना जाम में फंसे कोई बच नहीं सकता।
जाम से निजात की नहीं ढूंढ पाए तरकीब
गांधीनगर, मंगल बाजार जैसे व्यस्त एरिया में पटरियों पर कब्जा अतिक्रमण की वजह से रास्ते सिमट गए। रौता चौराहा से लेकर रोडवेज की तरफ जाने पर बिजली ऑफिस के बगल की पटरी पर अतिक्रमण के कारण अक्सर यह मार्ग जाम हो जाता है। जबकि करतार सिनेमा के आसपास पटरी पर वर्षों से कब्जा है। रंजीत चौराहे के पास सुबह से शाम तक अतिक्रमण देखने को मिलता है।
पटरियां हैं या गोदाम
मालवीय रोड पर दोनों तरफ की पटरियां बालू, मोरंग, सीमेंट, गिट्टी और सरिया का गोदाम बन गईं हैं। सबसे खराब स्थिति तब होती है जब पटरियों पर बालू मोरंग और गिट्टी लदे ट्रक सड़क पर खड़े कर दिए जाते हैं। तब चारों ओर ऐसा जाम लग जाता है कि लोग घंटों राहगीर फंसे रहते हैं।
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कब्जा हटवाने का अभियान
पुलिस पिछले पांच वर्ष से कागज पर प्लान बना रही है लेकिन उसे अब तक मूर्त रूप नहीं दे पाई। वर्ष 2013-14 के दरम्यान तत्कालीन एसपी आनंद कुलकर्णी के निर्देश पर सीओ सिटी रहे राजेश भारती ने तत्कालीन एआरटीओ शंकर जी सिंह के साथ पूरा ब्लू-प्रिंट तैयार किया। इसमें शहर के अलग-अलग छह ऑटो रिक्शे के रूट, गांधीनगर में पार्किंग, डिवाइडर पर पार्किंग कराने का स्थान निर्धारित करना था। ग्रामीण और शहरी टैक्सियों का अलग रूट बनाना था। मगर उस पर अब तक अमल नहीं हुआ।
बहाने बनाने में आगे अधिकारी
अधिकारी इस समस्या का हल निकालने से ज्यादा दूसरे के सिर ठीकरा फोड़ने में ऊर्जा खपाए हुए हैं। इस बार भी एसपी संकल्प शर्मा से पूछा गया तो उन्होंने फिर अभियान चलाने का आश्वासन दिया है। एसपी का कहना है कि शहर में कब्जा हटवाने के लिए कई विभागों का समन्वय जरूरी है, जबकि इसके लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
शहर के जाम वाले स्थान
कंपनीबाग, गांधीकला भवन के पास फव्वारा तिराहे पर।
मालवीय रोड के रौता और रंजीत चौराहे पर।
रोडवेज के नेहरू और भगत सिंह तिराहे।
कोतवाली के आसपास की दुकानों पर सामान।
दक्षिण दरवाजे, स्टेशन तिराहा, करुआ बाबा का स्थान।
कटरा पानी की टंकी से न्याय मार्ग पर।
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शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर तमाम दावे-वादे करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। पुलिस प्रशासन से लेकर इसके लिए जिम्मेदार अन्य विभाग भी एक-दूसरे के सिर ठीकरा फोड़कर अपना दामन बचाने में जुटे हैं। इनके इस रवैये का खामियाजा शहर में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति भुगत रहा है। बिना जाम में फंसे कोई बच नहीं सकता।
जाम से निजात की नहीं ढूंढ पाए तरकीब
गांधीनगर, मंगल बाजार जैसे व्यस्त एरिया में पटरियों पर कब्जा अतिक्रमण की वजह से रास्ते सिमट गए। रौता चौराहा से लेकर रोडवेज की तरफ जाने पर बिजली ऑफिस के बगल की पटरी पर अतिक्रमण के कारण अक्सर यह मार्ग जाम हो जाता है। जबकि करतार सिनेमा के आसपास पटरी पर वर्षों से कब्जा है। रंजीत चौराहे के पास सुबह से शाम तक अतिक्रमण देखने को मिलता है।
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पटरियां हैं या गोदाम
मालवीय रोड पर दोनों तरफ की पटरियां बालू, मोरंग, सीमेंट, गिट्टी और सरिया का गोदाम बन गईं हैं। सबसे खराब स्थिति तब होती है जब पटरियों पर बालू मोरंग और गिट्टी लदे ट्रक सड़क पर खड़े कर दिए जाते हैं। तब चारों ओर ऐसा जाम लग जाता है कि लोग घंटों राहगीर फंसे रहते हैं।
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कब्जा हटवाने का अभियान
पुलिस पिछले पांच वर्ष से कागज पर प्लान बना रही है लेकिन उसे अब तक मूर्त रूप नहीं दे पाई। वर्ष 2013-14 के दरम्यान तत्कालीन एसपी आनंद कुलकर्णी के निर्देश पर सीओ सिटी रहे राजेश भारती ने तत्कालीन एआरटीओ शंकर जी सिंह के साथ पूरा ब्लू-प्रिंट तैयार किया। इसमें शहर के अलग-अलग छह ऑटो रिक्शे के रूट, गांधीनगर में पार्किंग, डिवाइडर पर पार्किंग कराने का स्थान निर्धारित करना था। ग्रामीण और शहरी टैक्सियों का अलग रूट बनाना था। मगर उस पर अब तक अमल नहीं हुआ।
बहाने बनाने में आगे अधिकारी
अधिकारी इस समस्या का हल निकालने से ज्यादा दूसरे के सिर ठीकरा फोड़ने में ऊर्जा खपाए हुए हैं। इस बार भी एसपी संकल्प शर्मा से पूछा गया तो उन्होंने फिर अभियान चलाने का आश्वासन दिया है। एसपी का कहना है कि शहर में कब्जा हटवाने के लिए कई विभागों का समन्वय जरूरी है, जबकि इसके लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
शहर के जाम वाले स्थान
कंपनीबाग, गांधीकला भवन के पास फव्वारा तिराहे पर।
मालवीय रोड के रौता और रंजीत चौराहे पर।
रोडवेज के नेहरू और भगत सिंह तिराहे।
कोतवाली के आसपास की दुकानों पर सामान।
दक्षिण दरवाजे, स्टेशन तिराहा, करुआ बाबा का स्थान।
कटरा पानी की टंकी से न्याय मार्ग पर।