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Basti News: पुरानी पेंशन बहाली और समय से पदोन्नति की मांग पर शिक्षकों ने किया मतदान
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बस्ती। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए जिले में बनाए गए मतदान केंद्रों पर शिक्षकों ने उत्साह के साथ मतदान किया। मतदान के बाद शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली, समय से पदोन्नति और सेवा सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना था कि उन्होंने ऐसे प्रतिनिधि के चयन के लिए मतदान किया है, जो सदन और शासन के सामने शिक्षकों की समस्याओं और मांगों को मजबूती से उठा सके।
शिक्षक मतदाताओं के बीच पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। शिक्षकों ने कहा कि पेंशन केवल सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और भविष्य की सुरक्षा से भी जुड़ी है। नई पेंशन व्यवस्था को लेकर असंतोष के बीच उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली को प्राथमिकता दी।
इसके अलावा समय से पदोन्नति नहीं मिलने, वेतन विसंगति, सेवा शर्तों और प्रबंधकीय विद्यालयों में अनावश्यक हस्तक्षेप को लेकर भी शिक्षकों ने नाराजगी जताई। कुछ शिक्षकों ने पहले से चयनित शिक्षकों पर बार-बार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता लागू किए जाने पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इससे शिक्षकों का मनोबल प्रभावित होता है। पदोन्नति की प्रक्रिया निर्धारित समय पर पूरी होनी चाहिए और लिपिकीय या प्रशासनिक त्रुटियों के नाम पर शिक्षकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
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शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि निर्वाचित प्रतिनिधि चुनाव के बाद भी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे और उनके समाधान के लिए प्रभावी पैरवी करेंगे। उधर, सदर ब्लॉक क्षेत्र और नगर पालिका में बनाए गए मतदान केंद्रों के बाहर प्रत्याशियों के समर्थक भी नजर आए। हालांकि, आम चुनावों की तुलना में इस चुनाव में प्रत्याशियों के समर्थकों और राजनीतिक दलों की सक्रियता सीमित रही।
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बोले शिक्षक मतदाता
‘पुरानी पेंशन बहाली शिक्षकों के हक का सवाल’
पुरानी पेंशन बहाली को लेकर अधिकांश शिक्षकों ने मतदान किया है। यह शिक्षकों के अधिकारों से जुड़ा सवाल है। ऐसे प्रतिनिधि को वोट दिया गया है, जो शिक्षकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रभावी ढंग से आवाज उठा सके।
-चंद्रभान पांडेय, मतदाता
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पेंशन के साथ शिक्षकों की सेवा सुरक्षा भी जरूरी है। प्रबंधकीय विद्यालयों में अनावश्यक हस्तक्षेप बंद होना चाहिए और शिक्षकों को समय-समय पर पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए।
-अलका पांडेय, मतदाता
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एक बार चयनित होने के बाद शिक्षकों पर बार-बार टीईटी की अनिवार्यता लागू करना उचित नहीं है। इससे उनका मनोबल प्रभावित होता है। पदोन्नति की प्रक्रिया भी समय से पूरी होनी चाहिए।
-श्यामदेवी, मतदाता
-- -- -इस बार ओपीएस के मुद्दे पर मतदान हुआ है। पदोन्नति रोके जाने और लिपिकीय त्रुटियों का हवाला देकर शिक्षकों को गुमराह किए जाने से भी नाराजगी है। ऐसे कई मुद्दे हैं, जो इस चुनाव में प्रमुखता से सामने आए।
-हेमलता, मतदाता
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शिक्षक मतदाताओं के बीच पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। शिक्षकों ने कहा कि पेंशन केवल सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और भविष्य की सुरक्षा से भी जुड़ी है। नई पेंशन व्यवस्था को लेकर असंतोष के बीच उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली को प्राथमिकता दी।
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इसके अलावा समय से पदोन्नति नहीं मिलने, वेतन विसंगति, सेवा शर्तों और प्रबंधकीय विद्यालयों में अनावश्यक हस्तक्षेप को लेकर भी शिक्षकों ने नाराजगी जताई। कुछ शिक्षकों ने पहले से चयनित शिक्षकों पर बार-बार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता लागू किए जाने पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इससे शिक्षकों का मनोबल प्रभावित होता है। पदोन्नति की प्रक्रिया निर्धारित समय पर पूरी होनी चाहिए और लिपिकीय या प्रशासनिक त्रुटियों के नाम पर शिक्षकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
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शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि निर्वाचित प्रतिनिधि चुनाव के बाद भी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे और उनके समाधान के लिए प्रभावी पैरवी करेंगे। उधर, सदर ब्लॉक क्षेत्र और नगर पालिका में बनाए गए मतदान केंद्रों के बाहर प्रत्याशियों के समर्थक भी नजर आए। हालांकि, आम चुनावों की तुलना में इस चुनाव में प्रत्याशियों के समर्थकों और राजनीतिक दलों की सक्रियता सीमित रही।
बोले शिक्षक मतदाता
‘पुरानी पेंशन बहाली शिक्षकों के हक का सवाल’
पुरानी पेंशन बहाली को लेकर अधिकांश शिक्षकों ने मतदान किया है। यह शिक्षकों के अधिकारों से जुड़ा सवाल है। ऐसे प्रतिनिधि को वोट दिया गया है, जो शिक्षकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रभावी ढंग से आवाज उठा सके।
-चंद्रभान पांडेय, मतदाता
पेंशन के साथ शिक्षकों की सेवा सुरक्षा भी जरूरी है। प्रबंधकीय विद्यालयों में अनावश्यक हस्तक्षेप बंद होना चाहिए और शिक्षकों को समय-समय पर पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए।
-अलका पांडेय, मतदाता
एक बार चयनित होने के बाद शिक्षकों पर बार-बार टीईटी की अनिवार्यता लागू करना उचित नहीं है। इससे उनका मनोबल प्रभावित होता है। पदोन्नति की प्रक्रिया भी समय से पूरी होनी चाहिए।
-श्यामदेवी, मतदाता
-हेमलता, मतदाता