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Basti News: टैंक से सप्लाई...रंगत दूध की, हकीकत सिस्टम जाने
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पुरानी बस्ती के मंगल बाजार में टैंक में दूध की बिक्री करते धंधेबाज संवाद
बस्ती। बाजार में डीजल-पेट्रोल व पानी टैंक की तरह खुलेआम टैंक में धड़ल्ले से बिक रहे दूध से भरोसा उठ रहा है। धंधेबाज मिलावटी दूध खपाने के लिए अब बड़ा टैंक इस्तेमाल कर रहे हैं। दूध की आपूर्ति कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। इससे लोग सतर्क तो हो गए हैं लेकिन अनजान लोग विकल्प न मिलने पर इस दूध की खरीदारी कर सेवन कर रहे हैं।
काफी लोग बाजार के दूध पर निर्भर हैं। गांव-कस्बे से आ रहे दूध की खरीदकर घर की जरूरत को पूरी करते हैं। कभी-कभी खोआ व पनीर भी बनाते हैं, मगर शुद्ध दूध की तलाश उनकी पूरी नहीं हो पा रही है। धंधा मंद पड़ने के बाद आम डेयरियों और पशु पालकों के यहां से जितने दूध का उत्पादन हो रहा उतना खरीदकर उसमें मिलावट करके बाजार में उतार रहे हैं।
इन दिनों बाजार में पिकअप पर लादकर और पानी वाले टैंक में तमाम धंधेबाज दूध बेच रहे हैं। उनकी मंडी रात में लगती है। गांधीनगर, रोडवेज, टाउन क्लब, पांडेय बाजार, मंगल बाजार के पास ऐसी कई गाड़ियां शाम को लग जाती हैं, जहां देर रात तक भरपूर दूध उपलब्ध रहता है।
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बताते हैं कि गाय का दूध 50-55 और भैंस का दूध बताकर 60-65 रुपये बेचा रहा है। तुरकहिया मोड़ के सामने लग रही ऐसी ही दुकान पर दूध 55 और 65 रुपये लीटर बेचा जा रहा है। इसके बावजूद उस दूध पर किसी को भरोसा नहीं रहा। कारण यह कि अधिकतर ऐसे धंधेबाज दूध से क्रीम और फैट निकालकर पहले उसे खोखला करते हैं और उसकी भरपाई के लिए और फैट की मात्रा दिखाने के लिए पाम ऑयल मिला रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि दूध से फैट और क्रीम निकालने से उतना नुकसान नहीं है, जितना उसमें पाम ऑयल मिला देने से है। ठंड में यह धंधा गर्म हो रहा है। बताते हैं कि अनजान मोहल्ले में दूध का भरा टैंक पहुंचा देते हैं, जहां से दूध पानी की तरह बोतल में भर कर देते दिख रहे हैं, जिस पर न तो खाद्य विभाग की नजर हैं न ही स्थानीय प्रशासन की। लोग दूध के नाम पर क्या पी जा रहे हैं इसको लेकर सकते में हैं।
सहालग खत्म, अब मिलावट से फिर धंधा चमकाने में जुटे धंधेबाज : सहालग खत्म होने के बाद मंद पड़े धंधे को चमकाने के लिए नया तरीका इजाद किया है। धंधेबाजों ने डीजल-पेट्रोल और पानी की तरह टैंक में भरकर मिलावटी दूध खपा रहे हैं। इससे उन्हें अधिक मुनाफा हो रहा है। क्रीम व फैट निकाल ले रहे हैं और गुणवत्ताविहीन दूध आपूर्ति कर रहे हें, वह भी असली दूध की रेट में।
खैर, लोग दूध न मिलने के चलते इसी टैंक पर दूध लेने को विवश हैं। गांव-कस्बे से यह दूध धंधेबाज मंगवाकर बाजार में उतार रह हैं, जबकि इतने बड़े पैमाने पर रोड किनारे सज रही दूध की मंडी का कोई लाइसेंस और आदेश तक नहीं है। लेकिन, रात में धंधेबाज यह खेल करके चले जा रहे हैं।
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काफी लोग बाजार के दूध पर निर्भर हैं। गांव-कस्बे से आ रहे दूध की खरीदकर घर की जरूरत को पूरी करते हैं। कभी-कभी खोआ व पनीर भी बनाते हैं, मगर शुद्ध दूध की तलाश उनकी पूरी नहीं हो पा रही है। धंधा मंद पड़ने के बाद आम डेयरियों और पशु पालकों के यहां से जितने दूध का उत्पादन हो रहा उतना खरीदकर उसमें मिलावट करके बाजार में उतार रहे हैं।
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इन दिनों बाजार में पिकअप पर लादकर और पानी वाले टैंक में तमाम धंधेबाज दूध बेच रहे हैं। उनकी मंडी रात में लगती है। गांधीनगर, रोडवेज, टाउन क्लब, पांडेय बाजार, मंगल बाजार के पास ऐसी कई गाड़ियां शाम को लग जाती हैं, जहां देर रात तक भरपूर दूध उपलब्ध रहता है।
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बताते हैं कि गाय का दूध 50-55 और भैंस का दूध बताकर 60-65 रुपये बेचा रहा है। तुरकहिया मोड़ के सामने लग रही ऐसी ही दुकान पर दूध 55 और 65 रुपये लीटर बेचा जा रहा है। इसके बावजूद उस दूध पर किसी को भरोसा नहीं रहा। कारण यह कि अधिकतर ऐसे धंधेबाज दूध से क्रीम और फैट निकालकर पहले उसे खोखला करते हैं और उसकी भरपाई के लिए और फैट की मात्रा दिखाने के लिए पाम ऑयल मिला रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि दूध से फैट और क्रीम निकालने से उतना नुकसान नहीं है, जितना उसमें पाम ऑयल मिला देने से है। ठंड में यह धंधा गर्म हो रहा है। बताते हैं कि अनजान मोहल्ले में दूध का भरा टैंक पहुंचा देते हैं, जहां से दूध पानी की तरह बोतल में भर कर देते दिख रहे हैं, जिस पर न तो खाद्य विभाग की नजर हैं न ही स्थानीय प्रशासन की। लोग दूध के नाम पर क्या पी जा रहे हैं इसको लेकर सकते में हैं।
सहालग खत्म, अब मिलावट से फिर धंधा चमकाने में जुटे धंधेबाज : सहालग खत्म होने के बाद मंद पड़े धंधे को चमकाने के लिए नया तरीका इजाद किया है। धंधेबाजों ने डीजल-पेट्रोल और पानी की तरह टैंक में भरकर मिलावटी दूध खपा रहे हैं। इससे उन्हें अधिक मुनाफा हो रहा है। क्रीम व फैट निकाल ले रहे हैं और गुणवत्ताविहीन दूध आपूर्ति कर रहे हें, वह भी असली दूध की रेट में।
खैर, लोग दूध न मिलने के चलते इसी टैंक पर दूध लेने को विवश हैं। गांव-कस्बे से यह दूध धंधेबाज मंगवाकर बाजार में उतार रह हैं, जबकि इतने बड़े पैमाने पर रोड किनारे सज रही दूध की मंडी का कोई लाइसेंस और आदेश तक नहीं है। लेकिन, रात में धंधेबाज यह खेल करके चले जा रहे हैं।