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बस्ती शुगर मिल की चिमनी पर चढ़े तीन कर्मचारी
basti
Updated Mon, 29 Oct 2018 11:32 PM IST
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चिमनी पर चढ़े कर्मचारी।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती/वाल्टरगंज। बंद हो चुकी द बस्ती शुगर मिल यूनिट ऑफ फेनिल ग्रुप के उपकरणों को निकाले जाने की सूचना पर मिल कर्मचारी एकजुट हो गए। बकाया मानदेय भुगतान के लिए मिल की चिमनी पर चढ़ गए। करीब दो घंटे के ड्रामे के बाद समझौते पर नीचे उतरे।
बस्ती शुगर मिल मार्च 2013 से ही बंद है। मिल के स्क्रैप पौने चार करोड़ में पहले ही नीलाम हो चुक हैं। नीलाम स्क्रैप की निकासी सोमवार को थी। मिल कर्मचारियों के विरोध की सूचना पर एसडीएम सदर श्री प्रकाश शुक्ल, सीओ सिटी आलोक सिंह, थानाध्यक्ष सर्वेश राय, पीएसी और पुलिस फोर्स के साथ मिल से नीलामी के लिए उपकरण निकलवाने के लिए पहुंचे थे। जानकारी होते ही मिल के कर्मचारी और मजदूर एकजुट हो गए। तीन कर्मचारी 120 फुट से अधिक ऊंची चिमनी पर चढ़ गए। जानकारी होते ही मिल के कर्मचारियों के अलावा आसपास के किसान भी पहुंच गए। कर्मचारियों ने विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। कर्मचारियों की मांग है कि बकाये का भुगतान करके ही सामान मिल परिसर से जाने देंगे। कर्मचारियों के लामबंद होने की जानकारी पर एडीएम रमेश चंद्र भी पहुंच गए। कर्मचारियों को समझाने का दौर शुरू हुआ। निदेशक ने फेनिल शुगर मिल के पत्र का हवाला देकर 15 दिन का समय की बात की। इसमें कहा गया है कि कर्मचारियों को समायोजित किया जाएगा। वहीं, स्क्रैप के खरीदार ने भी एक हफ्ते में धन जमा करने की बात कही है। कर्मचारियों का कहना है कि करीब दो करोड़ बकाया है, जिसमें 88 लाख दो वर्ष के वेतन का है जो नहीं मिला। द बस्ती शुगर मिल के मार्च 2013 में बंद होने के दौरान 450 स्थायी, अस्थायी तौर कर्मचारी जुड़े थे। कर्मचारियों का कहना है कि अब सामान जा रहा है तो हम लोगों को भुगतान कौन और कैसे होगा। चिमनी पर चढ़े राम बहाल, राम उग्रह, दीन दयाल प्रशासन से बकाये भुगतान का लिखित मांग करने लगे। बातचीत के बाद एक हफ्ते की मोहलत पर लोग नीचे उतरे। मिलकर्मियों की तरफ से आशुतोष सिंह, सूर्य मनी, सुरेन्द्र मिश्र, अशोक सिंह, राम धनी, उदयभान, संजीव श्रीवास्तव, अखिलेश शुक्ल, रामतेज आदि रहे। एडीएम रमेश चंद्र ने बताया कि जब भुगतान के लिए मिल का स्क्रैप नीलाम हुआ है तो स्क्रैप को व्यापारी ले ही जाएगा। इस बाबत एसडीएम श्रीप्रकाश शुक्ल ने बताया कि मिल के स्क्रैप नीलाम हुए हैं तो उन्हें निकलवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। मिल प्रबंधन और कर्मचारियों में समायोजन को लेकर बात है। स्क्रैप कारोबारी ने एक हफ्ते में नीलामी की रकम जमा करने की बात कही है। विरोध कर रहे लोग भी मान गए हैं।
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बस्ती शुगर मिल मार्च 2013 से ही बंद है। मिल के स्क्रैप पौने चार करोड़ में पहले ही नीलाम हो चुक हैं। नीलाम स्क्रैप की निकासी सोमवार को थी। मिल कर्मचारियों के विरोध की सूचना पर एसडीएम सदर श्री प्रकाश शुक्ल, सीओ सिटी आलोक सिंह, थानाध्यक्ष सर्वेश राय, पीएसी और पुलिस फोर्स के साथ मिल से नीलामी के लिए उपकरण निकलवाने के लिए पहुंचे थे। जानकारी होते ही मिल के कर्मचारी और मजदूर एकजुट हो गए। तीन कर्मचारी 120 फुट से अधिक ऊंची चिमनी पर चढ़ गए। जानकारी होते ही मिल के कर्मचारियों के अलावा आसपास के किसान भी पहुंच गए। कर्मचारियों ने विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। कर्मचारियों की मांग है कि बकाये का भुगतान करके ही सामान मिल परिसर से जाने देंगे। कर्मचारियों के लामबंद होने की जानकारी पर एडीएम रमेश चंद्र भी पहुंच गए। कर्मचारियों को समझाने का दौर शुरू हुआ। निदेशक ने फेनिल शुगर मिल के पत्र का हवाला देकर 15 दिन का समय की बात की। इसमें कहा गया है कि कर्मचारियों को समायोजित किया जाएगा। वहीं, स्क्रैप के खरीदार ने भी एक हफ्ते में धन जमा करने की बात कही है। कर्मचारियों का कहना है कि करीब दो करोड़ बकाया है, जिसमें 88 लाख दो वर्ष के वेतन का है जो नहीं मिला। द बस्ती शुगर मिल के मार्च 2013 में बंद होने के दौरान 450 स्थायी, अस्थायी तौर कर्मचारी जुड़े थे। कर्मचारियों का कहना है कि अब सामान जा रहा है तो हम लोगों को भुगतान कौन और कैसे होगा। चिमनी पर चढ़े राम बहाल, राम उग्रह, दीन दयाल प्रशासन से बकाये भुगतान का लिखित मांग करने लगे। बातचीत के बाद एक हफ्ते की मोहलत पर लोग नीचे उतरे। मिलकर्मियों की तरफ से आशुतोष सिंह, सूर्य मनी, सुरेन्द्र मिश्र, अशोक सिंह, राम धनी, उदयभान, संजीव श्रीवास्तव, अखिलेश शुक्ल, रामतेज आदि रहे। एडीएम रमेश चंद्र ने बताया कि जब भुगतान के लिए मिल का स्क्रैप नीलाम हुआ है तो स्क्रैप को व्यापारी ले ही जाएगा। इस बाबत एसडीएम श्रीप्रकाश शुक्ल ने बताया कि मिल के स्क्रैप नीलाम हुए हैं तो उन्हें निकलवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। मिल प्रबंधन और कर्मचारियों में समायोजन को लेकर बात है। स्क्रैप कारोबारी ने एक हफ्ते में नीलामी की रकम जमा करने की बात कही है। विरोध कर रहे लोग भी मान गए हैं।
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