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मांगों के लिए आंदोलन पर डटे
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Fri, 02 Dec 2016 11:15 PM IST
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जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता पर केस होने और सुल्तानपुर में अधिवक्ता के हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को प्रदर्शन कर विरोध दिवस मनाया। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आंदोलित अधिवक्ताओं ने दो न्यायिक अधिकारियों के तबादले की मांग भी की।
बार काउंसिल ने बस्ती के अधिवक्ता राममणि शुक्ल पर कैदी भागने के बाद हुए केस तथा सुल्तानपुर में अधिवक्ता के हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होने पर नाराजगी जताई। इस संबंधित में भेजे निर्देश में शुक्रवार को विरोध दिवस मानने का आह्वान किया था। इसी क्रम में शुक्रवार सुबह सभी अधिवक्ता एकजुट होकर सिविल कोर्ट मध्य गेट पर प्रदर्शन शुरू किया।
इस दौरान हुई सभा में सिविल बार अध्यक्ष हरिश्चंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बस्ती की घटना को बार काउंसिल ने संज्ञान में लेते हुए मुख्य न्यायमूर्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट से मांग की है कि बस्ती में नियुक्त एक न्यायाधीश तथा एक मजिस्ट्रेट के कृत्यों को जांच कराकर अन्यत्र स्थानांतरित करें। पुलिस प्रशासन से मांग की कि मुकदमे की निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई समाप्त करें।
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रविवार को सिविल बार के अध्यक्ष प्रतिनिधि मंडल के साथ काउंसिल के कार्यवाहक अध्यक्ष कु. दरवेेश तथा हाईकोर्ट के प्रशासनिक जज से मुलाकात कर मांग पत्र दिया और समस्याओं से अवगत कराया। बस्ती और सुल्तानपुर की घटनाओं को संज्ञान में लेते हुए उत्तर प्रदेेश के सभी अधिवक्ता संघों एवं अधिवक्ताओं से दो दिसंबर को विरोध दिवस मनाने का निर्देश दिया था।
विरोध सभा के बाद भारी संख्या में सभी अधिवक्ता संघों के सदस्यों ने न्याय मार्ग से विरोध प्रदर्शन करते हुए कमिश्नर कोर्ट परिसर होते हुए कलेक्ट्रट परिसर, शास्त्री चौक से दोबारा सभा स्थल पर पहुंचे। सिविल बार अध्यक्ष ने कहा कि जब तक अधिवक्ता का नाम केस से नहीं निकाला जाता तथा निष्पक्ष जांच नहीं होती कार्य बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं समर्थन में टैक्सेशन बार एसोसिएशन अध्यक्ष ओपी गुप्ता के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कार्य नहीं किया।
इस मौके पर सिविल बार के महामंत्री दयाशंकर दुबे, यंग बार अध्यक्ष भानु प्रताप शुक्ल, महामंत्री शेषनाथ पाठक, जनपद बार के महामंत्री मारूत कुमार शुक्ल, कमिश्नरबार के महामंत्री विनय कुमार बक्शी के अलावा प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव, रविशरण सिंह, मोहम्मद हुसैन, परमात्मा प्रसाद चौधरी, वंशीधर पांडेय, विजय सेन सिंह, बद्री प्रसाद दुबे, अजय श्रीवास्तव, राजेश विक्रम सिंह, राम कृपाल चौधरी, महेश कुमार श्रीवास्तव, अरबिंद नारायण पांडेय, राजेश सिंह, अजय पाल, दिलीप कुमार, मृत्युंजय उपाध्याय, पावेंद्र पुरी, राजकिशोर पांडेय आदि रहे।
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बार काउंसिल ने बस्ती के अधिवक्ता राममणि शुक्ल पर कैदी भागने के बाद हुए केस तथा सुल्तानपुर में अधिवक्ता के हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होने पर नाराजगी जताई। इस संबंधित में भेजे निर्देश में शुक्रवार को विरोध दिवस मानने का आह्वान किया था। इसी क्रम में शुक्रवार सुबह सभी अधिवक्ता एकजुट होकर सिविल कोर्ट मध्य गेट पर प्रदर्शन शुरू किया।
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इस दौरान हुई सभा में सिविल बार अध्यक्ष हरिश्चंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बस्ती की घटना को बार काउंसिल ने संज्ञान में लेते हुए मुख्य न्यायमूर्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट से मांग की है कि बस्ती में नियुक्त एक न्यायाधीश तथा एक मजिस्ट्रेट के कृत्यों को जांच कराकर अन्यत्र स्थानांतरित करें। पुलिस प्रशासन से मांग की कि मुकदमे की निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई समाप्त करें।
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रविवार को सिविल बार के अध्यक्ष प्रतिनिधि मंडल के साथ काउंसिल के कार्यवाहक अध्यक्ष कु. दरवेेश तथा हाईकोर्ट के प्रशासनिक जज से मुलाकात कर मांग पत्र दिया और समस्याओं से अवगत कराया। बस्ती और सुल्तानपुर की घटनाओं को संज्ञान में लेते हुए उत्तर प्रदेेश के सभी अधिवक्ता संघों एवं अधिवक्ताओं से दो दिसंबर को विरोध दिवस मनाने का निर्देश दिया था।
विरोध सभा के बाद भारी संख्या में सभी अधिवक्ता संघों के सदस्यों ने न्याय मार्ग से विरोध प्रदर्शन करते हुए कमिश्नर कोर्ट परिसर होते हुए कलेक्ट्रट परिसर, शास्त्री चौक से दोबारा सभा स्थल पर पहुंचे। सिविल बार अध्यक्ष ने कहा कि जब तक अधिवक्ता का नाम केस से नहीं निकाला जाता तथा निष्पक्ष जांच नहीं होती कार्य बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं समर्थन में टैक्सेशन बार एसोसिएशन अध्यक्ष ओपी गुप्ता के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कार्य नहीं किया।
इस मौके पर सिविल बार के महामंत्री दयाशंकर दुबे, यंग बार अध्यक्ष भानु प्रताप शुक्ल, महामंत्री शेषनाथ पाठक, जनपद बार के महामंत्री मारूत कुमार शुक्ल, कमिश्नरबार के महामंत्री विनय कुमार बक्शी के अलावा प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव, रविशरण सिंह, मोहम्मद हुसैन, परमात्मा प्रसाद चौधरी, वंशीधर पांडेय, विजय सेन सिंह, बद्री प्रसाद दुबे, अजय श्रीवास्तव, राजेश विक्रम सिंह, राम कृपाल चौधरी, महेश कुमार श्रीवास्तव, अरबिंद नारायण पांडेय, राजेश सिंह, अजय पाल, दिलीप कुमार, मृत्युंजय उपाध्याय, पावेंद्र पुरी, राजकिशोर पांडेय आदि रहे।