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नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू, खरना आज
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नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू, खरना आज
- सूर्य की आराधना करेंगी व्रती महिलाएं करेंगी आराधना
- कुआनों के अमहट, सरयू, मनोरमा नदी व तालाबों के किनारे सजने लगीं बेदियां
- गहराई में जाने से रोकने के लिए कई जगह बैरीकेडिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सूर्य आराधना का महापर्व छठ का सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। शहर के दक्षिणी छोर को छूकर बहने वाली कुआनो के अमहट तट पर छठ मैया की सैकड़ों बेदियां सजाई गई हैं। साफ-सफाई के अलावा प्रकाश, फर्स्ट एड जैसे इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन की तरफ से भी जरूरी तमाम इंतजाम किए जा रहे हैं। नदी में गहराई में कोई न पहुंचे, इसे रोकने के लिए बांस-बल्ली की बैरिकेडिंग की गई है।
चार दिवसीय उत्सव के प्रथम दिन सोमवार को व्रती महिलाओं ने नहाय-खाय से व्रत का शुभारंभ किया। व्रतियों ने नहाकर सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लिया। चार दिन तक चलने वाले इस लोकपर्व में सूर्य को शक्ति प्रदान करने के मुख्य स्रोत उषा और प्रत्यूषा (सूर्य की पत्नियां) की सूर्य के साथ-साथ संयुक्त आराधना की जाती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (उषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर व्रती महिलाएं परिवार की मंगल कामना करती हैं। मन में कामना रखती हैं कि जिस प्रकार से सूर्य के तेज से संसार आलोकित होता है, वैसे ही उनके पुत्र-पति की कीर्ति भी चारों ओर फैले। वहीं, बाजारों में छठ के सामानों की खरीदारी के लिए सुबह से ही भीड़ लगी रही।
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आगे के तीन दिन के कार्यक्रम
खरना: इसमें व्रती महिलाएं आंशिक उपवास करती हैं। दिन में व्रत रहने के उपरांत शाम को धुले प्रसाद (खरना) करती हैं। किसी पवित्र धुले हुए स्थान पर चूल्हा स्थापित कर अक्षत, धूप, दीप व सिंदूर से पूजा की जाती है। तब प्रसाद के आटे से फुल्के तथा साठी की खीर बनाई जाती है। इसे रसियाव-रोटी भी कहा जाता है। यही रसियाव-रोटी खाने के बाद उनका छठ व्रत शुरू हो जाएगा जो प्रात:कालीन सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण होगा। रोटियां बनाने के बाद बचे हुए आटे से एक छोटी रोटी बनाकर रखेंगी। जिसे ओठगन कहते हैं। अंतिम दिन इसी रोटी से व्रत तोड़ने की परंपरा है।
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अग्रासन के बाद खरना का विधान
खरना की पूर्व व्रती महिलाएं हथेली के आकार की बनी हुई तस्तरी में धूप देने के बाद थाली में परोसे हुए संपूर्ण सामान में से थोड़ा-थोड़ा लेकर डालती हैं। इसे अग्नि जिमाना कहते हैं। उसके बाद अग्रासन या गऊग्रास निकाल कर ही व्रती भोजन करती हैं। उनके भोजन के बाद परिवार के बाकी सदस्यों में प्रसाद वितरित होता है। इस प्रसाद का इतना महत्व है कि दूर-दराज के लोग भी इसे पाने के लिए आते हैं।
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भिन्न अवसरों के अलग-अलग गीत
इस लोकपर्व के विभिन्न अवसरों पर प्रसाद बनाते, खरना के समय, अर्घ्य देने जाते, अर्घ्य दान करते समय और घाट से घर लौटते समय के लिए अलग-अलग भक्ति-भाव से परिपूर्ण लोकगीत गाए जाते हैं। भाव प्रधान इन गीतों को सुनकर बरबस ही आध्यात्मिक ऊर्जा का एहसास होता है।
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चेयरमैन व थानाध्यक्ष ने किया पूजा घाट का निरीक्षण
रुधौली। नहाय खाय पर्व के साथ सोमवार से शुरू हुए छठ पूजा को देखते हुए रुधौली नगर पंचायत में दो स्थानों पर घाट पर साफ सफाई एवं व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी गई है। सोमवार को चेयरमैन धीरसेन निषाद व थानाध्यक्ष संजय मिश्रा ने दोनों ही घाटों पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। चेयरमैन ने बताया कि नगर पंचायत में के दो स्थानों बुद्धि बाजार एवं सरघाट देवी मंदिर परिसर में स्थित पोखरों पर छठ पूजा की जाती है, दोनों स्थानों पर घाटों की साफ-सफाई एवं विद्युत की पर्याप्त व्यवस्था करवा दी गई है। बुद्धि बाजार परिसर में स्थित पोखरे पर रवि कुमार एवं सारघाट देवी मंदिर परिसर में स्थित पोखरे पर नगर पंचायत के मोहन श्रीवास्तव को व्यवस्था को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा ने कहा कि बताया कि छठ को देखते हुए दोनों स्थानों पर महिला पुलिस कर्मियों के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखे जाएंगे।
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पोखरे की साफ-सफाई हुई
गायघाट। छठ पर्व के मद्देनजर झारखंडेश्वर नाथ धाम गायघाट स्थित पोखरे की साफ-सफाई की गई। प्रधान पर्यवेक्षक सूर्यभान उपाध्याय के नेतृत्व में नगर पंचायत गायघाट के सफाई कर्मियों द्वारा घास फूस व जलीय पौधों को हटाकर पूजा अर्चना करने के लायक बनाया गया। इसकी तैयारी के लिए नगर पंचायत गायघाट के अधिशासी अधिकारी अमरजीत के निर्देश पर प्रधान पर्यवेक्षक सूर्यभान की अगुवाई में सफाई कर्मियों ने जगह-जगह साफ सफाई की।
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- सूर्य की आराधना करेंगी व्रती महिलाएं करेंगी आराधना
- कुआनों के अमहट, सरयू, मनोरमा नदी व तालाबों के किनारे सजने लगीं बेदियां
- गहराई में जाने से रोकने के लिए कई जगह बैरीकेडिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सूर्य आराधना का महापर्व छठ का सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। शहर के दक्षिणी छोर को छूकर बहने वाली कुआनो के अमहट तट पर छठ मैया की सैकड़ों बेदियां सजाई गई हैं। साफ-सफाई के अलावा प्रकाश, फर्स्ट एड जैसे इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन की तरफ से भी जरूरी तमाम इंतजाम किए जा रहे हैं। नदी में गहराई में कोई न पहुंचे, इसे रोकने के लिए बांस-बल्ली की बैरिकेडिंग की गई है।
चार दिवसीय उत्सव के प्रथम दिन सोमवार को व्रती महिलाओं ने नहाय-खाय से व्रत का शुभारंभ किया। व्रतियों ने नहाकर सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लिया। चार दिन तक चलने वाले इस लोकपर्व में सूर्य को शक्ति प्रदान करने के मुख्य स्रोत उषा और प्रत्यूषा (सूर्य की पत्नियां) की सूर्य के साथ-साथ संयुक्त आराधना की जाती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (उषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर व्रती महिलाएं परिवार की मंगल कामना करती हैं। मन में कामना रखती हैं कि जिस प्रकार से सूर्य के तेज से संसार आलोकित होता है, वैसे ही उनके पुत्र-पति की कीर्ति भी चारों ओर फैले। वहीं, बाजारों में छठ के सामानों की खरीदारी के लिए सुबह से ही भीड़ लगी रही।
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आगे के तीन दिन के कार्यक्रम
खरना: इसमें व्रती महिलाएं आंशिक उपवास करती हैं। दिन में व्रत रहने के उपरांत शाम को धुले प्रसाद (खरना) करती हैं। किसी पवित्र धुले हुए स्थान पर चूल्हा स्थापित कर अक्षत, धूप, दीप व सिंदूर से पूजा की जाती है। तब प्रसाद के आटे से फुल्के तथा साठी की खीर बनाई जाती है। इसे रसियाव-रोटी भी कहा जाता है। यही रसियाव-रोटी खाने के बाद उनका छठ व्रत शुरू हो जाएगा जो प्रात:कालीन सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण होगा। रोटियां बनाने के बाद बचे हुए आटे से एक छोटी रोटी बनाकर रखेंगी। जिसे ओठगन कहते हैं। अंतिम दिन इसी रोटी से व्रत तोड़ने की परंपरा है।
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अग्रासन के बाद खरना का विधान
खरना की पूर्व व्रती महिलाएं हथेली के आकार की बनी हुई तस्तरी में धूप देने के बाद थाली में परोसे हुए संपूर्ण सामान में से थोड़ा-थोड़ा लेकर डालती हैं। इसे अग्नि जिमाना कहते हैं। उसके बाद अग्रासन या गऊग्रास निकाल कर ही व्रती भोजन करती हैं। उनके भोजन के बाद परिवार के बाकी सदस्यों में प्रसाद वितरित होता है। इस प्रसाद का इतना महत्व है कि दूर-दराज के लोग भी इसे पाने के लिए आते हैं।
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भिन्न अवसरों के अलग-अलग गीत
इस लोकपर्व के विभिन्न अवसरों पर प्रसाद बनाते, खरना के समय, अर्घ्य देने जाते, अर्घ्य दान करते समय और घाट से घर लौटते समय के लिए अलग-अलग भक्ति-भाव से परिपूर्ण लोकगीत गाए जाते हैं। भाव प्रधान इन गीतों को सुनकर बरबस ही आध्यात्मिक ऊर्जा का एहसास होता है।
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चेयरमैन व थानाध्यक्ष ने किया पूजा घाट का निरीक्षण
रुधौली। नहाय खाय पर्व के साथ सोमवार से शुरू हुए छठ पूजा को देखते हुए रुधौली नगर पंचायत में दो स्थानों पर घाट पर साफ सफाई एवं व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी गई है। सोमवार को चेयरमैन धीरसेन निषाद व थानाध्यक्ष संजय मिश्रा ने दोनों ही घाटों पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। चेयरमैन ने बताया कि नगर पंचायत में के दो स्थानों बुद्धि बाजार एवं सरघाट देवी मंदिर परिसर में स्थित पोखरों पर छठ पूजा की जाती है, दोनों स्थानों पर घाटों की साफ-सफाई एवं विद्युत की पर्याप्त व्यवस्था करवा दी गई है। बुद्धि बाजार परिसर में स्थित पोखरे पर रवि कुमार एवं सारघाट देवी मंदिर परिसर में स्थित पोखरे पर नगर पंचायत के मोहन श्रीवास्तव को व्यवस्था को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा ने कहा कि बताया कि छठ को देखते हुए दोनों स्थानों पर महिला पुलिस कर्मियों के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखे जाएंगे।
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पोखरे की साफ-सफाई हुई
गायघाट। छठ पर्व के मद्देनजर झारखंडेश्वर नाथ धाम गायघाट स्थित पोखरे की साफ-सफाई की गई। प्रधान पर्यवेक्षक सूर्यभान उपाध्याय के नेतृत्व में नगर पंचायत गायघाट के सफाई कर्मियों द्वारा घास फूस व जलीय पौधों को हटाकर पूजा अर्चना करने के लायक बनाया गया। इसकी तैयारी के लिए नगर पंचायत गायघाट के अधिशासी अधिकारी अमरजीत के निर्देश पर प्रधान पर्यवेक्षक सूर्यभान की अगुवाई में सफाई कर्मियों ने जगह-जगह साफ सफाई की।
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