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खाद और बीज में मिलावट की पहचान करेगा साफ्टवेयर
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बस्ती जिले के शुभम शुक्ल ने बनाया साफ्टवेयर।
- फोटो : BASTI
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खाद-बीज में मिलावट की पहचान करेगा साफ्टवेयर
बस्ती। योग्यता किसी की मोहताज नहीं होती। इसे बस्ती के शुभम शुक्ल ने सच कर दिखाया है। गौर ब्लाक के सामान्य परिवार के बनकटिया निवासी शुभम ने खाद, बीज और उर्वरक में मिलावट की पहचान करने वाला सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसे भारत सरकार ने मंजूरी देते हुए शुभम को ढाई लाख रुपये प्रोत्साहन स्वरूप दिया है। सरकार इसे जुलाई में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लांच करेगी।
राम भवन शुक्ल व संतोष कुमारी के पुत्र शुभम इंटर की शिक्षा यहीं से ग्रहण करने के बाद आईआईटी की तैयारी के लिए राजस्थान गए। बाद में उनका चयन एनआईटी दिल्ली में हो गया। शुभम को अपना हुनर दिखाने का अवसर पहली बार मार्च 2019 में तब मिला, जब सरकार की ओर से एनआईटी जमशेदपुर में स्मार्ट इंडिया हैकेथान प्रतियोगिता हुई। इसमें शुभम ने इसी साफ्टवेयर का प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में दो लाख बच्चे शामिल हुए थे। इनमें उनका प्रोजेक्ट प्रथम स्थान पर रहा। जनवरी 2020 में भारत सरकार की ओर से शुभम को बुलाकर उनका सॉफ्टवेयर चेक किया गया। इसके बाद भारत सरकार ने इसपर अपनी मुहर लगा दी है।
शुभम कहते हैं कि इस साफ्टवेयर की मदद से किसान खाद, बीज व उर्वरक में मिलावट की पहचान कर सकेंगे। भारत सरकार ने सॉफ्टवेयर को स्वीकृति देने के साथ ही ढाई लाख रुपये प्रोत्साहन स्वरूप भेंट किया है। उसे जुलाई में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में लांच किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने बजट का प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। शुभम ने कहा कि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कृषक परिवार की रही है। उन्होंने खेती-किसानी को करीब से देखा है। सॉफ्टवेयर बनाने के पीछे उनका मकसद किसानों तक शुद्ध उत्पाद पहुंचाना है।
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बस्ती। योग्यता किसी की मोहताज नहीं होती। इसे बस्ती के शुभम शुक्ल ने सच कर दिखाया है। गौर ब्लाक के सामान्य परिवार के बनकटिया निवासी शुभम ने खाद, बीज और उर्वरक में मिलावट की पहचान करने वाला सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसे भारत सरकार ने मंजूरी देते हुए शुभम को ढाई लाख रुपये प्रोत्साहन स्वरूप दिया है। सरकार इसे जुलाई में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लांच करेगी।
राम भवन शुक्ल व संतोष कुमारी के पुत्र शुभम इंटर की शिक्षा यहीं से ग्रहण करने के बाद आईआईटी की तैयारी के लिए राजस्थान गए। बाद में उनका चयन एनआईटी दिल्ली में हो गया। शुभम को अपना हुनर दिखाने का अवसर पहली बार मार्च 2019 में तब मिला, जब सरकार की ओर से एनआईटी जमशेदपुर में स्मार्ट इंडिया हैकेथान प्रतियोगिता हुई। इसमें शुभम ने इसी साफ्टवेयर का प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में दो लाख बच्चे शामिल हुए थे। इनमें उनका प्रोजेक्ट प्रथम स्थान पर रहा। जनवरी 2020 में भारत सरकार की ओर से शुभम को बुलाकर उनका सॉफ्टवेयर चेक किया गया। इसके बाद भारत सरकार ने इसपर अपनी मुहर लगा दी है।
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शुभम कहते हैं कि इस साफ्टवेयर की मदद से किसान खाद, बीज व उर्वरक में मिलावट की पहचान कर सकेंगे। भारत सरकार ने सॉफ्टवेयर को स्वीकृति देने के साथ ही ढाई लाख रुपये प्रोत्साहन स्वरूप भेंट किया है। उसे जुलाई में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में लांच किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने बजट का प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। शुभम ने कहा कि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कृषक परिवार की रही है। उन्होंने खेती-किसानी को करीब से देखा है। सॉफ्टवेयर बनाने के पीछे उनका मकसद किसानों तक शुद्ध उत्पाद पहुंचाना है।
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