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Basti News: ऑनलाइन जांच में छह संदिग्ध दिव्यांग प्रमाणपत्र पकड़े, नोटिस जारी
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सीएमओ कार्यालय के दिव्यांग प्रमाण पत्र कक्ष में जांच करते डिप्टी सीएमओ नोडल अधिकारी डॉ. एके चौ
बस्ती। सिद्धार्थनगर के बाद अब बस्ती में भी दिव्यांग प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। यूडीआईडी कार्ड बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदनों की जांच के दौरान छह संदिग्ध दिव्यांग प्रमाणपत्र पकड़े गए हैं। जांच में इन प्रमाणपत्रों पर सीएमओ और मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों की मुहर व हस्ताक्षर मिले, लेकिन जिला अस्पताल के मूल रजिस्टर में संबंधित प्रमाणपत्रों का रिकॉर्ड नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग ने सभी छह आवेदकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण और प्रमाण मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
जिला अस्पताल में प्रत्येक सोमवार को मेडिकल बोर्ड के चिकित्सक दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए आवेदकों की जांच करते हैं। जांच के बाद मैनुअल प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। इसके बाद लाभार्थी या संबंधित विभाग इसे पोर्टल पर अपलोड कर यूडीआईडी कार्ड के लिए आवेदन करता है। सीएमओ कार्यालय में प्रमाणपत्र और आवेदन का सत्यापन होने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
ऑनलाइन आवेदनों की जांच के दौरान कुछ प्रमाणपत्र संदिग्ध मिले। उनकी जारी तिथि के आधार पर जिला अस्पताल के मूल रजिस्टर से मिलान कराया गया तो संबंधित आवेदकों के नाम दर्ज नहीं मिले। कुछ प्रमाणपत्रों पर दर्ज नाम और रजिस्टर के रिकॉर्ड में भी अंतर पाया गया। प्रमाणपत्रों पर मुहर और हस्ताक्षर प्रथम दृष्टया सही दिख रहे हैं, लेकिन चिकित्सकों की जांच रिपोर्ट में भी विसंगतियां मिली हैं। इससे प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
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इन छह आवेदकों को नोटिस
नोडल अधिकारी डॉ. एके चौधरी के अनुसार संदिग्ध डाटा वाले आवेदकों में हनुमान वर्मा निवासी मरवटिया कुंवर, हर्रैया, अनूप कुमार श्रीवास्तव निवासी कटरा बाइपास, गांधीनगर, रोहित कुमार यादव निवासी धरमूपुर, दुबौलिया, सार्थक सिंह निवासी पकड़ी चौहान, दुबौलिया, हर्षित अंबेश निवासी पूर्वांचल भवन, कटरा मूड़घाट और अंजलि निवासी ननकर, नैकापार, कलवारी शामिल हैं। सभी को नोटिस जारी कर प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
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पुराने प्रमाणपत्रों की जांच से खुल सकता है राज
पिछले एक-दो वर्षों में जारी प्रमाणपत्रों के मूल रजिस्टर, मैनुअल प्रमाणपत्र, ऑनलाइन आवेदन और यूडीआईडी कार्ड का मिलान कराया जाए तो अन्य संदिग्ध मामले भी सामने आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल बिना सत्यापन यूडीआईडी कार्ड जारी करने पर रोक लगाते हुए प्रक्रिया को सख्त किया है।
कोट
बिना सत्यापन अब यूडीआईडी कार्ड जारी नहीं किए जा रहे हैं। जांच के दौरान छह संदिग्ध डाटा मिले हैं, जिनसे संबंधित लोगों को नोटिस भेजा गया है। जवाब नहीं मिलने पर विधिक कार्रवाई के लिए पत्राचार किया जाएगा।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती
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जिला अस्पताल में प्रत्येक सोमवार को मेडिकल बोर्ड के चिकित्सक दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए आवेदकों की जांच करते हैं। जांच के बाद मैनुअल प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। इसके बाद लाभार्थी या संबंधित विभाग इसे पोर्टल पर अपलोड कर यूडीआईडी कार्ड के लिए आवेदन करता है। सीएमओ कार्यालय में प्रमाणपत्र और आवेदन का सत्यापन होने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
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ऑनलाइन आवेदनों की जांच के दौरान कुछ प्रमाणपत्र संदिग्ध मिले। उनकी जारी तिथि के आधार पर जिला अस्पताल के मूल रजिस्टर से मिलान कराया गया तो संबंधित आवेदकों के नाम दर्ज नहीं मिले। कुछ प्रमाणपत्रों पर दर्ज नाम और रजिस्टर के रिकॉर्ड में भी अंतर पाया गया। प्रमाणपत्रों पर मुहर और हस्ताक्षर प्रथम दृष्टया सही दिख रहे हैं, लेकिन चिकित्सकों की जांच रिपोर्ट में भी विसंगतियां मिली हैं। इससे प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
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इन छह आवेदकों को नोटिस
नोडल अधिकारी डॉ. एके चौधरी के अनुसार संदिग्ध डाटा वाले आवेदकों में हनुमान वर्मा निवासी मरवटिया कुंवर, हर्रैया, अनूप कुमार श्रीवास्तव निवासी कटरा बाइपास, गांधीनगर, रोहित कुमार यादव निवासी धरमूपुर, दुबौलिया, सार्थक सिंह निवासी पकड़ी चौहान, दुबौलिया, हर्षित अंबेश निवासी पूर्वांचल भवन, कटरा मूड़घाट और अंजलि निवासी ननकर, नैकापार, कलवारी शामिल हैं। सभी को नोटिस जारी कर प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
पुराने प्रमाणपत्रों की जांच से खुल सकता है राज
पिछले एक-दो वर्षों में जारी प्रमाणपत्रों के मूल रजिस्टर, मैनुअल प्रमाणपत्र, ऑनलाइन आवेदन और यूडीआईडी कार्ड का मिलान कराया जाए तो अन्य संदिग्ध मामले भी सामने आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल बिना सत्यापन यूडीआईडी कार्ड जारी करने पर रोक लगाते हुए प्रक्रिया को सख्त किया है।
कोट
बिना सत्यापन अब यूडीआईडी कार्ड जारी नहीं किए जा रहे हैं। जांच के दौरान छह संदिग्ध डाटा मिले हैं, जिनसे संबंधित लोगों को नोटिस भेजा गया है। जवाब नहीं मिलने पर विधिक कार्रवाई के लिए पत्राचार किया जाएगा।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती