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एसआईआर : 70 हजार मतदाता लापता...फार्म लेकर ढूंढ रहे बीएलओ
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कप्तानगंज के कौड़ी कोल में एसआईआर करतीं बीएलओ प्रमिला वर्मा। संवाद
बस्ती। मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की तिथि 26 दिसंबर तक बढ़ने से काफी सहूलियत मिली है। उम्मीद हैं कि जिन मतदाताओं की एसआईआर प्रक्रिया किन्हीं कारणों से उलझी हुई हैं उन्हें पूरा करने में अब आसानी होगी। 60 प्रतिशत मतदाताओं का एसआईआर पूरा हो गया है। इनके मैपिंग और पते को लेकर कोई संशय नहीं है। मृतक मतदाता भी लगभग खोज लिए गए हैं। केवल 30 प्रतिशत मतदाताओं की कुंडली खंगालनी शेष रह गई है। केवल पता बदलने वाले अधिकांश मतदाताओं का एसआईआर अपूर्ण है।
बता दें कि एसआईआर प्रक्रिया शुरू हुए एक महीने से अधिक का वक्त बीत गया है। आयोग ने दो बार इसकी अवधि भी बढ़ाई। अब 26 दिसंबर तक इस प्रक्रिया को पूरा करना है। 30 लाख की आबादी वाले इस जिले में कुल 19 लाख 430 मतदाताओं की संख्या है। प्रत्येक मतदाता के नाम एसआईआर फार्म बीएलओ स्तर पर वितरित हो चुका है। इसमें से 13 लाख मतदाताओं का पता ठिकाना सहित वर्ष 2003 की सूची से मिलान करके डाटा फीडिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
शेष छह लाख मतदाताओं की कुंडली खंगालने में सरकारी मशीनरी शिद्दत से जुटी हुई है। बताया जा रहा है कि 70 हजार मतदाता अपने पते पर मौजूद नहीं मिल रहे हैं। इनके बारे में जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। जिससे इन मतदाताओं का एसआईआर फार्म वितरित होने से बचा हुआ है। इन मतदाताओं की धरातल पर तस्दीक करने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। जबकि एक लाख 90 हजार मतदाता ऐसे हैं जिन्हें वर्तमान पते पर पाया गया है कि लेकिन, वर्ष 2003 की सूची से इनकी मैपिंग फंसी हुई है।
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इसमें अधिकांश महिला मतदाता और गैर विधानसभा क्षेत्र एवं जिलों से आकर रहने वाले लोग शामिल है। जिनका पुराना रिकाॅर्ड नहीं मिल पा रहा है। विवाह के बाद ससुराल आकर रह रहीं बहुओं को एसआईआर 2003 की सूची में अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी में से किसी एक का इपिक नंबर, निर्वाचन क्षेत्र संख्या, भाग संख्या और मतदाता सूची में क्रमांक संख्या का विवरण देना हैं। इसी के बाद एसआईआर प्रक्रिया पूरी होगी।
यह विवरण खोज पाने में तमाम मतदाता असमर्थ हैं। इस वजह से इन मतदाताओं का एसआईआर लटका हुआ है। प्रशासन का दावा है कि बढ़ी हुई अवधि में शतप्रतिशत मतदाताओं का ब्योरा खोज लिया जाएगा। अभी तक 58467 मृतक मतदाता खोजे गए हैं। इन मतदाताओं का दोबारा सत्यापन भी कराया जा रहा है।
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शुरूआत में अधिकारियों की सख्ती से मिली सफलता
एसआईआर अभियान के शुरूआत से ही प्रशासनिक अफसरों की सख्ती के चलते 60 प्रतिशत की सफलता हासिल हुई। शुरूआती दौर में एसआईआर को लेकर एडीएम प्रतिपाल सिंह, एसडीएम सदर शत्रुहन पाठक के कड़े तेवर का वीडियो खूबर वायरल हुआ था। इसमें एसडीएम सदर एसआईआर कार्य में लगे विकास विभाग के कर्मचारी पर जमकर बिफरे थे। एफआईआर कराने तक की चेतावनी दे दी थी। इसी के बाद जिले भर में एसआईआर प्रक्रिया पूरी करने को लेकर कर्मचारियों में हलचल बढ़ गई।
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डीएम रोजाना कर रहीं मॉनीटरिंग
डीएम कृत्तिका ज्योत्सना रोजाना एसआईआर की मॉनीटरिंग खुद कर रही है। वह मातहत अफसरों से तहसीलवार फीडिंग के डाटा का मुआयना कर रही है। इसके बाद प्रशासनिक अफसरों को योजनाबद्ध ढंग से कार्य आवंटित कर रही है। इसके लिए डीएम के निर्देश पर बीएसए कार्यालय, तहसील कार्यालय, विकास भवन, बलॉक कार्यालयों में एसआईआर अभियान पूरा करने के लिए डाटा फीडिंग की व्यवस्था बनाई गई है। बूथवार बीएलओ और उनके सहयोग में नियुक्त कर्मचारी खुद डाटा फीडिंग कर रहे हैं। इसके अलावा मतदाताओं से पूर्ण विवरण के साथ प्राप्त फार्म को आवंटित फीडिंग सेंटर पर पहुंचा रहे हैं।
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कोट
एसआईआर फार्म को पूर्ण करने में लापरवाही कतई नहीं बरती जा रही है। जिन मतदाताओं की पते न मिलने की रिपोर्ट मिल रही उसकी क्रॉस चेकिंग कराई जा रही है। आयोग की वेबसाइट से वर्ष 2003 की सूची निकालकर मतदाताओं को उनके रिश्तेदारों का विवरण संकलित करने में भी मदद की जा रही है। मृतक मतदाताओं का दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है।
-कृत्तिका ज्योत्सना, जिला निर्वाचन अधिकारी/डीएम।
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बता दें कि एसआईआर प्रक्रिया शुरू हुए एक महीने से अधिक का वक्त बीत गया है। आयोग ने दो बार इसकी अवधि भी बढ़ाई। अब 26 दिसंबर तक इस प्रक्रिया को पूरा करना है। 30 लाख की आबादी वाले इस जिले में कुल 19 लाख 430 मतदाताओं की संख्या है। प्रत्येक मतदाता के नाम एसआईआर फार्म बीएलओ स्तर पर वितरित हो चुका है। इसमें से 13 लाख मतदाताओं का पता ठिकाना सहित वर्ष 2003 की सूची से मिलान करके डाटा फीडिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
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शेष छह लाख मतदाताओं की कुंडली खंगालने में सरकारी मशीनरी शिद्दत से जुटी हुई है। बताया जा रहा है कि 70 हजार मतदाता अपने पते पर मौजूद नहीं मिल रहे हैं। इनके बारे में जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। जिससे इन मतदाताओं का एसआईआर फार्म वितरित होने से बचा हुआ है। इन मतदाताओं की धरातल पर तस्दीक करने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। जबकि एक लाख 90 हजार मतदाता ऐसे हैं जिन्हें वर्तमान पते पर पाया गया है कि लेकिन, वर्ष 2003 की सूची से इनकी मैपिंग फंसी हुई है।
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इसमें अधिकांश महिला मतदाता और गैर विधानसभा क्षेत्र एवं जिलों से आकर रहने वाले लोग शामिल है। जिनका पुराना रिकाॅर्ड नहीं मिल पा रहा है। विवाह के बाद ससुराल आकर रह रहीं बहुओं को एसआईआर 2003 की सूची में अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी में से किसी एक का इपिक नंबर, निर्वाचन क्षेत्र संख्या, भाग संख्या और मतदाता सूची में क्रमांक संख्या का विवरण देना हैं। इसी के बाद एसआईआर प्रक्रिया पूरी होगी।
यह विवरण खोज पाने में तमाम मतदाता असमर्थ हैं। इस वजह से इन मतदाताओं का एसआईआर लटका हुआ है। प्रशासन का दावा है कि बढ़ी हुई अवधि में शतप्रतिशत मतदाताओं का ब्योरा खोज लिया जाएगा। अभी तक 58467 मृतक मतदाता खोजे गए हैं। इन मतदाताओं का दोबारा सत्यापन भी कराया जा रहा है।
शुरूआत में अधिकारियों की सख्ती से मिली सफलता
एसआईआर अभियान के शुरूआत से ही प्रशासनिक अफसरों की सख्ती के चलते 60 प्रतिशत की सफलता हासिल हुई। शुरूआती दौर में एसआईआर को लेकर एडीएम प्रतिपाल सिंह, एसडीएम सदर शत्रुहन पाठक के कड़े तेवर का वीडियो खूबर वायरल हुआ था। इसमें एसडीएम सदर एसआईआर कार्य में लगे विकास विभाग के कर्मचारी पर जमकर बिफरे थे। एफआईआर कराने तक की चेतावनी दे दी थी। इसी के बाद जिले भर में एसआईआर प्रक्रिया पूरी करने को लेकर कर्मचारियों में हलचल बढ़ गई।
डीएम रोजाना कर रहीं मॉनीटरिंग
डीएम कृत्तिका ज्योत्सना रोजाना एसआईआर की मॉनीटरिंग खुद कर रही है। वह मातहत अफसरों से तहसीलवार फीडिंग के डाटा का मुआयना कर रही है। इसके बाद प्रशासनिक अफसरों को योजनाबद्ध ढंग से कार्य आवंटित कर रही है। इसके लिए डीएम के निर्देश पर बीएसए कार्यालय, तहसील कार्यालय, विकास भवन, बलॉक कार्यालयों में एसआईआर अभियान पूरा करने के लिए डाटा फीडिंग की व्यवस्था बनाई गई है। बूथवार बीएलओ और उनके सहयोग में नियुक्त कर्मचारी खुद डाटा फीडिंग कर रहे हैं। इसके अलावा मतदाताओं से पूर्ण विवरण के साथ प्राप्त फार्म को आवंटित फीडिंग सेंटर पर पहुंचा रहे हैं।
कोट
एसआईआर फार्म को पूर्ण करने में लापरवाही कतई नहीं बरती जा रही है। जिन मतदाताओं की पते न मिलने की रिपोर्ट मिल रही उसकी क्रॉस चेकिंग कराई जा रही है। आयोग की वेबसाइट से वर्ष 2003 की सूची निकालकर मतदाताओं को उनके रिश्तेदारों का विवरण संकलित करने में भी मदद की जा रही है। मृतक मतदाताओं का दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है।
-कृत्तिका ज्योत्सना, जिला निर्वाचन अधिकारी/डीएम।