{"_id":"6adfbc3b48cb01671e0d7ec1","slug":"bade-farewell-to-mata-rani-with-teary-eyes-basti-news-c-207-1-bst1001-170350-2026-10-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: नम आंखों से दी माता रानी को विदाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: नम आंखों से दी माता रानी को विदाई
विज्ञापन
टिनिच क्षेत्र में प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालु संवाद
- फोटो : samvad
बस्ती। शहर में सोमवार देर रात दुर्गा मूर्तियों का विसर्जन शुरू हुआ। गाजे-बाजे और जयकारों के बीच निकली विसर्जन यात्राओं में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। अमहट घाट तक मूर्तियों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता रानी को विदाई दी और सुख-समृद्धि की कामना की।
नवरात्र से शुरू हुए दुर्गा पूजा समारोह का समापन सोमवार को हुआ। रविवार को पूर्णिमा होने के कारण शहर में स्थापित मूर्तियों का विसर्जन एक दिन बाद किया गया। दिनभर पूजा पंडालों में तैयारियां चलती रहीं। शाम ढलने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों पर सजी मूर्तियों के साथ विसर्जन यात्राएं निकलने लगीं। रात आठ बजे के बाद विभिन्न मार्गों से मूर्तियां गांधीनगर मार्ग पर पहुंचने लगीं।
रात नौ बजे के बाद रोडवेज से अमहट घाट तक करीब पांच किलोमीटर में मूर्तियों की कतारें लग गईं। प्रशासन के अनुसार, शहरी क्षेत्र में 532 मूर्तियां स्थापित थीं, जबकि विसर्जन स्थल पर करीब 1600 मूर्तियों के पहुंचने से व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
विज्ञापन
विसर्जन यात्रा के दौरान देवी के जयकारों के साथ हर-हर महादेव और जय श्रीराम के उद्घोष गूंजते रहे। सड़क किनारे और घरों की छतों पर खड़े श्रद्धालुओं ने मूर्तियों पर फूल बरसाकर विदाई दी। महिलाएं, बच्चे और पुरुष माता रानी के अंतिम दर्शन के लिए देर रात तक डटे रहे। अमहट घाट पर विसर्जन का सिलसिला देर रात शुरू हुआ और मूर्तियों के पहुंचने के साथ जारी रहा।
-- -- -- -- -- --
झांकियों ने मोहा मन, देवी-देवताओं के स्वरूप में दिखे बच्चे
विसर्जन यात्राओं में देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां भी निकाली गईं। बच्चे राधा-कृष्ण और मां दुर्गा का रूप धारण कर शामिल हुए। महिषासुर मर्दिनी के मंचन ने लोगों का ध्यान खींचा। कुछ श्रद्धालु भगवान शिव का रूप धारण कर यात्रा में शामिल हुए। गांधीनगर में आकृति देवी का भव्य स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहा। कंपनीबाग के शशांक भी शिव के रूप में नजर आए। पिता के कंधों पर बैठे बच्चों की झलक देखने के लिए लोग उत्साहित रहे।
-- -- -- -- -- -
शाम पांच बजे से थम गया शहर का आवागमन
विसर्जन यात्राओं को देखते हुए शाम पांच बजे से शहर का यातायात प्रभावित रहा। मालवीय मार्ग, ब्लॉक रोड, गांधीनगर, अस्पताल चौराहा, मंगल बाजार और पुरानी बस्ती मार्ग से मूर्तियों के वाहन गुजरने लगे। प्रशासन ने विसर्जन मार्ग पर चारपहिया वाहनों की आवाजाही रोक दी। गांधीनगर मार्ग पर बाइक और साइकिल से भी आवागमन प्रतिबंधित रहा। अमहट से रोडवेज और फव्वारा तिराहे तक करीब छह किलोमीटर के दायरे में लोगों को पैदल आने-जाने दिया गया। रामेश्वरपुरी, महरीखांवा, तुरकहिया, दरिया खां, इंदिरा नगर, पाठक जी की गली और ओरीजोत के रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई।
-- -- -- -- -
ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी, अधिकारी रहे मुस्तैद
विसर्जन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए कंपनीबाग से अमहट घाट तक सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। अमहट घाट पर कंट्रोल रूम बनाया गया। जुलूस और विसर्जन स्थल की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से की गई। डीएम कृत्तिका ज्योत्सना, एसपी ओमवीर सिंह, एएसपी श्यामकांत, सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती, एसडीएम सदर प्रमोद कुमार, सीओ सिटी मानसी दहिया और नगर पालिका के ईओ अंगद गुप्ता ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारी दिन से लेकर देर रात तक सुरक्षा और विसर्जन की व्यवस्था संभालते रहे।
विज्ञापन
नवरात्र से शुरू हुए दुर्गा पूजा समारोह का समापन सोमवार को हुआ। रविवार को पूर्णिमा होने के कारण शहर में स्थापित मूर्तियों का विसर्जन एक दिन बाद किया गया। दिनभर पूजा पंडालों में तैयारियां चलती रहीं। शाम ढलने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों पर सजी मूर्तियों के साथ विसर्जन यात्राएं निकलने लगीं। रात आठ बजे के बाद विभिन्न मार्गों से मूर्तियां गांधीनगर मार्ग पर पहुंचने लगीं।
विज्ञापन
रात नौ बजे के बाद रोडवेज से अमहट घाट तक करीब पांच किलोमीटर में मूर्तियों की कतारें लग गईं। प्रशासन के अनुसार, शहरी क्षेत्र में 532 मूर्तियां स्थापित थीं, जबकि विसर्जन स्थल पर करीब 1600 मूर्तियों के पहुंचने से व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
विज्ञापन
विसर्जन यात्रा के दौरान देवी के जयकारों के साथ हर-हर महादेव और जय श्रीराम के उद्घोष गूंजते रहे। सड़क किनारे और घरों की छतों पर खड़े श्रद्धालुओं ने मूर्तियों पर फूल बरसाकर विदाई दी। महिलाएं, बच्चे और पुरुष माता रानी के अंतिम दर्शन के लिए देर रात तक डटे रहे। अमहट घाट पर विसर्जन का सिलसिला देर रात शुरू हुआ और मूर्तियों के पहुंचने के साथ जारी रहा।
झांकियों ने मोहा मन, देवी-देवताओं के स्वरूप में दिखे बच्चे
विसर्जन यात्राओं में देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां भी निकाली गईं। बच्चे राधा-कृष्ण और मां दुर्गा का रूप धारण कर शामिल हुए। महिषासुर मर्दिनी के मंचन ने लोगों का ध्यान खींचा। कुछ श्रद्धालु भगवान शिव का रूप धारण कर यात्रा में शामिल हुए। गांधीनगर में आकृति देवी का भव्य स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहा। कंपनीबाग के शशांक भी शिव के रूप में नजर आए। पिता के कंधों पर बैठे बच्चों की झलक देखने के लिए लोग उत्साहित रहे।
शाम पांच बजे से थम गया शहर का आवागमन
विसर्जन यात्राओं को देखते हुए शाम पांच बजे से शहर का यातायात प्रभावित रहा। मालवीय मार्ग, ब्लॉक रोड, गांधीनगर, अस्पताल चौराहा, मंगल बाजार और पुरानी बस्ती मार्ग से मूर्तियों के वाहन गुजरने लगे। प्रशासन ने विसर्जन मार्ग पर चारपहिया वाहनों की आवाजाही रोक दी। गांधीनगर मार्ग पर बाइक और साइकिल से भी आवागमन प्रतिबंधित रहा। अमहट से रोडवेज और फव्वारा तिराहे तक करीब छह किलोमीटर के दायरे में लोगों को पैदल आने-जाने दिया गया। रामेश्वरपुरी, महरीखांवा, तुरकहिया, दरिया खां, इंदिरा नगर, पाठक जी की गली और ओरीजोत के रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई।
ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी, अधिकारी रहे मुस्तैद
विसर्जन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए कंपनीबाग से अमहट घाट तक सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। अमहट घाट पर कंट्रोल रूम बनाया गया। जुलूस और विसर्जन स्थल की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से की गई। डीएम कृत्तिका ज्योत्सना, एसपी ओमवीर सिंह, एएसपी श्यामकांत, सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती, एसडीएम सदर प्रमोद कुमार, सीओ सिटी मानसी दहिया और नगर पालिका के ईओ अंगद गुप्ता ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारी दिन से लेकर देर रात तक सुरक्षा और विसर्जन की व्यवस्था संभालते रहे।