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भक्तों की आस्था के जल से हुआ शिवस्नान
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Mon, 01 Aug 2016 11:29 PM IST
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भदेश्वरनाथ मंदिर पर लगी कंवाड़ियों की लाइन।
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श्रावण मास की तेरस को भद्रेश्वरनाथ शिव मंदिर सहित अन्य शिव मंदिर पर कांवड़ियों के साथ ही अन्य शिवभक्तों ने बड़ी संख्या में जलाभिषेक कर शिव की आराधना की। बोल बम के स्वर से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। सड़कों पर कई किलोमीटर की दूरी की कांवड़ियों का रेला लगा रहा। प्रशासन के अनुसार तकरीबन तीन लाख कांवड़ियों ने भद्रेश्वरनाथ शिव मंदिर में जलाभिषेक किया।
शुक्रवार और शनिवार को बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोंडा और संतकबीरनगर जनपद से बड़ी संख्या में कांवड़िए अयोध्या की ओर से सरयू नदी का जल लेने के लिए रवाना हुआ थे। रविवार की शाम तक अधिकांश कांवड़िए सरयू का जल लेकर डीजे की धुन पर नाचते गाते बस्ती पहुंचे। फुटहिया, अमहट घाट, डीएम आवास के निकट, कंपनी बाग सहित अन्य स्थानों पर कांवड़ियों ने कुछ देर आराम करने के बाद भद्रेश्वरनाथ धाम की ओर रवाना हुए। भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर और जिला प्रशासन ने रात 12 बजे से ही जलाभिषेक शुरू करा दिया। भीड़ का आलम यह था कि मंदिर के बाहर पुलिस वाले मोटा रस्सा लेकर भीड़ को रोके थे। हर पांच मिनट पर तकरीबन एक हजार कांवड़ियों को जलाभिषेक के लिए भेजा जा रहा था। भीड़ अधिक होने के कारण जैसे तैसे धक्का मुक्की के बीच कांवड़िए मंदिर के गर्भगृह तक तो पहुंच जाते थे, मगर वहां जाकर खुद को बचाने और जल चढ़ाने की चुनौती थी। मंदिर के गर्भ गृह में लगे सिपाही कांवड़ियों को तुंरत मंदिर से बाहर कर रहे थे।
भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस के छक्के छूट गए। रात 12 से सुबह आठ बजे तक भीड़ को संभालने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के कोरउ ,बेहिल नाथ ,पिड़िया बानपुर, थाल्हापार शिव मंदिरो पर भोर से ही शिव भक्तों ने जयघोष के साथ जलाभिषेक किया। जयपुर , खोरिया, टिकवाजोत, सजनाखोर, मथौली, दौलतपुर, महादेवा आदि स्थानो पर भी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। मुंडेरवा प्रतिनिधि के अनुसार सोमवार को श्रावण त्रयोदशी के अवसर पर थाना क्षेत्र के देवरिया माफी, बरडाड, बेहिल नाथ शिव
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मंदिरों पर रात एक बजे से ही शिव भक्तों जल चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया था। शिव भक्तों के इलाज के लिए मुन्डेरवा और ओड़वारा के डॉक्टर तैनात रहे। कुछ समाज सेवियों ने मंदिरो पर कैंप लगवाया जहां भक्तों के रहने और भंडारे कि व्यवस्था थी। थानाध्यक्ष राम अशीष ने बताया कि जलाभिषेक शांतिपूर्ण रहा। सोनहा प्रतिनिधि के अनुसार कोठिला में कोठिलेश्वरनाथ, आहर, बनरही जंगल, रामपुर, कोरियाडीह, करनपुर, पड़री, सोनहा, मंडफ आदि स्थानो पर स्थित मंदिरों में जलाभिषेक किया गया।
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शुक्रवार और शनिवार को बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोंडा और संतकबीरनगर जनपद से बड़ी संख्या में कांवड़िए अयोध्या की ओर से सरयू नदी का जल लेने के लिए रवाना हुआ थे। रविवार की शाम तक अधिकांश कांवड़िए सरयू का जल लेकर डीजे की धुन पर नाचते गाते बस्ती पहुंचे। फुटहिया, अमहट घाट, डीएम आवास के निकट, कंपनी बाग सहित अन्य स्थानों पर कांवड़ियों ने कुछ देर आराम करने के बाद भद्रेश्वरनाथ धाम की ओर रवाना हुए। भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर और जिला प्रशासन ने रात 12 बजे से ही जलाभिषेक शुरू करा दिया। भीड़ का आलम यह था कि मंदिर के बाहर पुलिस वाले मोटा रस्सा लेकर भीड़ को रोके थे। हर पांच मिनट पर तकरीबन एक हजार कांवड़ियों को जलाभिषेक के लिए भेजा जा रहा था। भीड़ अधिक होने के कारण जैसे तैसे धक्का मुक्की के बीच कांवड़िए मंदिर के गर्भगृह तक तो पहुंच जाते थे, मगर वहां जाकर खुद को बचाने और जल चढ़ाने की चुनौती थी। मंदिर के गर्भ गृह में लगे सिपाही कांवड़ियों को तुंरत मंदिर से बाहर कर रहे थे।
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भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस के छक्के छूट गए। रात 12 से सुबह आठ बजे तक भीड़ को संभालने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के कोरउ ,बेहिल नाथ ,पिड़िया बानपुर, थाल्हापार शिव मंदिरो पर भोर से ही शिव भक्तों ने जयघोष के साथ जलाभिषेक किया। जयपुर , खोरिया, टिकवाजोत, सजनाखोर, मथौली, दौलतपुर, महादेवा आदि स्थानो पर भी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। मुंडेरवा प्रतिनिधि के अनुसार सोमवार को श्रावण त्रयोदशी के अवसर पर थाना क्षेत्र के देवरिया माफी, बरडाड, बेहिल नाथ शिव
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मंदिरों पर रात एक बजे से ही शिव भक्तों जल चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया था। शिव भक्तों के इलाज के लिए मुन्डेरवा और ओड़वारा के डॉक्टर तैनात रहे। कुछ समाज सेवियों ने मंदिरो पर कैंप लगवाया जहां भक्तों के रहने और भंडारे कि व्यवस्था थी। थानाध्यक्ष राम अशीष ने बताया कि जलाभिषेक शांतिपूर्ण रहा। सोनहा प्रतिनिधि के अनुसार कोठिला में कोठिलेश्वरनाथ, आहर, बनरही जंगल, रामपुर, कोरियाडीह, करनपुर, पड़री, सोनहा, मंडफ आदि स्थानो पर स्थित मंदिरों में जलाभिषेक किया गया।