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Basti News: शेल्टर होम बने नहीं, सार्वजनिक स्थानों से गली-मोहल्लों तक कुत्तों का आतंक

Fri, 09 Jan 2026 12:55 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jan 2026 12:55 AM IST
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Shelters are not built, and dogs are a menace from public places to alleys and neighborhoods.
पिकौरा ​शिव गुलाम में बैठे कुत्ते। संवाद
बस्ती। आवारा कुत्तों के संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद यहां के प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है। सार्वजनिक जगह अस्पताल, कचहरी, विकास भवन, बाजार, रेलवे स्टेशन से लेकर गली-मोहल्लों और सड़क तक इनकी भरमार है।
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यदि लोग चौकन्ना न रहे तो न जाने किस गली में कुत्ते काट कर घायल कर दें। सड़क पर तो चलते वाहनों को देखते ही यह भौंकते हुए दौड़ा ले रहे हैं। इनसे बचने-बचाने में कई बार हादसे भी हो जा रहे हैं।
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वहीं नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि जब तक आदेश के साथ बजट नहीं उपलब्ध होगा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की व्यवस्था नहीं बन पाएगी। खुंखार आवारा कुत्ते रोजाना लोगों को शिकार बना रहे हैं। यह सबसे अधिक बच्चों और बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं। इनके आतंक से बच्चों ने गली-मोहल्लों में खेलना तक बंद कर दिया है।
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हालात यह हैं कि अभिभावकों को स्कूल वैन या फिर ई-रिक्शा तक बच्चों को छोड़ने और लाने जाना पड़ता है। शहर ही नहीं, बल्कि इन दिनों गांव-गांव तक कुत्तों का आतंक है। झुंड बनाकर घूमने वाले कुत्ते लोगों को देखते ही भौंकने लगते हैं।
कुत्तों के भय से लोग रास्ता बदलने पर मजबूर हैं। शहर के पिकौरा शिवगुलाम के कमलेश का कहना है कि कभी उनके कॉलोनी में छह-सात कुत्ते दिखते थे, अब तो इनकी लंबी फौज हो गई। ये कुत्ते न सिर्फ आतंक का पर्याय बने हैं, बल्कि कॉलोनी की सफाई व्यवस्था भी चौपट कर रहे हैं। कूड़े-कचरे मुंह में दबाकर लाते हैं और आबादी वाले इलाके में छोड़ देते हैं। बैरियहवां मोहल्ले के अमित कुमार का कहना है कि पहले लोग आवारा कुत्तों को खाना इसलिए देते थे कि रात में वह घर की हिफाजत करेंगे, मगर जब से हिंसक हुए हैं, लोगों ने कुत्तों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। कुत्तों का आतंक पॉश कॉलोनियों में भी है। सिविल लाइंस और न्याय मार्ग पर दिनभर कुत्ते धमा चौकड़ी करते दिख जाएंगे, जबकि इस रास्ते से जिले के अधिकारियों का भी आना-जाना है।
जिला अस्पताल में रोज लग रहे रैबीज के 100 इंजेक्शन : एसआईसी डॉ. खालिद रिजवान अहमद के अनुसार, इन दिनों रोजाना 100 से अधिक रैबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। पहले इनकी खपत 60 से 70 के आसपास थी। मौजूदा समय में 2200 वॉयल एआरवी (एंटी रैबीज वैक्सीन) और एंटी सिरम वैक्सीन 50 वॉयल उपलब्ध हैं।
असुरक्षित महसूस करने पर कर देते हैं हमला : मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण कुमार गुप्ता का कहना है कि ठंड के मौसम कुत्तों की प्रवृत्ति शांत रहती है। ठंड से बचने के लिए वह भी कहीं ठिकाना बनाकर दुबके रहते हैं। ऐसे में जब उन्हें कोई अड़चन महसूस होती है तो आक्रामक बन जाते हैं।

इस समय प्रजनन के बाद कुत्तों के बच्चों बड़े हो रहे हैं। ऐसे में जब वह खुद या बच्चों को असुरक्षित महसूस करते हैं तो लोगों पर हमला बोल देते हैं। सतर्कता से कुत्तों से बचा जा सकता है।
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