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Basti News: शारदा अभियान बना वरदान, शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ रहे बच्चे

Thu, 20 Aug 2026 01:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 01:21 AM IST
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Sharda Abhiyan has become a boon, children are joining the mainstream of education.
बस्ती। आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए शारदा अभियान वरदान साबित हो रहा है। शिक्षा से वंचित बच्चों को चिह्नित कर विशेष प्रशिक्षण दिलाने के बाद विद्यालयों में उनका नामांकन कराया जा रहा है। इस सत्र अब तक 1462 बच्चों का नामांकन कराया जा चुका है। विद्यालय पहुंचकर बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं और शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य का रास्ता भी खुल रहा है।
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जनपद में कुल 2071 परिषदीय विद्यालय हैं। शारदा अभियान के तहत इन विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को आसपास के गांवों में सर्वे करना होता है। प्रधानाध्यापक घर-घर जाकर ऐसे बच्चों को चिह्नित करते हैं, जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा रहे हैं। इसके बाद आउट ऑफ स्कूल बच्चों की सूची तैयार की जाती है।
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पिछले शैक्षिक सत्र में 300 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने 1462 आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित किया था। इनमें 82 विद्यालय ऐसे थे, जहां छह या उससे अधिक बच्चे स्कूल से बाहर मिले। इन विद्यालयों में कुल 780 बच्चे चिह्नित किए गए। वहीं, 218 विद्यालयों में छह से कम बच्चे चिह्नित हुए। इनकी संख्या 682 रही।
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छह या उससे अधिक आउट ऑफ स्कूल बच्चे वाले विद्यालयों में विशेष प्रशिक्षकों की तैनाती की गई है। प्रशिक्षक बच्चों को उनकी उम्र और बौद्धिक स्तर के अनुसार प्रशिक्षण दे रहे हैं। वहीं, छह से कम बच्चे चिह्नित होने वाले विद्यालयों में विशेष प्रशिक्षक के बजाय शिक्षक ही बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद बच्चों का कक्षावार नामांकन कराया जा रहा है।
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हर साल जुलाई-अगस्त में चलता है अभियान
शारदा अभियान हर साल जुलाई और अगस्त में चलाया जाता है। इस दौरान प्रधानाध्यापक घर-घर जाकर स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को चिह्नित करते हैं। सूची तैयार होने के बाद बच्चों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर उनकी उम्र व बौद्धिक स्तर के अनुसार विद्यालय में नामांकन कराया जाता है।
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78 प्रशिक्षकों के तीन माह के मानदेय का बजट मिला
आउट ऑफ स्कूल बच्चों को प्रशिक्षण देने वाले 78 विशेष प्रशिक्षकों को मई से जुलाई तक तीन माह का मानदेय नहीं मिला था। बजट उपलब्ध न होने के कारण भुगतान लंबित था। अब विभाग को तीन माह के मानदेय का बजट मिल गया है। जल्द ही प्रशिक्षकों को भुगतान किया जाएगा।

कोट
जो बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं, उन्हें शारदा अभियान के तहत चिह्नित कर प्रशिक्षण दिलाया जाता है। इसके बाद उम्र और बौद्धिक स्तर के अनुसार कक्षावार नामांकन कराया जाता है।
-अनूप कुमार, बीएसए
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