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Basti News: पहले से थी हमले की आशंका, पुलिस ने नहीं दिया ध्यान
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बस्ती। पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के पिपरा राम किशुन गांव में दुर्गा पूजा समारोह के दौरान ही तकियवां गांव के कुछ लोगों से विवाद की नींव पड़ गई थी। विसर्जन यात्रा के दौरान हमले की आशंका भी थी।
आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने स्थानीय पुलिस को अवगत भी कराया था। मगर, पुलिस ने सक्रियता नहीं बरती। मूर्ति उठने के समय केवल एक-दो पुलिसकर्मी ड्यूटी पर लगाए गए थे। आयोजन समिति के लोगों का मानना है कि यदि मूर्ति के साथ पर्याप्त पुलिस मौजूद रही होती तो इतना बड़ी घटना नहीं होती।
दुर्गा पूजा समारोह शुरू होने के एक महीने पहले से ही थानेदारों से लगायत सभी पुलिस कर्मियों को शांति एवं सुरक्षा कायम रखने की नसीहत दी जा रही थी। सबकुछ ठीक भी चल रहा था। अंतिम दौर में पुरानी बस्ती पुलिस की हल्की सी चूक पूरे महकमे की किरकिरी करा दी। घटनाक्रम को लेकर यह थाना कठघरे में आ गया है।
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एसपी ओमवीर सिंह ने घटना के अगले ही दिन दो चौकी इंचार्ज और चार बीट सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बावजूद इसके थाने के कुछ जिम्मेदार पुलिस अफसर अभी भी अपनी बचत का रास्ता ढूंढ़ते फिर रहे हैं। पिपरा किशुन गांव में दो पूजा पंडाल स्थापित होता है।
प्राथमिकी दर्ज कराने वाले शुभम जायसवाल बताते हैं कि उन्हीं के गांव के दूसरे पूजा कमेटी में शामिल एक लड़के से तकियवां गांव के कुछ लड़कों का विवाद हो गया था। इसलिए पहले से विसर्जन जुलूस के दौरान मामला बढ़ने की आशंका थी। चूंकि तकियवां गांव विसर्जन मार्ग पर ही पड़ता है। पंडाल में निरीक्षण करने पहुंची पुलिस से हमले की आशंका जता दी गई थी।
गांव से सोमवार को विसर्जन जुलूस जब निकला तो मूर्ति के साथ थाने के केवल एक या दो सिपाही दिखाई पड़े। दूसरे गांव के लोग 30 से 40 की संख्या में जिला अस्पताल के तीसरे गेट के सामने स्टेशन रोड वाली गली में पहले से खड़े थे। रात 11 बजे के करीब जैसे ही लोग मूर्ति लेकर गली के सामने पहुंचे वह लोग हमला बोल दिए। उस समय मूर्ति के साथ पांच-छह पुरुष ही मौजूद रहे। इसके अलावा ज्यादातर महिलाएं थीं। आगे चल रही मूर्तियों के साथ के लोग पहुंचे तब उपद्रवियों को खदेड़ा जा सका। इस हमले में उनकी रिश्ते की भांजी आंचल को चोटें भी आई हैं।
क्षेत्र भ्रमण में भी हुई चूक : दुर्गा पूजा के दौरान स्थानीय पुलिस की क्षेत्र भ्रमण में भी काफी चूक हुई है। पुलिस उच्चाधिकारी खुद इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। यदि थाना क्षेत्र के प्रत्येक पंडाल से सुरक्षा की दृष्टि से निरंतर फीडबैक प्राप्त किया गया होता तो विसर्जन के समय हमले की नौबत नहीं आती। पुलिस उच्चाधिकारी अपनी जांच में इस बिंदु को भी शामिल किए हैं।
इसी वजह से दो चौकी इंचार्ज समेत छह पुलिस कर्मियों को निलंबित भी किया गया है। अभी थाने के अकर्मण्य रहने वाले थाने के अन्य अफसर भी लपेटे में आ सकते हैं।
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आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने स्थानीय पुलिस को अवगत भी कराया था। मगर, पुलिस ने सक्रियता नहीं बरती। मूर्ति उठने के समय केवल एक-दो पुलिसकर्मी ड्यूटी पर लगाए गए थे। आयोजन समिति के लोगों का मानना है कि यदि मूर्ति के साथ पर्याप्त पुलिस मौजूद रही होती तो इतना बड़ी घटना नहीं होती।
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दुर्गा पूजा समारोह शुरू होने के एक महीने पहले से ही थानेदारों से लगायत सभी पुलिस कर्मियों को शांति एवं सुरक्षा कायम रखने की नसीहत दी जा रही थी। सबकुछ ठीक भी चल रहा था। अंतिम दौर में पुरानी बस्ती पुलिस की हल्की सी चूक पूरे महकमे की किरकिरी करा दी। घटनाक्रम को लेकर यह थाना कठघरे में आ गया है।
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एसपी ओमवीर सिंह ने घटना के अगले ही दिन दो चौकी इंचार्ज और चार बीट सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बावजूद इसके थाने के कुछ जिम्मेदार पुलिस अफसर अभी भी अपनी बचत का रास्ता ढूंढ़ते फिर रहे हैं। पिपरा किशुन गांव में दो पूजा पंडाल स्थापित होता है।
प्राथमिकी दर्ज कराने वाले शुभम जायसवाल बताते हैं कि उन्हीं के गांव के दूसरे पूजा कमेटी में शामिल एक लड़के से तकियवां गांव के कुछ लड़कों का विवाद हो गया था। इसलिए पहले से विसर्जन जुलूस के दौरान मामला बढ़ने की आशंका थी। चूंकि तकियवां गांव विसर्जन मार्ग पर ही पड़ता है। पंडाल में निरीक्षण करने पहुंची पुलिस से हमले की आशंका जता दी गई थी।
गांव से सोमवार को विसर्जन जुलूस जब निकला तो मूर्ति के साथ थाने के केवल एक या दो सिपाही दिखाई पड़े। दूसरे गांव के लोग 30 से 40 की संख्या में जिला अस्पताल के तीसरे गेट के सामने स्टेशन रोड वाली गली में पहले से खड़े थे। रात 11 बजे के करीब जैसे ही लोग मूर्ति लेकर गली के सामने पहुंचे वह लोग हमला बोल दिए। उस समय मूर्ति के साथ पांच-छह पुरुष ही मौजूद रहे। इसके अलावा ज्यादातर महिलाएं थीं। आगे चल रही मूर्तियों के साथ के लोग पहुंचे तब उपद्रवियों को खदेड़ा जा सका। इस हमले में उनकी रिश्ते की भांजी आंचल को चोटें भी आई हैं।
क्षेत्र भ्रमण में भी हुई चूक : दुर्गा पूजा के दौरान स्थानीय पुलिस की क्षेत्र भ्रमण में भी काफी चूक हुई है। पुलिस उच्चाधिकारी खुद इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। यदि थाना क्षेत्र के प्रत्येक पंडाल से सुरक्षा की दृष्टि से निरंतर फीडबैक प्राप्त किया गया होता तो विसर्जन के समय हमले की नौबत नहीं आती। पुलिस उच्चाधिकारी अपनी जांच में इस बिंदु को भी शामिल किए हैं।
इसी वजह से दो चौकी इंचार्ज समेत छह पुलिस कर्मियों को निलंबित भी किया गया है। अभी थाने के अकर्मण्य रहने वाले थाने के अन्य अफसर भी लपेटे में आ सकते हैं।