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Basti News: शब-ए-बरात कल, आज गुनाहों की माफी की रात
Thu, 13 Feb 2025 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 13 Feb 2025 12:38 AM IST
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नगर बाजार (बस्ती)। शब-ए-बरात को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। लोगों ने नगर बाजार जामा मस्जिद और कब्रिस्तान को साफ-सुथरा कर पूरी रात जागकर इबादत करेंगे। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार शब-ए-बरात में अल्लाह की इबादत करते हुए उनसे अपने गुनाहों को माफ करने की दुआ मांगी जाती है।
पिछले साल किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बरात कहा जाता है। इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है।
जामा मस्जिद नगर बाजार के इमाम मौलाना अब्दुल हई ने बताया कि इस्लाम धर्म में इसे चार मुकद्दस रातों में से एक माना जाता है। इसमें पहली आशूरा की रात, दूसरी शब-ए-मेराज, तीसरी शब-ए-बरात और चौथी शब-ए-कद्र होती है।
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नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तान की जियारत और हैसियत के मुताबिक खैरात करना इस रात के अहम काम हैं। हिजरी कैलेंडर के अनुसार, शब-ए-बरात की रात हर साल में एक बार शाबान माह की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। संवाद
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पिछले साल किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बरात कहा जाता है। इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है।
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जामा मस्जिद नगर बाजार के इमाम मौलाना अब्दुल हई ने बताया कि इस्लाम धर्म में इसे चार मुकद्दस रातों में से एक माना जाता है। इसमें पहली आशूरा की रात, दूसरी शब-ए-मेराज, तीसरी शब-ए-बरात और चौथी शब-ए-कद्र होती है।
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नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तान की जियारत और हैसियत के मुताबिक खैरात करना इस रात के अहम काम हैं। हिजरी कैलेंडर के अनुसार, शब-ए-बरात की रात हर साल में एक बार शाबान माह की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। संवाद