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सर्वश्रेष्ठ शिक्षक बनकर छा गए सर्वेष्ट

Thu, 06 Sep 2018 12:01 AM IST
basti
basti Updated Thu, 06 Sep 2018 12:01 AM IST
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sarvesht became sarvshreshth teacher
उप राष्ट्रपति के हाथों सम्मान ग्रहण करते सर्वेष्ट मिश्र। - फोटो : amar ujala
बस्ती। सही दिशा में निर्बाध प्रयत्न और लक्ष्य के प्रति समर्पण वह कुंजी है, जो किसी भी सर्वेष्ट को सर्वश्रेष्ठ बना सकती है। सदर ब्लॉक के मूड़घाट जैसे उपेक्षित प्राइमरी स्कूल को राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने में बेशक सर्वेष्ट को तमाम व्यवहारिक समस्याओं से रूबरू होना पड़ा। बुधवार को जब दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का प्रमाणपत्र मिला।  डीएम डॉ. राजशेखर ने सर्वेष्ट की इस कामयाबी के लिए बच्चों के साथ इंटरैक्टिव सत्र और ‘लर्निंग बाय डूइंग’ यानी करके सीखने की विधा का इस्तेमाल को अहम कुंजी बताया, बोले कि तभी जिस स्कूल के विद्यार्थियों की संख्या सिर्फ 19 थी, वहां अब 236 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।     
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जिस वक्त दिल्ली में सर्वेष्ट सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर रहे थे, उस वक्त उनकी कर्मस्थली यानी मूड़घाट प्राथमिक विद्यालय पर जश्न का माहौल था। निर्धारित गणवेश में विद्यालय के बच्चे और शिक्षक-शिक्षिकाओं के अलावा पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद था। सबसे ज्यादा डीएम डॉ. राजशेखर उत्साहित दिखे। 24 घंटे पहले से डीएम ने सजीव प्रसारण दिखाने के प्रबंध करने का एलान कर दिया था। बुधवार को एसपी, सीडीओ, एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ समेत विद्यालय पर 15 मिनट पहले ही पहुंच गए थे। बच्चों-शिक्षकों का अनुशासन और परिसर का माहौल देख डीएम फूले नहीं समाए। पूरी टीम और बच्चों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए डीएम ने कहा कि ऑडियो, विजुअल शिक्षण पद्धति से बहुत ही अच्छा काम किया।  
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जमीन की अदला-बदली कर सड़क बनेगी 
मूड़घाट स्कूल तक संपर्क मार्ग अवरुद्ध है। वहां के कुछ लोगों की रास्ते में निजी जमीन पड़ने की वजह से सड़क निर्माण में समस्या है। डीएम ने सीडीओ, एएमए जिला पंचायत, एसडीएम, और बीडीओ को दायित्व सौंपा कि वे संबंधित से बात करके सड़क बनाने के लिए अपनी निजी भूमि देकर उसके बदले दूसरी सरकारी भूमि की अदला-बदली करके किसी भी तरह सड़क बनाने का प्रबंध करें। ताकि जिला पंचायत स्कूल तक इंटरलॉकिंग रोड का निर्माण कराया जा सके। 
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सम्मान मिला तो जिम्मेदारियां बढ़ गईं : सर्वेष्ट कुमार 
नई दिल्ली। बच्चों से लेकर अभिभावक तक हर दिन शिक्षक के रूप में सम्मान देते हैं। सरकार ने अधिकारिक तौर पर यह अवार्ड देकर मोहर लगा दी। देश का सर्वोच्च सम्मान तो मिला, लेकिन अब अपने कर्त्तव्य और जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। मेरे स्कूल में सौ फीसदी छात्र गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले परिवारों से हैं, जिनके पास घर, खाना, कपड़े व किताबें तक नहीं हैं। सोसायटी के सहयोग से वे शिक्षा से जुड़े हैं।  सरकारी स्कूलों के बच्चे निजी स्कूलों से बेहतर होते हैं। यह दर्शाने के लिए सर्वेष्ट मार्च-अप्रैल में प्रशासन के सहयोग से एक प्रतियोगिता आयोजित करवाने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि इंग्लिश में बेशक मेरे छात्र कमजोर होंगे, लेकिन नॉलेज व स्किल में निजी स्कूलों से विजेता बनेंगे।  
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