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रोडवेज परिसर : हिचकोले खाती बस...दुर्घटना को दावत
Fri, 07 Mar 2025 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 07 Mar 2025 11:43 PM IST
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- जगह- जगह टूटे खड़ंजे, चोटिल हो रहे यात्री
बुनियादी सुविधाओं से महरूम है रोडवेज डिपो परिसर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस से रोडवेज डिपो परिसर में उतरने वाले हैं तो सतर्क हो जाइए। जगह- जगह गड्ढे और क्षतिग्रस्त खड़ंजा में पैर पड़ते ही मोच आने से लेकर दुर्घटना के भी शिकार हो सकते हैं। यहां बसें हिचकोले खाती हुई आती व जाती हैं। झटके से यात्रियों शरीर हिल हिल जाती हैं। गड्ढे में गिरकर लोग चोटिल भी हो रहे हैं। गंभीर दुर्घटना भी घट सकती है, लेकिन जिम्मेदारों को इसकी परवाह नहीं है।
उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम के बस्ती से 101 बसे और अनुबंधित 35 बसे संचालित होती हैं। जगह -जगह गड्ढे, टूटे खडंजे और गंदगी डिपों की छवि को धूमिल कर रहे हैँ। बाहर से आने वाले बस रोडवेज परिसर के गेट की भीतर पहुंचते ही यात्रियों को गड्ढों के कारण झूला झूलने की अनुभूति कराते हैं। झटके से यात्रियों का शरीर हिल जाता है। दोपहर में मैनावती आजमगढ़ के लिए बस तलाशते हुए रोडवेज परिसर में प्रवेश की ध्यान नहीं दिया और पैर गड्ढे में पड़ गया। उनके पैर में मोच आ गया। आए दिन यहां यात्रियों के साथ इस तरह की दुर्घटनाएं घटती हैं। बस चालकों को बस परिसर में लाने और ले जाने में दिक्कत होती है। बस चालकों के मुताबिक इससे बस के कल पूर्जे और टायर तो खराब होते ही है। बड़ी दुर्घटना की भी संभावना बनी रहती है। बस के गेट पर खड़ा यात्री झटका खाकर बस नीचे गिर सकता है और बस के नीचे भी आ सकता है। बताते है कि 1965 में बने इस डिपों में समय के साथ बसों और यात्रियों की संख्या बढ़ी लेकिन यहां की सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। यहां यूरीनल तो है, लेकिन इसके सफाई मानों कोई व्यवस्था न हो, गंदगी के कारण यात्री यूरीनल के करीब नहीं जाना चखते। यात्रियों के लिए लगे चार में दो पंखे खराब नजर आए। दो टोटी के वाटर कूलर सही नजर आएं।
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- बदहाल है रोडवेज कारखाना, हर तरफ-धूल
रोडवेज कारखाना परिसर भी बदहाल है। बताते है कि कारखाना बनने के बाद से अब तक एक बार भी इसका जीर्णोद्धार नहीं हुआ। परिसर का खडंजा उखड़ चुके है। हर तरफ धूल और रेत ही नजर आते हैँ। यहां के फोरमैन, चालक, परिचालक बताते हैं कि धूल के कारण सांस संबंधी रोग होने की संभावना बनी रहती है।
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परिसर में जगह- जगह गड्ढे के कारण बस चढ़ाने में दिक्कत होती है। बस के कल पूर्जे खराब होते हैं। बस के झटके के कारण गेट पर खड़ा यात्री गिर सकता है। दिक्क्ते तो होती है।
- अजय शर्मा, परिचालक, रोडवेज डिपो
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जौनपुर जाना है बस के लिए आए है। पैर चोटिल भी है। रोडवेज परिसर में इतने गड्ढे हैं कि जरा सा चलने में सतर्कता हटा कि पैर में मोच, चोट के अलावा दुर्घटना भी हो सकती है। यात्री सुविधाओं की तरफ परिवहन निगम को ध्यान देना चाहिए।
- रवि, यात्री
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रोडवेज परिसर के जीर्णोद्धार के लिए शासन को लिखा गया है। शासन की स्वीकृति के इसका कार्य कराया जाएगा।
गंदगी के लिए जिम्मेदार सफाई कर्मियों पर कार्रवाई किया जाएगा।
आयुष भटनागर, एआरएम परिवहन निगम
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बुनियादी सुविधाओं से महरूम है रोडवेज डिपो परिसर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस से रोडवेज डिपो परिसर में उतरने वाले हैं तो सतर्क हो जाइए। जगह- जगह गड्ढे और क्षतिग्रस्त खड़ंजा में पैर पड़ते ही मोच आने से लेकर दुर्घटना के भी शिकार हो सकते हैं। यहां बसें हिचकोले खाती हुई आती व जाती हैं। झटके से यात्रियों शरीर हिल हिल जाती हैं। गड्ढे में गिरकर लोग चोटिल भी हो रहे हैं। गंभीर दुर्घटना भी घट सकती है, लेकिन जिम्मेदारों को इसकी परवाह नहीं है।
उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम के बस्ती से 101 बसे और अनुबंधित 35 बसे संचालित होती हैं। जगह -जगह गड्ढे, टूटे खडंजे और गंदगी डिपों की छवि को धूमिल कर रहे हैँ। बाहर से आने वाले बस रोडवेज परिसर के गेट की भीतर पहुंचते ही यात्रियों को गड्ढों के कारण झूला झूलने की अनुभूति कराते हैं। झटके से यात्रियों का शरीर हिल जाता है। दोपहर में मैनावती आजमगढ़ के लिए बस तलाशते हुए रोडवेज परिसर में प्रवेश की ध्यान नहीं दिया और पैर गड्ढे में पड़ गया। उनके पैर में मोच आ गया। आए दिन यहां यात्रियों के साथ इस तरह की दुर्घटनाएं घटती हैं। बस चालकों को बस परिसर में लाने और ले जाने में दिक्कत होती है। बस चालकों के मुताबिक इससे बस के कल पूर्जे और टायर तो खराब होते ही है। बड़ी दुर्घटना की भी संभावना बनी रहती है। बस के गेट पर खड़ा यात्री झटका खाकर बस नीचे गिर सकता है और बस के नीचे भी आ सकता है। बताते है कि 1965 में बने इस डिपों में समय के साथ बसों और यात्रियों की संख्या बढ़ी लेकिन यहां की सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। यहां यूरीनल तो है, लेकिन इसके सफाई मानों कोई व्यवस्था न हो, गंदगी के कारण यात्री यूरीनल के करीब नहीं जाना चखते। यात्रियों के लिए लगे चार में दो पंखे खराब नजर आए। दो टोटी के वाटर कूलर सही नजर आएं।
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- बदहाल है रोडवेज कारखाना, हर तरफ-धूल
रोडवेज कारखाना परिसर भी बदहाल है। बताते है कि कारखाना बनने के बाद से अब तक एक बार भी इसका जीर्णोद्धार नहीं हुआ। परिसर का खडंजा उखड़ चुके है। हर तरफ धूल और रेत ही नजर आते हैँ। यहां के फोरमैन, चालक, परिचालक बताते हैं कि धूल के कारण सांस संबंधी रोग होने की संभावना बनी रहती है।
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परिसर में जगह- जगह गड्ढे के कारण बस चढ़ाने में दिक्कत होती है। बस के कल पूर्जे खराब होते हैं। बस के झटके के कारण गेट पर खड़ा यात्री गिर सकता है। दिक्क्ते तो होती है।
- अजय शर्मा, परिचालक, रोडवेज डिपो
जौनपुर जाना है बस के लिए आए है। पैर चोटिल भी है। रोडवेज परिसर में इतने गड्ढे हैं कि जरा सा चलने में सतर्कता हटा कि पैर में मोच, चोट के अलावा दुर्घटना भी हो सकती है। यात्री सुविधाओं की तरफ परिवहन निगम को ध्यान देना चाहिए।
- रवि, यात्री
रोडवेज परिसर के जीर्णोद्धार के लिए शासन को लिखा गया है। शासन की स्वीकृति के इसका कार्य कराया जाएगा।
गंदगी के लिए जिम्मेदार सफाई कर्मियों पर कार्रवाई किया जाएगा।
आयुष भटनागर, एआरएम परिवहन निगम