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संशोधित.... वरिष्ठ नागरिक को पाबंद कर फंसे पैकोलिया थानेदार

Fri, 06 Sep 2019 11:39 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 06 Sep 2019 11:39 PM IST
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Restriction on senior citizen
वरिष्ठ नागरिक को पाबंद कर फंसे पैकोलिया थानेदार
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पैकोलिया (बस्ती)। क्षेत्र के दरहरा कुंवर गांव निवासी 84 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक पर शांतिभंग की आशंका में कार्रवाई कर पैकोलिया पुलिस फंस गई। गांव के विपक्षी से भूमि संबंधी विवाद को आधार बनाकर सीआरपीसी की धारा 107/116 के तहत बाकी आरोपियों के साथ पाबंद कर दिया गया। जबकि वरिष्ठ नागरिक पर इस तरह की कार्रवाई करना अनुशासनहीनता माना जाता है। शुक्रवार को पाबंद किए गए साहबदीन विश्वकर्मा आईजी आशुतोष कुमार के सामने पेश हुए। प्रकरण की गंभीरता समझते हुए आईजी ने थानाध्यक्ष पैकोलिया के विरुद्ध जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। कहा कि रिपोर्ट में यदि लापरवाही पाई जाती है तो एसओ पर कार्रवाई की जाएगी। एसपी पंकज कुमार का कहना है कि एएसपी से इसकी जांच कराई जाएगी।
साहबदीन विश्वकर्मा ने प्रार्थनापत्र में कहा है कि गांव के रामतेज से उनका भूमि संबंधी विवाद है, लेकिन मारपीट या शांतिभंग की आशंका नहीं है। बिना जांच-पड़ताल किए पैकोलिया पुलिस ने परेशान करने के लिए कार्रवाई की है। सूचना तक नहीं दी। एसडीएम हर्रैया कोर्ट से उन्हें नोटिस मिलने पर इस बात की जानकारी हुई।
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क्या है पाबंदी का मतलब
जिन लोगों पर गड़बड़ी या शांतिभंग की आशंका होती है उन्हें धारा 107/116 के तहत पाबंद किया जाता है। इसके बाद ऐसे लोगों पर पुलिस की नजर रहती है। यदि कहीं गड़बड़ी हो तो सबसे पहले इन्हीं लोगों से जांच-पड़ताल शुरू की जाती है। पाबंद किए जाने के बाद भी अगर संबंधित के खिलाफ कोई विवाद होता है तो उसे पुलिस जेल भेज सकती है।
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पाबंद करने का आधार
अधिवक्ता नरेंद्र पांडेय के अनुसार संबंधित व्यक्ति पुलिस की निगाह में संदिग्ध हो, उससे शांति भंग की आशंका हो या उसके खिलाफ किसी संहिता का उल्लंघन करने की शिकायत हो। ऐसे लोगों के विरुद्घ पुलिस पाबंद करने की कार्रवाई करती है। एसडीएम अदालत में संबंधित को जमानत करानी पड़ती है। छह माह बाद स्वत: यह कार्रवाई निष्प्रभावी हो जाती है।
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