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Basti News: ओपीडी से इमरजेंसी तक सांस के मरीज
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जिला अस्पताल के ओपीडी में ठंड के चलते कम दिखे मरीज संवाद
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बस्ती। वायु प्रदूषण और ठंड व कोहरा के चलते सांस वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में ऐसे मरीज लगातार पहुंच रहे हैं, जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 70 से 80 के बीच पाया जा रहा है। बृहस्पतिवार को ओपीडी में 451 और इमरजेंसी में 43 मरीज आए थे।
इमरजेंसी में पहुंच रहे कई बुजुर्गों का ऑक्सीजन स्तर अत्यधिक कम है। स्थिति गंभीर देख डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। बीते दो दिनों में जिला अस्पताल के आईसीयू में छह मरीज भर्ती हुए, जिनमें से एक को वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। राहत की बात यह रही कि सभी मरीजों की स्थिति में सुधार है। फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि भर्ती अधिकतर मरीज सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित हैं।
कई मरीजों का ऑक्सीजन सेचुरेशन 70-80 के बीच पाया गया, जबकि सामान्य व्यक्ति का ऑक्सीजन स्तर 95 प्रतिशत या उससे अधिक होना चाहिए। जिला अस्पताल के डॉ. वीके वर्मा ने बताया कि ओपीडी में सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पहले फिजिशियन ओपीडी में रोजाना करीब 300 मरीज आते थे, लेकिन ठंड में सांस लेने में दिक्कत, खांसी और गले के संक्रमण वाले मरीज बढ़े हैं।
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चेस्ट फिजिशियन डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में हवा की गुणवत्ता खराब है। इससे स्वस्थ व्यक्ति भी लंबे समय तक बाहर रहने पर खांसी, सांस लेने में परेशानी, गले में खराश या आंखों में जलन जैसी समस्याएं महसूस कर सकता है।
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इमरजेंसी में पहुंच रहे कई बुजुर्गों का ऑक्सीजन स्तर अत्यधिक कम है। स्थिति गंभीर देख डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। बीते दो दिनों में जिला अस्पताल के आईसीयू में छह मरीज भर्ती हुए, जिनमें से एक को वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। राहत की बात यह रही कि सभी मरीजों की स्थिति में सुधार है। फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि भर्ती अधिकतर मरीज सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित हैं।
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कई मरीजों का ऑक्सीजन सेचुरेशन 70-80 के बीच पाया गया, जबकि सामान्य व्यक्ति का ऑक्सीजन स्तर 95 प्रतिशत या उससे अधिक होना चाहिए। जिला अस्पताल के डॉ. वीके वर्मा ने बताया कि ओपीडी में सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पहले फिजिशियन ओपीडी में रोजाना करीब 300 मरीज आते थे, लेकिन ठंड में सांस लेने में दिक्कत, खांसी और गले के संक्रमण वाले मरीज बढ़े हैं।
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चेस्ट फिजिशियन डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में हवा की गुणवत्ता खराब है। इससे स्वस्थ व्यक्ति भी लंबे समय तक बाहर रहने पर खांसी, सांस लेने में परेशानी, गले में खराश या आंखों में जलन जैसी समस्याएं महसूस कर सकता है।