{"_id":"67d71d8e8cd045edb506dba5","slug":"ramzan-women-are-fulfilling-dual-responsibility-along-with-fasting-basti-news-c-207-1-kld1003-133484-2025-03-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"रमजान : रोजे के साथ दाेहरी जिम्मेदारी निभा रहीं महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रमजान : रोजे के साथ दाेहरी जिम्मेदारी निभा रहीं महिलाएं
Mon, 17 Mar 2025 12:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 17 Mar 2025 12:20 AM IST
विज्ञापन
बस्ती। माहे रमजान में महिलाओं की जिम्मेदारी बढ़ गई है। वह इबादत के साथ रोजेदारों का भी ख्याल रख रही हैं। सहरी और इफ्तार की समय से व्यवस्था के साथ घर बाहर के कार्यों की दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
इसके लिए उन्हें सुबह जल्दी उठना पड़ रहा है। कामकाजी महिलाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। उन्हें इबादत, घर परिवार और अपनी जॉब भी देखनी है। कामकाजी महिलाओं का कहना है कि रमजान माह में जिम्मेदारी बढ़ जाती है। दिनचर्या बदलती है, लेकिन सबका अपना स्थान है। उसी में मैनेज करने से कोई दिक्कत नहीं होती है।
महिलाओं के मुताबिक वह सहरी के लिए बजे 3:30 बजे सुबह उठा जाती है। फिर रोजेदारों के लिए सहरी तैयार करती हैं। रोजेदारों को सहरी कराने के बाद खुद सहरी करती हैं। फज्र की नमाज अदा करने के बाद एक दो घंटे तक नींद लेने के बाद फिर वह दिनचर्या के कार्यों में जुट जाती है। फिर शाम को इफ्तारी बनातीं हैं। गृहणियों के मुकाबले कामकाजी महिलाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है।
विज्ञापन
उन्हें इबादत, घर परिवार और ड्यूटी को एक साथ देखना पड़ रहा है। ऐसी महिलाओं का कहना है कि रमजान बरकतों का महीना है। जिम्मेदारियों को निभाते हुए खुशी भी होती है। समय प्रबंधन का पालन करना पड़ता है।
समय से उठना समय से सोना, सब काम समयानुसार करना पड़ रहा है। किसी प्रकार का तनाव न लेते हुए अल्लाह की इबादत में समय गुजारना जरूरी है।
विज्ञापन
इसके लिए उन्हें सुबह जल्दी उठना पड़ रहा है। कामकाजी महिलाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। उन्हें इबादत, घर परिवार और अपनी जॉब भी देखनी है। कामकाजी महिलाओं का कहना है कि रमजान माह में जिम्मेदारी बढ़ जाती है। दिनचर्या बदलती है, लेकिन सबका अपना स्थान है। उसी में मैनेज करने से कोई दिक्कत नहीं होती है।
विज्ञापन
महिलाओं के मुताबिक वह सहरी के लिए बजे 3:30 बजे सुबह उठा जाती है। फिर रोजेदारों के लिए सहरी तैयार करती हैं। रोजेदारों को सहरी कराने के बाद खुद सहरी करती हैं। फज्र की नमाज अदा करने के बाद एक दो घंटे तक नींद लेने के बाद फिर वह दिनचर्या के कार्यों में जुट जाती है। फिर शाम को इफ्तारी बनातीं हैं। गृहणियों के मुकाबले कामकाजी महिलाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है।
विज्ञापन
उन्हें इबादत, घर परिवार और ड्यूटी को एक साथ देखना पड़ रहा है। ऐसी महिलाओं का कहना है कि रमजान बरकतों का महीना है। जिम्मेदारियों को निभाते हुए खुशी भी होती है। समय प्रबंधन का पालन करना पड़ता है।
समय से उठना समय से सोना, सब काम समयानुसार करना पड़ रहा है। किसी प्रकार का तनाव न लेते हुए अल्लाह की इबादत में समय गुजारना जरूरी है।