{"_id":"5b69e84c4f1c1b75568b5d21","slug":"ram-mani-awarded-by-gokul-award","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व फौजी राममणि को 10वीं बार गोकुल पुरस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्व फौजी राममणि को 10वीं बार गोकुल पुरस्कार
basti
Updated Wed, 08 Aug 2018 12:13 AM IST
विज्ञापन
लखनऊ में सम्मानित किए गए।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। बहादुरपुर ब्लॉक के फुवरिया पांडेय निवासी रिटायर्ड फौजी राममणि त्रिपाठी को सरकार ने वर्ष 2017-18 के गोकुल पुरस्कार से सम्मानित किया है। राममणि को यह उपलब्धि लगातार 11 वर्षों से मिल रही है। इस बार उन्होंने दुग्ध उत्पादन में 48 हजार लीटर की छलांग लगाई है। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने पुरस्कार से नवाजा है।
राममणि का बचपन गरीबी में बीता। तीन साल में पिता का साया सिर से उठा तो जब यह जवान हुए तो बड़े भाई ने साथ छोड़ दिया। इनके कंधों पर घर का बोझ आ गया। इन्हें घर की पूरी जिम्मेदारी उठानी पड़ी। घर की माली हालत ठीक नहीं थी तो सेना की नौकरी ज्वाइन की, मगर यहां भी उन्हें चैन नहीं मिला। पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दस वर्ष तक देश सेवा करने के बाद नौकरी छोड़ राममणि ने घर की ओर रुख कर दिया। 1984 में इन्होंने आय के लिए दूध बेचने का मन बनाया और एक गाय व एक भैंस खरीदी। दूध बेच वे परिवार का पेट पालने लगे। इनका परिश्रम देखकर बैंकों ने इनकी सहायता की पहल की और ऋण दिया। इसी से एक के बाद एक गाय खरीद व्यवसाय को आगे बढ़ा दिया। वर्ष 2007 में इनके पास 25 हजार लीटर दूध का उत्पादन होने लगा। लगातार इनके पास दूध का उत्पादन बढ़ने लगा। वर्ष 2009 में तीस हजार लीटर दूध उत्पादन पर पहली बार प्रदेश सरकार ने इन्हें गोकुल पुरस्कार से नवाजा। इससे प्रोत्साहित राममणि दुग्ध क्षेत्र में पूरे मनोयोग से जुड़ गए। इससे जहां उन्होंने घर की माली हालत को बेहतर कर दिया। वहीं घर के सभी सदस्यों के अलावा गांव के भी कई युुवकों को अपने डेयरी में रोजगार दे दिया। इसी बीच वर्ष 2011 में केंद्र सरकार के तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने दिल्ली में देश के दूसरे बड़े दुग्ध उत्पादक के रूप में पुरस्कृत किया। राममणि कहते हैं कि उनका गायों से विशेष लगाव है। उन्होंने जिन पशुओं को पाल रखा है वे उनकी भाषा समझते हैं। उनके दर्द को हम भी बखूबी समझकर उनकी सेेवा करते हैं। इसके बदले गौ माता ने उनका संसार बदल दिया है।
विज्ञापन
राममणि का बचपन गरीबी में बीता। तीन साल में पिता का साया सिर से उठा तो जब यह जवान हुए तो बड़े भाई ने साथ छोड़ दिया। इनके कंधों पर घर का बोझ आ गया। इन्हें घर की पूरी जिम्मेदारी उठानी पड़ी। घर की माली हालत ठीक नहीं थी तो सेना की नौकरी ज्वाइन की, मगर यहां भी उन्हें चैन नहीं मिला। पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दस वर्ष तक देश सेवा करने के बाद नौकरी छोड़ राममणि ने घर की ओर रुख कर दिया। 1984 में इन्होंने आय के लिए दूध बेचने का मन बनाया और एक गाय व एक भैंस खरीदी। दूध बेच वे परिवार का पेट पालने लगे। इनका परिश्रम देखकर बैंकों ने इनकी सहायता की पहल की और ऋण दिया। इसी से एक के बाद एक गाय खरीद व्यवसाय को आगे बढ़ा दिया। वर्ष 2007 में इनके पास 25 हजार लीटर दूध का उत्पादन होने लगा। लगातार इनके पास दूध का उत्पादन बढ़ने लगा। वर्ष 2009 में तीस हजार लीटर दूध उत्पादन पर पहली बार प्रदेश सरकार ने इन्हें गोकुल पुरस्कार से नवाजा। इससे प्रोत्साहित राममणि दुग्ध क्षेत्र में पूरे मनोयोग से जुड़ गए। इससे जहां उन्होंने घर की माली हालत को बेहतर कर दिया। वहीं घर के सभी सदस्यों के अलावा गांव के भी कई युुवकों को अपने डेयरी में रोजगार दे दिया। इसी बीच वर्ष 2011 में केंद्र सरकार के तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने दिल्ली में देश के दूसरे बड़े दुग्ध उत्पादक के रूप में पुरस्कृत किया। राममणि कहते हैं कि उनका गायों से विशेष लगाव है। उन्होंने जिन पशुओं को पाल रखा है वे उनकी भाषा समझते हैं। उनके दर्द को हम भी बखूबी समझकर उनकी सेेवा करते हैं। इसके बदले गौ माता ने उनका संसार बदल दिया है।
विज्ञापन