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Basti News: यहां बिकता है फुटपाथ, शाम तक ठेलों से भर जाती हैं पटरियां

Tue, 22 Aug 2023 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 22 Aug 2023 11:23 PM IST
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public problem
बस्ती। अपने शहर में फुटपाथ बेचने के भी धंधे ने जोर पकड़ लिया है। यह कोई और नहीं गृह स्वामी एवं चौराहों के कुछ चर्चित दबंग किस्म के चेहरे कर रहे हैं। असंगठित व्यवसायियों से दुकान लगवाने का नकद धंधा है। भीड़-भाड़ वाली जगह है तो क्या पूछना। रोजाना प्रति रेहड़ी 500 से 800 रुपये की कमाई कहीं नहीं गई है।
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गांधीनगर और पुरानी बस्ती क्षेत्र मिलाकर शहर के दोनों हिस्सों में सड़क की पटरियों पर ढाई हजार से अधिक अस्थायी दुकानें रोज सज रही हैं। दोपहर बाद सभी प्रमुख चौराहों और बाजार में सड़कों के दोनों तरफ की पटरियां चौतरफा अस्थायी दुकानों से भर जा रही हैं। जहां स्थानीय किसी व्यक्ति का दबदबा नहीं है, वहां पुलिस की मेहरबानी से इन दुकानों को जगह मिल रही है।
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यकीन मानिए, सड़क के किनारे जिस ठेले के पास खड़े होकर आप कुछ चटपटी चीज खा रहे हैं, वह यूं ही नहीं आया है। उसे किसी न किसी की मनुहार करनी पड़ी है। जहां इनका ठेला लगता है वह नगर पालिका या पीडब्ल्यूडी का फुटपाथ है। मगर इनसे किराया कोई और वसूलता है। पुलिस या नगर पालिका के कर्मचारियों की खिदमत अलग से करनी पड़ती है। तब जाकर चटपटे स्वाद के खानेपीने की वस्तुओं के बदले आमजन से मिली कुछ रकम शाम तक इनके झोली में बच पाती है।
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इस तरह असंगठित व्यवसायियों के कमाने की डगर बहुत कठिन है। पांच साल पहले नगर पालिका की ओर से असंगठित व्यवसायियों की गिनती कराई गई। रेहड़ी, ठेली वाले कुल 1300 व्यवसायी चिह्नित किए गए। इनके लिए वेंडिंग जोन निर्धारित हुआ। मगर यह व्यवस्था बन नहीं पाई। नतीजा रोज किराए का फुटपाथ लेकर हजार दो हजार की दुकानदारी चलानी इनकी विवशता है।
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रेहड़ी व्यवसायियों का हब है गांधीनगर
गांधीनगर बाजार रेहड़ी व्यवसायियों का हब बन गया है। यहां सड़क के दोनों तरफ बड़े प्रतिष्ठानों के मालिक या गृह स्वामी अपने-अपने सामने के फुटपाथ पर मालिकाना हक जताते हैं। इनकी रजामंदी के बगैर यहां फुटपाथ पर दुकान लगाना असंगठित व्यवसायियों के लिए संभव नहीं है। दरिया खां मोड़ से तुरकहिया मोड़ तक चाट, खोमचे, आइसक्रीम, फास्टफूड, पान, सब्जी आदि के दो सौ से अधिक ठेले और गुमटी यहां रोज पटरियों पर सजती हैं, जिनकी दुकान पर अधिक ग्राहक होते हैं, उन्हें पुलिस की भी कुछ न कुछ सेवा करनी पड़ रही है। यह रेहड़ी व्यवसायी अपनी दुकान के पीछे स्थित बड़े प्रतिष्ठानों या मकानों के मालिक को रोज आठ घंटे का 500 से 800 रुपये किराया चुकता कर रहे हैं।
चाऊमीन, बर्गर का ठेला लगाने वाले राम जीत ने बताया कि जिनके घर के सामने ठेला लगाते हैं उन्हें प्रतिदिन 500 रुपये देना पड़ता है। इसके अलावा पुलिस को न खुश रखो तो फुटपाथ की जमीन बताकर दुकान हटवाने की धमकी मिलती है।
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कंपनीबाग, कचहरी क्षेत्र में दबंग लगवाते हैं रेहड़ी की दुकान
कंपनीबाग, कचहरी, कटरा, फव्वारा तिराहा, शास्त्री चौक के आसपास कुछ दबंगों का बोलबाला है। यहां ज्यादातर सरकारी भवन और अफसरों के आवास है, लेकिन उनके सामने फुटपाथ पर दुकान लगवाने के लिए दबंगों की रजामंदी जरूरी है। लगभग चार सौ रेहड़ी एवं ठेला कारोबारियों पर इनकी धाक बनी हुई है। दुकानदारी के हिसाब से कोई दो सौ, कोई पांच सौ तो छोला भटूरा, बिरयानी आदि की दुकान लगाकर अधिक कमाई करने वाले हजार रुपये तक किराया दे रहे हैं। इन दुकानों पर शाम ढलने पर स्थानीय पुलिस की धमक होती है। दुकानदार उन्हें भी खुश करके भेज देते हैं। यह क्षेत्र दबंगों के बल पर असंगठित व्यवसायियों का बड़ा सेंटर बन गया है। शाम ढलने के बाद इन दुकानों पर रंगीन मिजाज के लोगों के लिए भी पानी बोतल, गिलास एवं अन्य चटपटी आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था रहती है।
बीडीए भवन के बाउंड्रीवॉल के सामने, टाउन क्लब के सामने और कचहरी स्थित चर्च के सामने यह नजारा शाम 6 से रात 11 बजे तक कभी भी देखा जा सकता है। कटरा में फुटपाथ के पीछे स्थित व्यवसायिक भवनों के कारिंदे इन दुकानदारों से वसूली करके रकम मालिक तक पहुंचाते हैं। -------------------
रोडवेज पर भी लगवाए जा रहे ठेेले
रोडवेज स्थित नेहरू तिराहा पर सड़क के एक तरफ मकानों के मालिक फुटपाथ पर सब्जी, चाट, खोमचे और अंडे आदि के ठेले लगवाने के लिए फुटकर कारोबारियों से अच्छा खासा किराया रोजाना वसूल रहे हैं। तो दूसरी ओर पुलिस की मेहरबानी से रेहड़िया सज रही है। यहां शाम को चटपटे स्वाद लेने के लिए आमजन की खूब भीड़ जुटने लगी है। वहीं रोडवेज गेट के सामने से लेकर अंग्रेजी शराब की दुकान के आसपास भी ठेलों की भरमार है। जहां पुलिस की मौजूदगी भी रहती है। अधिकांश रेहड़ी दुकानों पर लोगों की रात रंगीन होने के दौरान झड़प भी होती है। यह पुलिस के लिए सुनहरा अवसर होता है। रेहड़ी दुकानों पर मस्ती में डूबे लोग पकड़ लिए जाते हैं जिन्हें कुछ देर के बाद छोड़ दिया जाता है। इस क्षेत्र में भी सौ अधिक ठेलों की भरमार रहती है।
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रेलवे स्टेशन, पांडेय बाजार में भी ठेलों की भरमार
पुलिस और गृह मालिकों की सरपरस्ती में भी दक्षिण दरवाजा, रेलवे स्टेशन, मंगल बाजार, सुर्तीहट्टा, पांडेय बाजार समेत पुरानी बस्ती क्षेत्र में एक हजार से अधिक ठेलों की भरमार सड़क की पटरियों पर भरमार रहती है। सुर्तीहट्टा में तो सड़क तक सब्जी, फल और फास्ट फूड की दुकानें सजाई जा रही है। रेलवे स्टेशन के सामने सड़क पर ही रेहड़ी कारोबारियों की भरमार है।
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चाइनीज आइटम के साथ उतरे हैं नेपाल के रेहड़ी कारोबारी
असंगठित व्यवसाय के क्षेत्र में चाइनीज आइटम के साथ नेपाल के रेहड़ी कारोबारियों का भी दबदबा है। मोमो, चाऊमीन, बर्गर, वेज, नानवेज रोल के साथ इनके ठेले रोडवेज, पक्के, कंपनीबाग आदि प्रमुख चौराहों पर शाम होते ही लग जा रहे हैं। ग्राहक बटोरने में यह लोग यहां के कारोबारियों को पीछे छोड़ दिया है। इनसे किराएदारी के नाम पर अच्छी खासी कमाई भी की जा रही है।
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फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों से किराया वसूलने के लिए कोई भी प्राइवेट व्यक्ति अधिकृत नहीं है। असंगठित व्यवसायियों के लिए वेंडिंग जोन चिह्नित है। शीघ्र ही इन व्यवसायियों को वहां शिफ्ट कराया जाएगा।

-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका परिषद।
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फुटपाथ पर दुकान लगाने के लिए कोई अधिकृत नहीं है। इससे शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। यातायात पुलिस और नगर पालिका की संयुक्त टीम बनाकर जल्द सड़क की पटरियों को खाली कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
-आलोक प्रसाद, सीओ सिटी।
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