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Basti News: हृदय रोग के डाॅक्टर नहीं मरीजों की बढ़ रही परेशानी
Tue, 07 Jan 2025 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 07 Jan 2025 12:31 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला अस्पताल में रोज हृदय रोग के 10 से 15 मरीज पहुंच रहे हैंं। 10 से 12 मरीजों की ईसीजी भी रोज हो रही है। मगर, जिला अस्पताल और मेडिकल काॅलेज में हृदय रोग के डाॅक्टर न होने से मरीजों को दूसरे शहरों में इलाज कराने पर विवश होना पड़ रहा है।
बदलते जीवन शैली और खानपान पर ध्यान न देने के कारण लोग हृदय रोग के शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल में एक से चार जनवरी तक 53 मरीजों की ईसीजी की गई। चिकित्सकों के मुताबिक जहां पहले हृदय रोग के पांच-सात मरीज आते थे। अब उनकी संख्या 10 से 15 पहुंच गई है।
सामान्य मरीजों को दवा देकर भेज दिया जाता है तो कुछ मरीजों को भर्ती भी करना पड़ता है। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण अधिक गंभीर मरीजों को गोरखपुर मेडिकल काॅलेज समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
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जिला अस्पताल के परामर्श चिकित्सक डॉ. अंकित कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि मरीज की जांच में हृदय रोग की पुष्टि होती है तो दवा देने के साथ सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। कुछ गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जाता है। जरूरत होने पर रेफर कर दिया जाता है। ा
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बस्ती। जिला अस्पताल में रोज हृदय रोग के 10 से 15 मरीज पहुंच रहे हैंं। 10 से 12 मरीजों की ईसीजी भी रोज हो रही है। मगर, जिला अस्पताल और मेडिकल काॅलेज में हृदय रोग के डाॅक्टर न होने से मरीजों को दूसरे शहरों में इलाज कराने पर विवश होना पड़ रहा है।
बदलते जीवन शैली और खानपान पर ध्यान न देने के कारण लोग हृदय रोग के शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल में एक से चार जनवरी तक 53 मरीजों की ईसीजी की गई। चिकित्सकों के मुताबिक जहां पहले हृदय रोग के पांच-सात मरीज आते थे। अब उनकी संख्या 10 से 15 पहुंच गई है।
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सामान्य मरीजों को दवा देकर भेज दिया जाता है तो कुछ मरीजों को भर्ती भी करना पड़ता है। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण अधिक गंभीर मरीजों को गोरखपुर मेडिकल काॅलेज समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
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जिला अस्पताल के परामर्श चिकित्सक डॉ. अंकित कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि मरीज की जांच में हृदय रोग की पुष्टि होती है तो दवा देने के साथ सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। कुछ गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जाता है। जरूरत होने पर रेफर कर दिया जाता है। ा