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बैरीकेडिंग ने बढ़ाई मरीजों की मुसीबत, आवागमन में परेशानी
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बैरीकेडिंग ने बढ़ाई मरीजों की मुसीबत, ओपीडी तक पहुंचना कठिन
बस्ती। जिला अस्पताल में अब ओपीडी तक पहुंचना आसान नहीं है। अस्पताल में गेट नंबर एक व दो पर बैरीकेडिंग कर दी गई है। इसके चलते अब पैदल ही मरीज व तीमारदार पहुंच सकते हैं। वहीं, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आलोक कुमार वर्मा का कहना है कि यह व्यवस्था मरीजों के वाहनों व सामान की सुरक्षा के लिए की गई है।
जिला चिकित्सालय में हर दिन करीब दो हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। इसके अलावा डेढ़ से दो सौ मरीज भर्ती होते हैं। यहां ज्यादातर मरीज दो पहिया वाहन से आते हैं। इन दिनों मरीजों को ओपीडी तक पहुंचने के लिए पैदल ही चलना पड़ रहा है। ऐसे में गंभीर मरीज के तीमारदारों के लिए ओपीडी तक पहुंचने में खासी समस्या झेलते हैं। वजह यह कि बैरीकेडिंग होने के कारण मरीज को यदि चिकित्सक तक जाना है, तो उसे स्ट्रेचर पर उठाकर ही ले जाया जा सकता है। जिला अस्पताल में मरीज का इलाज कराने पहुंचे गौर निवासी रामसुख यादव ने कहा कि यहां बाइक से आए थे। ओपीडी में जाना था, मगर पता चला कि गेट नंबर एक पर बैरीकेडिंग हो गई है। इसके बाद किसी तरह ओपीडी में चिकित्सक तक पहुंचे। शहर के गांधीनगर निवासी राजन त्रिपाठी ने कहा कि गेट नंबर एक और दो बैरीकेडिंग कर दी गई है। जिससे स्ट्रेचर से भी मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने में दिक्कत हो रही है। कहा कि वार्ड ब्वॉय किसी भी मरीज को स्ट्रेचर से ले नहीं जाते। तीमारदार को ही स्ट्रेचर खींचना पड़ता है।
इमरजेंसी से वार्ड में शिफ्ट करने के लिए स्ट्रेचर से ले जाने की व्यवस्था बनाई गई है। सभी वार्डों को इंटरकनेक्ट कर दिया गया है। अब किसी भी मरीज को बाहर से ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। बैरीकेडिंग का उद्देश्य मरीजों व उनके तीमारदारों के सामान व बाइक आदि की सुरक्षा है। ओपीडी में गेट नंबर दो से मरीज जा सकता है, जबकि वार्ड में जाने के लिए पूरी व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है। बाइक व कार के लिए पार्किंग भी है।
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-डॉ. आलोक कुमार वर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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बस्ती। जिला अस्पताल में अब ओपीडी तक पहुंचना आसान नहीं है। अस्पताल में गेट नंबर एक व दो पर बैरीकेडिंग कर दी गई है। इसके चलते अब पैदल ही मरीज व तीमारदार पहुंच सकते हैं। वहीं, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आलोक कुमार वर्मा का कहना है कि यह व्यवस्था मरीजों के वाहनों व सामान की सुरक्षा के लिए की गई है।
जिला चिकित्सालय में हर दिन करीब दो हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। इसके अलावा डेढ़ से दो सौ मरीज भर्ती होते हैं। यहां ज्यादातर मरीज दो पहिया वाहन से आते हैं। इन दिनों मरीजों को ओपीडी तक पहुंचने के लिए पैदल ही चलना पड़ रहा है। ऐसे में गंभीर मरीज के तीमारदारों के लिए ओपीडी तक पहुंचने में खासी समस्या झेलते हैं। वजह यह कि बैरीकेडिंग होने के कारण मरीज को यदि चिकित्सक तक जाना है, तो उसे स्ट्रेचर पर उठाकर ही ले जाया जा सकता है। जिला अस्पताल में मरीज का इलाज कराने पहुंचे गौर निवासी रामसुख यादव ने कहा कि यहां बाइक से आए थे। ओपीडी में जाना था, मगर पता चला कि गेट नंबर एक पर बैरीकेडिंग हो गई है। इसके बाद किसी तरह ओपीडी में चिकित्सक तक पहुंचे। शहर के गांधीनगर निवासी राजन त्रिपाठी ने कहा कि गेट नंबर एक और दो बैरीकेडिंग कर दी गई है। जिससे स्ट्रेचर से भी मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने में दिक्कत हो रही है। कहा कि वार्ड ब्वॉय किसी भी मरीज को स्ट्रेचर से ले नहीं जाते। तीमारदार को ही स्ट्रेचर खींचना पड़ता है।
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इमरजेंसी से वार्ड में शिफ्ट करने के लिए स्ट्रेचर से ले जाने की व्यवस्था बनाई गई है। सभी वार्डों को इंटरकनेक्ट कर दिया गया है। अब किसी भी मरीज को बाहर से ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। बैरीकेडिंग का उद्देश्य मरीजों व उनके तीमारदारों के सामान व बाइक आदि की सुरक्षा है। ओपीडी में गेट नंबर दो से मरीज जा सकता है, जबकि वार्ड में जाने के लिए पूरी व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है। बाइक व कार के लिए पार्किंग भी है।
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-डॉ. आलोक कुमार वर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल