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Basti News: पेट्रोल-डीजल की किल्लत बरकरार, 17 पंप सूखे
Sat, 23 May 2026 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 23 May 2026 12:48 AM IST
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बस्ती। जिले में डीजल-पेट्रोल की किल्लत बरकरार है। ईंधन की कमी से लोगों की मुसीबतें लगातार बढ़ाती जा रही हैं। शुक्रवार को जिले के 17 से अधिक पेट्रोल पंप सूखे पड़े थे। इससे हाहाकार मचा हुआ है। पंप पर वाहन चालकों को कतार में लगने के बाद भी तेल न मिलने से निराश होकर लौटना पड़ रहा है। वहीं, खेती-किसानी में भी परेशानी हो रही है।
खेती-किसानी भी डीजल-पेट्रोल से संचालित यंत्रों पर ही निर्भर है। शुक्रवार को 17 से अधिक पेट्रोल पंप सूखे पड़े थे। शुक्रवार को शहर के मालवीय मार्ग पर तीन पंप, दक्षिण, दरवाजा, रेलवे स्टेशन और कचहरी स्थित पंप डीजल-पेट्रोल के अभाव में बंद कर दिए गए। केवल गांधीनगर और कचहरी स्थित पेट्रोल पंप पर ही डीजल-पेट्रोल मिल रहा था। बाकी पंप बंद पाए गए।
लोगों ने बताया कि गर्मी में बिजली कट रही है, जनरेटर चलाने के लिए भी डीजल नहीं मिल पा रहा है। चार से पांच किलोमीटर दूर जाकर पंप से डीजल लाना पड़ रहा है। वहीं, दुकानदार भी अब गैस और डीजल-पेट्रोल की किल्लत का हवाला देते हुए दिख रहे हैं। इलेक्ट्रिक सामानों का उत्पादन कम हो गया है, जिससे इन सामग्रियों की आपूर्ति घट गई है।
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ऑर्डर के हिसाब से इलेक्ट्रॉनिक सामान की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। दाम में भी पांच प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इसलिए ग्राहकों को छूट देने की गुंजाइश नहीं रह गई है। मजबूरी में महंगे दामों में सामान खरीदना पड़ रहा है।
जानकारों का कहना है कि डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति में भी पचास प्रतिशत से अधिक की कटौती की जा रही है। पश्चिमी देशों में संघर्ष के शुरुआती दौर में ही पेट्रोलियम कंपनियों ने क्रेडिट व्यवस्था खत्म कर दी थी। अब एडवांस भुगतान करने मालिकों को भी डीजल-पेट्रोल समय से नहीं मिल पा रहा है। बताया जा रहा हैं कि गोंडा और देवरिया के बैतालपुर तेल डिपो ड्राई पड़ गया है। पूर्वांचल के अधिकांश जिलों में लखनऊ डिपो से तेल की आपूर्ति हो रही है। समूचे शहर में नौ पेट्रोल पंपों की जगह एक या दो पंप ही संचालित पाए जा रहे हैं।
शहर के आसपास के क्षेत्र परसा हज्जाम, महुली मार्ग, गनेशपुर, गोटवा, कप्तानगंज, नगर बाजार, मनौरी, भिटिया आदि जगहों पर 17 से अधिक पेट्रोल पंप ड्राई पड़ गए हैं। लोग दो पहिया, चार पहिया वाहन लेकर पेट्रोल डीजल के लिए इधर से उधर भटकते नजर आ रहे हैं।
पेट्रोल लेने पहुंचे ग्राहक मोनू कहते हैं कि आजकल रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है। इसके बगैर किसी का काम नहीं चलने वाला है। इसीलिए लोग अपना काम छोड़कर पहले पेट्रोल-डीजल के लिए दौड़ भाग कर रहे हैं। चार पंप पर दौड़ लगाने के बाद 10 लीटर डीजल मिल पाया। विभाग का कहना है कि जो पंप ड्राई हैं वह पैसा भुगतान नहीं किए हैं। ऐसे में वहां कंपनियों ने ईधन नहीं भेजा होगा।
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खेती-किसानी भी डीजल-पेट्रोल से संचालित यंत्रों पर ही निर्भर है। शुक्रवार को 17 से अधिक पेट्रोल पंप सूखे पड़े थे। शुक्रवार को शहर के मालवीय मार्ग पर तीन पंप, दक्षिण, दरवाजा, रेलवे स्टेशन और कचहरी स्थित पंप डीजल-पेट्रोल के अभाव में बंद कर दिए गए। केवल गांधीनगर और कचहरी स्थित पेट्रोल पंप पर ही डीजल-पेट्रोल मिल रहा था। बाकी पंप बंद पाए गए।
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लोगों ने बताया कि गर्मी में बिजली कट रही है, जनरेटर चलाने के लिए भी डीजल नहीं मिल पा रहा है। चार से पांच किलोमीटर दूर जाकर पंप से डीजल लाना पड़ रहा है। वहीं, दुकानदार भी अब गैस और डीजल-पेट्रोल की किल्लत का हवाला देते हुए दिख रहे हैं। इलेक्ट्रिक सामानों का उत्पादन कम हो गया है, जिससे इन सामग्रियों की आपूर्ति घट गई है।
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ऑर्डर के हिसाब से इलेक्ट्रॉनिक सामान की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। दाम में भी पांच प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इसलिए ग्राहकों को छूट देने की गुंजाइश नहीं रह गई है। मजबूरी में महंगे दामों में सामान खरीदना पड़ रहा है।
जानकारों का कहना है कि डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति में भी पचास प्रतिशत से अधिक की कटौती की जा रही है। पश्चिमी देशों में संघर्ष के शुरुआती दौर में ही पेट्रोलियम कंपनियों ने क्रेडिट व्यवस्था खत्म कर दी थी। अब एडवांस भुगतान करने मालिकों को भी डीजल-पेट्रोल समय से नहीं मिल पा रहा है। बताया जा रहा हैं कि गोंडा और देवरिया के बैतालपुर तेल डिपो ड्राई पड़ गया है। पूर्वांचल के अधिकांश जिलों में लखनऊ डिपो से तेल की आपूर्ति हो रही है। समूचे शहर में नौ पेट्रोल पंपों की जगह एक या दो पंप ही संचालित पाए जा रहे हैं।
शहर के आसपास के क्षेत्र परसा हज्जाम, महुली मार्ग, गनेशपुर, गोटवा, कप्तानगंज, नगर बाजार, मनौरी, भिटिया आदि जगहों पर 17 से अधिक पेट्रोल पंप ड्राई पड़ गए हैं। लोग दो पहिया, चार पहिया वाहन लेकर पेट्रोल डीजल के लिए इधर से उधर भटकते नजर आ रहे हैं।
पेट्रोल लेने पहुंचे ग्राहक मोनू कहते हैं कि आजकल रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है। इसके बगैर किसी का काम नहीं चलने वाला है। इसीलिए लोग अपना काम छोड़कर पहले पेट्रोल-डीजल के लिए दौड़ भाग कर रहे हैं। चार पंप पर दौड़ लगाने के बाद 10 लीटर डीजल मिल पाया। विभाग का कहना है कि जो पंप ड्राई हैं वह पैसा भुगतान नहीं किए हैं। ऐसे में वहां कंपनियों ने ईधन नहीं भेजा होगा।