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सरयू के प्रकोप से सहमे, उजाड़ने लगे घर
basti
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:27 AM IST
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समस्याा
- फोटो : amar ujala
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दुबौलिया। सरयू नदी का जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। मंगलवार को खतरे के निशान 92.730 से 52 सेंटीमीटर ऊपर 93.250 मीटर पर नदी का प्रवाह था। वीडी बांध और नदी के बीच बसे दिलासपुरा गांव के लोग अपना घर उजाड़ने लगे हैं।
अतिसंवेदनशील तटबंध कटरिया-चांदपुर पर धारा का तेज दबाव बना हुआ है। सोमवार शाम से तटबंध पर ज्यादा मात्रा में कटान नहीं हुई है। लेकिन किनारे बनाए गए बेस डूब गए हैं। तटबंध के कटान स्थलों व ठोकरों पर मरम्मत कार्य जारी है। पानी से घिरे दिलासपुरा गांव व पहड़वापुर गांव के बीच में सरयू कृषि योग्य जमीन काट रही है। दिलासपुरा गांव के लोग अपने घरों को तोड़कर तटबंध के इस पार अपनी गृहस्थी बसाएंगे।
दुबौलिया ब्लॉक क्षेत्र के ही गौरा-सैफाबाद तटबंध पर पर भी नदी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। ठोकर व कटर के बैठने का सिलसिला जारी है। मरम्मत कार्य भी साथ साथ हो रहा है। इसी से सटे किशुनपुर मोजपुर रिंगबांध पर भी बाढ़ का दबाव है। रिंगबांध पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। जलस्तर बढ़ने से ग्राम पंचायत स्तर से चल रहा मरम्मत कार्य बाधित हो गया है। टकटवा रिगंबांध बांध पर पानी ओवरफ्लो होने के कगार पर है। इससे टकटवा के ग्रामीणों को बाढ़ का डर सताने लगा है।
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बाढ़ प्रभावित गांवों में बढ़ी दुश्वारियां
एक महीने से बाढ़ के पानी से घिरे गांव खजांचीपुर, सुविखा बाबू, टेड़वा, देवारागंग बरार के वाशिंदों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यहा के लोगों का मुख्य सहारा नाव ही है। जबकि जलस्तर बढ़ने से अशोकपुर के तीन पुरवे पहियामाफी, विशुनदासपुर का पुरवा, सरवरपुर, पूरेमोतीराम, बानेपुर, बरदियालोहार का पुरवा आदि गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरने वाले हैं। बाढ़ से फसलें तो बरबाद हो ही रही हैं। पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है। अभी तो पशुपालक किसी तरह से पशुचारे की व्यवस्था कर रहे है लेकिन अगर नदी और बढे़गी तो संकट आ पड़ेगा।
फिर एक दर्जन गांवों में भरा पानी
सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। सरयू नदी का जलस्तर मंगलवार की शाम 93.250 मीटर पहुंच गया। करीब एक दर्जन गांव फिर बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। सरयू नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों में हर पल दहशत है। खेती की भूमि कटान में जा रही जबिक घर पानी से घिर गए हैं। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से सरयू का पानी हाईवे किनारे पानी भरने लगा है।
साथ ही हाईवे पर बनी पुलियों के सहारे नदी का पानी उसपार कर गांवों के सीवानों में पहुंच रहा है। लगभग सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न हो गई है। केशवपुर में पानी रिहायशी जगहों पर भरने लगा है। भरथापुर, कल्यानपुर, पड़ाव और सहजौरा पानी से घिर गए हैं। रास्ते में पानी भरने से ग्रामीणों की परेशानी एक बार फिर बढ़ चली है। अबकी बार लगातार चौथी बार कल्यानपुर गांव का रास्ता जलमग्न है। रास्ते में पानी आ जाने से बुजुर्गों, महिलाओं व स्कूली बच्चों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब महीने भर से जानवरों को चारे की समस्या हो गई है। सहजौरा, कल्यानपुर आदि में कटान हो रही है। भरथापुर में ठोकर बैठने से नदी कल्यानपुर गांव से सटकर बह रही है। ऐसे में प्राथमिक विद्यालय सीतारामपुर पर नदी का दबाव बढ़ता जा रहा है। गांव के जितेंद्र सिंह, भरथलाल, जगलाल, राज बहादुर, सुशील कुमार यादव, मंगल प्रसाद संजय प्रधान का कहना है कि प्रशासन न तो विस्थापन के लिये जमीन ढूंढ पा रहा है न गांव बचाने का उपाय कर रहा है। इन्हीं आश्वासनों के चलते तमाम गांव समाप्त हो चुके हैं।
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अतिसंवेदनशील तटबंध कटरिया-चांदपुर पर धारा का तेज दबाव बना हुआ है। सोमवार शाम से तटबंध पर ज्यादा मात्रा में कटान नहीं हुई है। लेकिन किनारे बनाए गए बेस डूब गए हैं। तटबंध के कटान स्थलों व ठोकरों पर मरम्मत कार्य जारी है। पानी से घिरे दिलासपुरा गांव व पहड़वापुर गांव के बीच में सरयू कृषि योग्य जमीन काट रही है। दिलासपुरा गांव के लोग अपने घरों को तोड़कर तटबंध के इस पार अपनी गृहस्थी बसाएंगे।
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दुबौलिया ब्लॉक क्षेत्र के ही गौरा-सैफाबाद तटबंध पर पर भी नदी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। ठोकर व कटर के बैठने का सिलसिला जारी है। मरम्मत कार्य भी साथ साथ हो रहा है। इसी से सटे किशुनपुर मोजपुर रिंगबांध पर भी बाढ़ का दबाव है। रिंगबांध पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। जलस्तर बढ़ने से ग्राम पंचायत स्तर से चल रहा मरम्मत कार्य बाधित हो गया है। टकटवा रिगंबांध बांध पर पानी ओवरफ्लो होने के कगार पर है। इससे टकटवा के ग्रामीणों को बाढ़ का डर सताने लगा है।
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बाढ़ प्रभावित गांवों में बढ़ी दुश्वारियां
एक महीने से बाढ़ के पानी से घिरे गांव खजांचीपुर, सुविखा बाबू, टेड़वा, देवारागंग बरार के वाशिंदों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यहा के लोगों का मुख्य सहारा नाव ही है। जबकि जलस्तर बढ़ने से अशोकपुर के तीन पुरवे पहियामाफी, विशुनदासपुर का पुरवा, सरवरपुर, पूरेमोतीराम, बानेपुर, बरदियालोहार का पुरवा आदि गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरने वाले हैं। बाढ़ से फसलें तो बरबाद हो ही रही हैं। पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है। अभी तो पशुपालक किसी तरह से पशुचारे की व्यवस्था कर रहे है लेकिन अगर नदी और बढे़गी तो संकट आ पड़ेगा।
फिर एक दर्जन गांवों में भरा पानी
सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। सरयू नदी का जलस्तर मंगलवार की शाम 93.250 मीटर पहुंच गया। करीब एक दर्जन गांव फिर बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। सरयू नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों में हर पल दहशत है। खेती की भूमि कटान में जा रही जबिक घर पानी से घिर गए हैं। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से सरयू का पानी हाईवे किनारे पानी भरने लगा है।
साथ ही हाईवे पर बनी पुलियों के सहारे नदी का पानी उसपार कर गांवों के सीवानों में पहुंच रहा है। लगभग सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न हो गई है। केशवपुर में पानी रिहायशी जगहों पर भरने लगा है। भरथापुर, कल्यानपुर, पड़ाव और सहजौरा पानी से घिर गए हैं। रास्ते में पानी भरने से ग्रामीणों की परेशानी एक बार फिर बढ़ चली है। अबकी बार लगातार चौथी बार कल्यानपुर गांव का रास्ता जलमग्न है। रास्ते में पानी आ जाने से बुजुर्गों, महिलाओं व स्कूली बच्चों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब महीने भर से जानवरों को चारे की समस्या हो गई है। सहजौरा, कल्यानपुर आदि में कटान हो रही है। भरथापुर में ठोकर बैठने से नदी कल्यानपुर गांव से सटकर बह रही है। ऐसे में प्राथमिक विद्यालय सीतारामपुर पर नदी का दबाव बढ़ता जा रहा है। गांव के जितेंद्र सिंह, भरथलाल, जगलाल, राज बहादुर, सुशील कुमार यादव, मंगल प्रसाद संजय प्रधान का कहना है कि प्रशासन न तो विस्थापन के लिये जमीन ढूंढ पा रहा है न गांव बचाने का उपाय कर रहा है। इन्हीं आश्वासनों के चलते तमाम गांव समाप्त हो चुके हैं।