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अधूरे आंगनबाड़ी भवनों का कर दिया भुगतान
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अधूरे आंगनबाड़ी भवनों का कर दिया भुगतान
जांच में प्लास्टर, खिड़की, दरवाजा और फर्श क्षतिग्रस्त मिले
बस्ती। जिले में नवनिर्मित 108 आंगनबाड़ी भवनों में 11 भवन अब भी अधूरे हैं। जबकि इन भवनों के निर्मण का भुगतान नौ वर्ष पहले किया जा चुका है। जांच में सभी भवनों का प्लास्टर, खिड़की, दरवाजा और फर्श क्षतिग्रस्त पाए गए हैं।
शासन आंगनबाड़ी केंद्र को प्री-प्राइमरी स्कूल के तर्ज पर संचालित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। शासन की मंशा है कि तीन से छह वर्ष के बच्चों को चित्र, कार्टून, कठपुतली के अलावा खेल-खेल में पढ़ाया जाए। यहां निजी विद्यालयों की तर्ज पर प्ले स्कूल संचालित करने के लिए संसाधन मुहैया कराने की योजना भी है, लेकिन 11 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में गड़बड़ी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। नरेंद्र मोदी विचार मंच के जिला मंत्री रितेश पाल की शिकायत के बाद जांच में मामला सामने आने के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है। हालांकि शिकायतकर्ता का कहना है कि कार्रवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बाल विकास परियोजना अधिकारियों से 108 आंगनबाड़ी भवनों की स्थलीय जांच कराई गई। 11 ऐसे भवन पाए गए जो वर्ष 2012 से अधूरे और क्षतिग्रस्त हैं। इनमें बहादुरपुर क्षेत्र के गोविंदापुर, मरवटिया तिवारी एवं परिवारपुर, कप्तानगंज के पेंदा प्रथम एवं पेंदा द्वितीय, रामनगर के मझौआ रामप्रसाद द्वितीय एवं सेवरालाला, विक्रमजोत के अमौढ़ा तृतीय एवं अमौढ़ा पंचम, हरैया के खमरिया गंगाराम और कुदरहा क्षेत्र के चिलवनिया शामिल है। इन भवनों का निर्माण पैक्सफेड ने कराया है।एक भवन की लागत साढ़े सात लाख है। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने जांच रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी है।
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कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। अगर कार्यदायी संस्था अधूरे कामों को पूरा नहीं करती है तो उसके खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी।
डॉ. राजेश कुमार प्रजापति, सीडीओ
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जांच में प्लास्टर, खिड़की, दरवाजा और फर्श क्षतिग्रस्त मिले
बस्ती। जिले में नवनिर्मित 108 आंगनबाड़ी भवनों में 11 भवन अब भी अधूरे हैं। जबकि इन भवनों के निर्मण का भुगतान नौ वर्ष पहले किया जा चुका है। जांच में सभी भवनों का प्लास्टर, खिड़की, दरवाजा और फर्श क्षतिग्रस्त पाए गए हैं।
शासन आंगनबाड़ी केंद्र को प्री-प्राइमरी स्कूल के तर्ज पर संचालित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। शासन की मंशा है कि तीन से छह वर्ष के बच्चों को चित्र, कार्टून, कठपुतली के अलावा खेल-खेल में पढ़ाया जाए। यहां निजी विद्यालयों की तर्ज पर प्ले स्कूल संचालित करने के लिए संसाधन मुहैया कराने की योजना भी है, लेकिन 11 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में गड़बड़ी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। नरेंद्र मोदी विचार मंच के जिला मंत्री रितेश पाल की शिकायत के बाद जांच में मामला सामने आने के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है। हालांकि शिकायतकर्ता का कहना है कि कार्रवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बाल विकास परियोजना अधिकारियों से 108 आंगनबाड़ी भवनों की स्थलीय जांच कराई गई। 11 ऐसे भवन पाए गए जो वर्ष 2012 से अधूरे और क्षतिग्रस्त हैं। इनमें बहादुरपुर क्षेत्र के गोविंदापुर, मरवटिया तिवारी एवं परिवारपुर, कप्तानगंज के पेंदा प्रथम एवं पेंदा द्वितीय, रामनगर के मझौआ रामप्रसाद द्वितीय एवं सेवरालाला, विक्रमजोत के अमौढ़ा तृतीय एवं अमौढ़ा पंचम, हरैया के खमरिया गंगाराम और कुदरहा क्षेत्र के चिलवनिया शामिल है। इन भवनों का निर्माण पैक्सफेड ने कराया है।एक भवन की लागत साढ़े सात लाख है। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने जांच रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी है।
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कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। अगर कार्यदायी संस्था अधूरे कामों को पूरा नहीं करती है तो उसके खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी।
डॉ. राजेश कुमार प्रजापति, सीडीओ