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Basti News: ग्रामीण अंचल में सज गए पंडाल, दुर्गा पूजा आज से
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ग्रामीण क्षेत्र के पूजा पंडाल में स्थापित करने के लिए देवी प्रतिमा ले जाते आयोजन समिति के लोग।
- फोटो : Samvad
बस्ती। ग्रामीण अंचल में दुर्गा पूजा उत्सव नवरात्र के पहले दिन रविवार से शुरू हो जाएगा। शनिवार को आयोजन समितियां सक्रिय हो गईं। मूर्तिकारों के यहां से देवी प्रतिमाएं पंडाल में पहुंचाई गईं। शाम होते-होते पंडालों में मां भगवती विराजमान हो गईं। रविवार को विधि-विधान से पट्टिका हटाकर मां भगवती की आराधना शुरू हो जाएगी। दशहरा के दिन देवी प्रतिमाएं विसर्जित की जाएंगी।
ग्रामीण अंचल में दुर्गा पूजा उत्सव नवरात्र के प्रथम दिन से शुरू हो जाएगा। शनिवार को मूर्तिकारों के कारखानों पर दुर्गा पूजा कमेटियों की भीड़ लगी रही। मालवीय मार्ग, जिगिना, मनौरी आदि जगहों पर डेरा डालकर प्रतिमा तैयार करने वाले बंगाल के कलाकार मूर्तियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त रहे। ट्रैक्टर-ट्रॉली एवं अन्य बड़े वाहनों से देवी प्रतिमाओं को सुरक्षित पंडाल तक पहुंचाया गया।
इस दौरान शहर में आवागमन का दबाव बढ़ा रहा। देर रात तक प्रतिमाओं को ले जाने का सिलसिला बना रहा। रुधौली क्षेत्र के मानिकचंद से आए आयोजन समिति के सदस्य प्रभु दयाल ने बताया कि इस बार 25 हजार रुपये में देवी प्रतिमा लेकर जा रहे हैं। मुनियांव के नितिन पांडेय ने बताया कि देवी प्रतिमा के लिए मूर्तिकारों को 15 हजार रुपये देना पड़ा है। जबकि मूर्तिकार राजू पाल ने बताया कि अधिकतम 25 से 30 हजार रुपये में देवी प्रतिमाएं आयोजन समितियों ने पसंद किया है।
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मां के दरबार में अन्य देवी-देवता भी हो रहे विराजमान
गांव-गांव सजने वाले दुर्गा पंडाल में मां भगवती की कृपालु एवं पापनाशिनी स्वरूप की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इसमें मां भगवती दुर्गा रूप में बाघ पर सवार होकर राक्षसों का मर्दन करती हुई दिख रही हैं। जबकि उनके सच्चे दरबार में विघ्नहर्ता, कार्तिकेय, महालक्ष्मी की भी प्रतिमाएं उनकी सवारियों के साथ सुशोभित की जा रही हैं।
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ग्रामीण अंचल में दुर्गा पूजा उत्सव नवरात्र के प्रथम दिन से शुरू हो जाएगा। शनिवार को मूर्तिकारों के कारखानों पर दुर्गा पूजा कमेटियों की भीड़ लगी रही। मालवीय मार्ग, जिगिना, मनौरी आदि जगहों पर डेरा डालकर प्रतिमा तैयार करने वाले बंगाल के कलाकार मूर्तियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त रहे। ट्रैक्टर-ट्रॉली एवं अन्य बड़े वाहनों से देवी प्रतिमाओं को सुरक्षित पंडाल तक पहुंचाया गया।
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इस दौरान शहर में आवागमन का दबाव बढ़ा रहा। देर रात तक प्रतिमाओं को ले जाने का सिलसिला बना रहा। रुधौली क्षेत्र के मानिकचंद से आए आयोजन समिति के सदस्य प्रभु दयाल ने बताया कि इस बार 25 हजार रुपये में देवी प्रतिमा लेकर जा रहे हैं। मुनियांव के नितिन पांडेय ने बताया कि देवी प्रतिमा के लिए मूर्तिकारों को 15 हजार रुपये देना पड़ा है। जबकि मूर्तिकार राजू पाल ने बताया कि अधिकतम 25 से 30 हजार रुपये में देवी प्रतिमाएं आयोजन समितियों ने पसंद किया है।
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मां के दरबार में अन्य देवी-देवता भी हो रहे विराजमान
गांव-गांव सजने वाले दुर्गा पंडाल में मां भगवती की कृपालु एवं पापनाशिनी स्वरूप की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इसमें मां भगवती दुर्गा रूप में बाघ पर सवार होकर राक्षसों का मर्दन करती हुई दिख रही हैं। जबकि उनके सच्चे दरबार में विघ्नहर्ता, कार्तिकेय, महालक्ष्मी की भी प्रतिमाएं उनकी सवारियों के साथ सुशोभित की जा रही हैं।