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पंचायत चुनाव: मतदान से पहले गंगा स्नान
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पंचायत चुनाव : मतदान से पहले गंगा स्नान
बस्ती। पंचायत चुनाव में भले ही अभी काफी देर हो, मगर संभावित दावेदारों ने पाशा फेंकना शुरू कर दिया है। कोई मतदान से पहले मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान कराने को बस बुक कराया है तो कुछ लोगों के साथ दावतों का दौर शुरू हो चुका है। मतदाताओं के कुशलक्षेम पूछने की ही नहीं, किसी के बीमार पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए अपनी गाड़ी लाने की भी होड़ मची है। गांव में खेमेबंदी तेज होने से छोटे-छोटे मामले जो आपस में बातचीत से सुलझ सकते थे, उनको भी पुलिस तक पहुंचा कर विवाद को संगीन बनाने पर तुले हैं। इससे गांव में विवाद बढ़ रहा है तो प्रशासन को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
गांवों में विकास कार्य कराने की होड़ चल रही है। दोबारा कुर्सी पर काबिज होने के लिए प्रधान गांवों में जल्द विकास कार्य कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। विरोधी पक्ष उनके खिलाफ शिकायतों की झड़ी लगा रहे हैं। गांवों में नाली, खड़ंजा, जलनिकासी, बिजली, समय से राशन वितरण कराने को लेकर कवायद की जा रही है। दूसरी तरफ विकास कार्य की गुणवता, साफ-सफाई को लेकर मौजूदा ग्राम प्रधानों को निशाना भी बनाया जा रहा है। प्रधानों एवं कोटेदारों के खिलाफ पहुंचने वाली शिकायतें बढ़ती जा रही है। अन्य चुनावों के मुकाबले पंचायत चुनाव का मिजाज काफी रोचक होता है। गांव में इस चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है। इन चुनावों में रिश्ते अक्सर तार-तार हो जाते हैं।
चारों पद का चुनाव एक साथ
जिला पंचायत और बीडीसी के लिए 2015 में एक साथ मतदान हुआ था। इसके बाद ग्राम प्रधान तथा सदस्यों के लिए चुनाव हुआ था। इस तरह से सितंबर-अक्तूबर के बाद ही चुनाव संभावित है। निर्वाचन आयोग ने इस बार चारों पदों के लिए एक साथ चुनाव कराने की योजना बनाई है। इसके तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू हुआ है। एडीएम प्रशासन को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा एसडीएम को सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नियुक्त किया गया है।
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इन पदों के लिए होंगे चुनाव
चुनाव जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान तथा ग्राम पंचायत सदस्य के लिए होंगे। जिला पंचायत और बीडीसी के लिए एक मत पेटिका होगी। प्रधान तथा ग्राम पंचायत सदस्य के लिए एक अलग बॉक्स होगा।
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बस्ती। पंचायत चुनाव में भले ही अभी काफी देर हो, मगर संभावित दावेदारों ने पाशा फेंकना शुरू कर दिया है। कोई मतदान से पहले मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान कराने को बस बुक कराया है तो कुछ लोगों के साथ दावतों का दौर शुरू हो चुका है। मतदाताओं के कुशलक्षेम पूछने की ही नहीं, किसी के बीमार पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए अपनी गाड़ी लाने की भी होड़ मची है। गांव में खेमेबंदी तेज होने से छोटे-छोटे मामले जो आपस में बातचीत से सुलझ सकते थे, उनको भी पुलिस तक पहुंचा कर विवाद को संगीन बनाने पर तुले हैं। इससे गांव में विवाद बढ़ रहा है तो प्रशासन को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
गांवों में विकास कार्य कराने की होड़ चल रही है। दोबारा कुर्सी पर काबिज होने के लिए प्रधान गांवों में जल्द विकास कार्य कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। विरोधी पक्ष उनके खिलाफ शिकायतों की झड़ी लगा रहे हैं। गांवों में नाली, खड़ंजा, जलनिकासी, बिजली, समय से राशन वितरण कराने को लेकर कवायद की जा रही है। दूसरी तरफ विकास कार्य की गुणवता, साफ-सफाई को लेकर मौजूदा ग्राम प्रधानों को निशाना भी बनाया जा रहा है। प्रधानों एवं कोटेदारों के खिलाफ पहुंचने वाली शिकायतें बढ़ती जा रही है। अन्य चुनावों के मुकाबले पंचायत चुनाव का मिजाज काफी रोचक होता है। गांव में इस चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है। इन चुनावों में रिश्ते अक्सर तार-तार हो जाते हैं।
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चारों पद का चुनाव एक साथ
जिला पंचायत और बीडीसी के लिए 2015 में एक साथ मतदान हुआ था। इसके बाद ग्राम प्रधान तथा सदस्यों के लिए चुनाव हुआ था। इस तरह से सितंबर-अक्तूबर के बाद ही चुनाव संभावित है। निर्वाचन आयोग ने इस बार चारों पदों के लिए एक साथ चुनाव कराने की योजना बनाई है। इसके तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू हुआ है। एडीएम प्रशासन को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा एसडीएम को सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नियुक्त किया गया है।
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इन पदों के लिए होंगे चुनाव
चुनाव जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान तथा ग्राम पंचायत सदस्य के लिए होंगे। जिला पंचायत और बीडीसी के लिए एक मत पेटिका होगी। प्रधान तथा ग्राम पंचायत सदस्य के लिए एक अलग बॉक्स होगा।