फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   Orders are being issued only in revenue matters... measurement, stone usage is far-fetched

Basti News: राजस्व वाद में सिर्फ जारी किए जा रहे आदेश... पैमाइश, पत्थर नसब दूर की कौड़ी

Tue, 06 Feb 2024 11:35 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 06 Feb 2024 11:35 PM IST
विज्ञापन
Orders are being issued only in revenue matters... measurement, stone usage is far-fetched
- आदेश पाने के बाद चढ़ावा का हो रहा इंतजार, इधर से उधर भटक रहे फरियादी
विज्ञापन

- पक्की पैमाइश व वरासत के मामले में हो रही धांधली, अधिवक्ता भी हुए मुखर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। राजस्व वादों की स्थिति सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। त्वरित गति से कार्रवाई की मुहिम में फरियादियों से न्याय कोसों दूर होता जा रहा है। राजस्व अधिकारियों का आदेश लेकर कोई मातहतों का चक्कर काट रहा है, तो कुछ उसमें संशोधन कराने के लिए भागदौड़ तेज कर रहे हैं। जबकि तहसील से लगते जिला और शासन स्तर पर इनसे संबंधित मुकदमों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे आमजन की समस्या घटने के बजाय बढ़ जा रही है। क्योंकि उनकी पत्रावली पर निस्तारण की रिपोर्ट अंकित होती जा रही है।
जमीनी विवाद में देवरिया नरसंहार कांड के बाद शासन ने इन मामलों में सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। स्पष्ट निर्देश है कि राजस्व से संबंधित मामलों की लगातार सुनवाई कर निस्तारण कराया जाए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर कमिश्नर और डीएम भी राजस्व अधिकारियों पर सख्ती बरते हुए हैं। ऐसे में नायब, तहसीलदार, एसडीएम स्तर के राजस्व अधिकारियों के यहां लंबित न्यायिक प्रकरण तेजी के साथ निपटाए जा रहे हैं। आनन- फानन में सुनवाई होने से वादकारी अधिकांश मामलों में न्याय से वंचित होते जा रहे हैं। इसको लेकर अधिवक्ता भी मुखर हो गए हैं। एक सप्ताह से राजस्व मामलों की पैरवी करने वाले अधिवक्ता हड़ताल पर हैं।
विज्ञापन

उनका कहना है कि अधिकांश वाद में मनमानी ढंग से आदेश पारित किया जा रहा है। पक्ष- विपक्ष की बहस तक नहीं कराई जा रही है।
-----------------------
उलझ रहे धारा-24 पक्की पैमाइश के मामले
तहसीलों में लंबे समय से विचाराधीन धारा-24 पक्की पैमाइश के मामले आदेश के बाद उलझते जा रहे हैं। एसडीएम स्तर से सुनवाई के बाद आदेश तो पारित कर दिया जा रहा है, मगर इसका अनुपालन हो पाना कठिन हो गया है। नायब और कानूनगो स्तर पर इस तरह के आदेश ठंडे बस्ते में डाल दिए जा रहे हैं। कुछ मामले में चढ़ावा चढ़ाने के बाद पक्की पैमाइश हो पा रही है। उधर आदेश निर्गत होते ही संबंधित वाद निस्तारित मान लिया जा रहा है। इसके चलते वादकारी ऊपर शिकायत भी नहीं कर सकते हैं। पत्थर नसब और निशानदेही के लिए वादकारी इधर से उधर अधिकारियों- कर्मचारियों का चक्कर कांट रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

----------------
वरासत से जुड़े मामलों में भी हो रहा खेल
तहसीलों में धारा-24 वरासत से जुड़े मामलों में भी खेल हो रहा है। चढ़ावा चढ़ाने पर बगैर सुनवाई के ही आदेश कर दिए जा रहे हैं, जिससे वाजिब हक वाले निराश हो रहे हैं। उनका मामला निस्तारित बताकर उन्हें हताश कर दिया जा रहा है। बस्ती सदर तहसील में सुपेलवा की चंद्रावती देवी के पति की संपत्ति उनके जीवित रहते हुए उनके जेठ के नाम स्थानांतरित कर दी गई। इस मामले ने तूल पकड़ा तो उच्चाधिकारी अपने मातहतों को बचाने में जुट गए।
----------------------
20 हजार से अधिक मुकदमों का हुआ निस्तारण
पांच साल से अधिक समय से तहसील और चकबंदी न्यायालयों में लंबित 30 हजार पत्रावलियों को तीन माह के भीतर निपटाया गया। 20 हजार से अधिक मुकदमे अभी तक निस्तारित किए जा चुके हैं। मगर इसमें से कुछ वाद अनियमित ढंग से निस्तारित हुए हैं। इसको लेकर वादकारी और अधिवक्ता दोनों नाराज हैं।
-----------------
केस- एक
सदर तहसील के सुपेलवा की निवासी चंद्रावती देवी के पति की मृत्यु छह साल पहले हो गई। उनकी वरासत का प्रकरण नायब तहसीलदार सदर के यहां विचाराधीन था। आनन- फानन में आदेश पारित हुआ कि चंद्रावती के पति की संपत्ति उनके जेठ के नाम दर्ज कर दी जाए। चंद्रावती ने बताया कि उक्त पत्रावली में फर्जी दस्तावेज के आधार पर आदेश हुआ है। उन्होंने प्रकरण की शिकायत उच्चाधिकारियों से की, मगर कार्रवाई नहीं हो रही है।
-----------
केस- दो
हर्रैया तहसील में ग्राम पंचायत इटवा के काश्तकार विजेंद्र कुमार पाठक के धारा-24 के मामले में एसडीएम स्तर से साल भर पहले पक्की पैमाइश के साथ पत्थर नसब कराने का आदेश हुआ। तभी यह आदेश लिए फरियादी नायब तहसीलदार और कानूनगो का चक्कर काट रहे हैं। उन्हें साल भर से तारीख पर तारीख दी जा रही है, और पैमाइश अभी तक नहीं हो सकी। उनका मामला तहसील अभिलेख में निस्तारित दर्ज हो गया है।
-------------
केस- तीन
डीएम न्यायालय से हर्रैया तहसीलदार के लिए आदेश पारित हुआ कि ग्राम पंचायत इटवा के गाटा संख्या- 231/0.012 हेक्टेयर नवीन परती भूमि से अवैध कब्जा हटवाया जाए। इस आदेश का अनुपालन तीन माह बाद भी नहीं हो पाया, जबकि डीएम ने अपने आदेश में 15 दिन का समय निर्धारित किया था। अब इस मामले में वादकारी आदेश लेकर भटक रहा हैं।
----------------------
इंसाफ नहीं साफ हो रहा है मुकदमा
राजस्व न्यायालयों में इन दिनों इंसाफ नहीं मुकदमों को साफ किया जा रहा है। हम तो सिविल केस ज्यादा देखते हैं, लेकिन देखने और सुनने में आ रहा है राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी शासन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आदेश पारित करने में जल्दबाजी कर रहे हैं, जिससे वादकारी न्याय से वंचित हो रहा है। यही वजह है कि अधिवक्ता हड़ताल पर हैं। अगली बैठक सात फरवरी (बुधवार) को होगी। इसमें अग्रिम निर्णय लिया जाएगा।


-वीरेंद्र पांडेय, वरिष्ठ अधिवक्ता, सिविल बार।
-------------------
राजस्व संबंधित मामलों के त्वरित निस्तारण के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों को सचेत किया गया है कि प्रत्येक वाद का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण ढंग से होना चाहिए। यदि नियम विरुद्ध आदेश होगा तो संबंधित अधिकारी दोषी माने जाएंगे। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
-अखिलेश सिंह, कमिश्नर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed