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ओपीडी खचाखच, मास्क न दूरी
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जिला अस्पताल में लगी लोगों की भीड़।
- फोटो : BASTI
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ओपीडी खचाखच, मास्क न दूरी
बस्ती। जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे ओपीडी खचाखच भरा रहा। चिकित्सक के कक्ष के भीतर व बाहर भीड़ बिना मास्क और सामाजिक दूरी का पालन किए अपनी बारी का इंतजार कर रही थी।
पड़ताल में पता चला करीब 12 बजे ओपीडी से अधिकांश भीड़ जा चुकी थी। बृहस्पतिवार को भी करीब 600 पर्चे ओपीडी के लिए काटे जा चुके थे। ओपीडी के भीतर अधिकांश लोग के न मास्क पहने थे और न ही उनके मन में कोरोना का भय था। चिकित्सक डॉ. राम प्रकाश, डॉ. रामजी सोनी के अलावा सभी चिकित्सक कक्ष में बैठकर मरीज देखते मिले। डॉ. राम प्रकाश ने बताया कि यहां आने वाले लोग बात सुनने को तैयार नहीं हैं। बिना मास्क यहां आने वालों को समझा कर कोरोना गाइड लाइन का पालन करने को कहा जाता है, मगर उन पर असर नहीं होता है।
फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी से इलाज कराने पहुंचे शहर के गांधीनगर निवासी राजकुमार ने कहा कि अब कोरोना समाप्त हो गया है। ऐसे में मास्क की कोई जरूरत नहीं है। चिकित्सक के समझाने के सवाल पर कहा कि डॉक्टर तो जो सरकार समझाती है उसी की भाषा बोलते हैं। जबकि एक अन्य मरीज ने कहा कि उससे यह गलती हुई है कि उसने मास्क नहीं लगाया। उसके बाद वह लाइन से निकल कर मास्क खरीदने की बात कहने लगा। एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा ने कहा कि जगह-जगह कोरोना गाइड लाइन के पालन का पोस्टर चस्पा किया गया है। चिकित्सक भी समझाते हैं, मगर कोई सुनने को तैयार नहीं है।
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बस्ती। जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे ओपीडी खचाखच भरा रहा। चिकित्सक के कक्ष के भीतर व बाहर भीड़ बिना मास्क और सामाजिक दूरी का पालन किए अपनी बारी का इंतजार कर रही थी।
पड़ताल में पता चला करीब 12 बजे ओपीडी से अधिकांश भीड़ जा चुकी थी। बृहस्पतिवार को भी करीब 600 पर्चे ओपीडी के लिए काटे जा चुके थे। ओपीडी के भीतर अधिकांश लोग के न मास्क पहने थे और न ही उनके मन में कोरोना का भय था। चिकित्सक डॉ. राम प्रकाश, डॉ. रामजी सोनी के अलावा सभी चिकित्सक कक्ष में बैठकर मरीज देखते मिले। डॉ. राम प्रकाश ने बताया कि यहां आने वाले लोग बात सुनने को तैयार नहीं हैं। बिना मास्क यहां आने वालों को समझा कर कोरोना गाइड लाइन का पालन करने को कहा जाता है, मगर उन पर असर नहीं होता है।
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फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी से इलाज कराने पहुंचे शहर के गांधीनगर निवासी राजकुमार ने कहा कि अब कोरोना समाप्त हो गया है। ऐसे में मास्क की कोई जरूरत नहीं है। चिकित्सक के समझाने के सवाल पर कहा कि डॉक्टर तो जो सरकार समझाती है उसी की भाषा बोलते हैं। जबकि एक अन्य मरीज ने कहा कि उससे यह गलती हुई है कि उसने मास्क नहीं लगाया। उसके बाद वह लाइन से निकल कर मास्क खरीदने की बात कहने लगा। एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा ने कहा कि जगह-जगह कोरोना गाइड लाइन के पालन का पोस्टर चस्पा किया गया है। चिकित्सक भी समझाते हैं, मगर कोई सुनने को तैयार नहीं है।
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