फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   On the third day of Navratri, the devotees of the mother worshiped Ashtabhuja Devi

Basti News: नवरात्र के तीसरे दिन मां के भक्तों ने की अष्टभुजा देवी की आराधना

Wed, 02 Apr 2025 12:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Wed, 02 Apr 2025 12:23 AM IST
विज्ञापन
On the third day of Navratri, the devotees of the mother worshiped Ashtabhuja Devi
बस्ती। नवरात्र के तीसरे दिन माता के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा स्वरूप की आराधना की गई। नौ दिन का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ मां कूष्मांडा की पूजा करने के साथ ही दिन की शुरुआत की। वहीं व्रत न रखने वाले मां के भक्तों ने भी माता के चौथे स्वरूप का पूजन-वंदन किया। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार देखी गई।
विज्ञापन

ज्योतिषाचार्य पंडित देवस्य मिश्र बताते हैं कि मां कूष्मांडा के शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही है। इनके तेज की तुलना इन्हीं से की जा सकती है। अन्य कोई भी देवी-देवता इनके तेज़ और प्रभाव की समता नहीं कर सकते। इन्हीं के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में स्थित तेज इन्हीं की छाया है। इनकी आठ भुजाएं हैं। अतः ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमलपुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र और गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है और इनका वाहन सिंह है।
विज्ञापन

-
आज होगी स्कंद माता
- नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को देवी भगवती के पांचवें स्वरूप नारी शक्ति और मातृ शक्ति की आराधना की जाएगी। स्कंद कुमार की माता होने के कारण इनका नाम स्कंद माता पड़ा। यह गणपति की भी माता हैं। गणेश और कार्तिकेय दोनों उनके पुत्र हैं। बताया कि तारकासुर को वरदान था कि वह भगवान शिव से उत्पन्न पुत्र के हाथ ही मारा जा सकता है। इसी कारण देवी पार्वती का भगवान शंकर से परिणय हुआ। इससे कार्तिकेय पैदा हुए और तारकासुर का वध हुआ। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्तिधर कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इनका वाहन मयूर है। स्कंदमाता के विग्रह में भगवान स्कंदजी बालरूप में इनकी गोद में बैठे हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
इस मंत्र से करें आराधना

- सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।
- या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed