{"_id":"5a5e4c334f1c1b5f268b4c7d","slug":"now-it-does-not-look-surtee","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुर्तीहट्टा में अब नहीं दिखती सुर्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुर्तीहट्टा में अब नहीं दिखती सुर्ती
बस्ती (ब्यूरो)
Updated Wed, 17 Jan 2018 12:32 AM IST
विज्ञापन
सुर्तीहट्टा में अब नहीं दिखती सुर्ती
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। मंडल मुख्यालय के शहर बस्ती का स्वरूप समय के साथ बदल गया है। अब शहर दो भागों पुरानी बस्ती व गांधी नगर में बंटा है। गांधी नगर का अस्तित्व आजादी के बाद आया। यह इलाका पूर्व में उजाड़ नजर आता था। शहरी स्वरूप पुरानी बस्ती का ही था। समय और परिस्थितियां बदलीं तो पुरानी बस्ती की सूरत भी बदल गई।
बस्ती शहर को राज परिवार ने बसाया था। यहां उस समय लोग आते - जाते थे, मगर धीरे-धीरे शहर का विस्तार हुआ। राज तंत्र समाप्त हुआ, मगर पुरानी बस्ती का कारोबारी स्वरूप जस का तस रहा। पुराने समय में बर्तन की मंडी के लिए जहां मंगल बाजार विख्यात हुआ करता था, अब वहां अन्य कारोबार भी होने लगे हैं। सुर्तीहट्टा तो पूरी तरह बदल गया है। यहां सुर्ती का कारोबार अब पूरी तरह से बंद है, मगर अन्य कारोबार यहां खूब फल फूल रहे हैं। पुरानी बस्ती का केवल पांडेय बाजार ऐसा है, जो शुरू से थोक गल्ला बाजार के रूप में जाना जाता रहा और आज भी यहां वही कारोबार हो रहा है। यहां अब भी दूरदराज से लोग सामान खरीदने के लिए आते हैं। हालांकि बदलाव इस बाजार में भी आया है। अब यहां गल्ला के अलावा थोक कपड़ाें व अन्य सामानों का भी कारोबार हो रहा है। यही नहीं, यहां भवन निर्माण सामग्री भी बिक रही है। कारोबारी इसके माध्यम से फल फूल रहे हैं।
विज्ञापन
बस्ती शहर को राज परिवार ने बसाया था। यहां उस समय लोग आते - जाते थे, मगर धीरे-धीरे शहर का विस्तार हुआ। राज तंत्र समाप्त हुआ, मगर पुरानी बस्ती का कारोबारी स्वरूप जस का तस रहा। पुराने समय में बर्तन की मंडी के लिए जहां मंगल बाजार विख्यात हुआ करता था, अब वहां अन्य कारोबार भी होने लगे हैं। सुर्तीहट्टा तो पूरी तरह बदल गया है। यहां सुर्ती का कारोबार अब पूरी तरह से बंद है, मगर अन्य कारोबार यहां खूब फल फूल रहे हैं। पुरानी बस्ती का केवल पांडेय बाजार ऐसा है, जो शुरू से थोक गल्ला बाजार के रूप में जाना जाता रहा और आज भी यहां वही कारोबार हो रहा है। यहां अब भी दूरदराज से लोग सामान खरीदने के लिए आते हैं। हालांकि बदलाव इस बाजार में भी आया है। अब यहां गल्ला के अलावा थोक कपड़ाें व अन्य सामानों का भी कारोबार हो रहा है। यही नहीं, यहां भवन निर्माण सामग्री भी बिक रही है। कारोबारी इसके माध्यम से फल फूल रहे हैं।
विज्ञापन