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नोटबंदी ः पटरी से उतरी गृहस्थी की गाड़ी
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:29 PM IST
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कंम्पनी बाग के पास एसबीआई के एटीएम से रूपया निकालने के लिए लगी लाइन।
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नोट की किल्लत से गृहस्थी की गाड़ी भी पटरी से उतर गई है। बृहस्पतिवार को भई बैंकों और एटीएम के सामने लंबी लाइनें लगी रहीं। इंतजार के बाद शाम को लोग खाली हाथ घर पहुंचे। घर का खर्च चलाने भर की रकम नहीं मिलने से लोगों नाराजगी भी बढ़ी है।
बृहस्पतिवार को अधिकतर एटीएम पर सुबह नौ बजे से लाइन लग गई। आईसीआईसीआई, पंजाब नेशनल, एसबीआई, एचडीएफसी आदि के एटीएम पर लोग दौड़ लगाते रहे। कोर्ट एरिया के एचडीएफसी एटीएम के पास खड़े दिलीप का कहना था कि बच्चों के गुल्लक से अब तक खर्च चलता रहा लेकिन अब हालात नियंत्रण से बाहर होने की कगार पर हैं। यादुवेश का कहना है कि लगन के चलते व्यवहार करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घर में जो कुछ था उसे बैंक में वापस दे आए, मिले थे सिर्फ चार हजार रुपये।
बनकटी प्रतिनिधि के मुताबिक भारतीय स्टेट बैंक के अलावा अधिकतर बैंक कैशलेस चल रहे हैं। बुधवार से तो और स्थिति खराब हो गई। किसान फसल बोने के लिए खाद और बीज का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। सिंडीकेट बैंक, पूर्वांचल बैंक पक्कवा बाजार, देईसांड़, बानपुर, बनकटी, लालगंज, महसों, महादेवा व स्टेट बैंक बनकटी के सामने लंबी लाइनें रकम मिलने के इंतजार में दिनभर लगी रहीं। मुर्तजा शंकरपुर कैलाश, जवाहर थाल्हापार बताते हैं कि नोट की परेशानी से हम गरीबों को गांवों में दिहाड़ी नहीं मिल पा रही है।
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नगर बाजार में बैंकों के अलावा डाकघर से भी लोगों को कोई सहयोग नहीं मिल रहा। पोस्टमास्टर लालजी सिंह का कहना है कि पिछले 15 दिन से कैश के लिए पत्र भेजा जा रहा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यह बात खाताधारक समझने को भी तैयार नहीं। हालात इतने बदतर हो रहे हैं कि नोकझोंक और गालियां भी सुननी पड़ रही हैं। डाकघर में 15 दिन से रुपये नहीं हैं।
बहादुरपुर प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र में ग्रामीण बैंक एकसड़ा, एसबीआई पोखरनी, बक्सर, पीएनबी कलवारी में सुबह लाइन में लगे लोगों का कहना है कि चार पांच दिन हो गया लाइन लगाते। जब तक नंबर आता तब तक बैंक में रकम खत्म हो जाती है। क्षेत्र के ओमप्रकाश पांडेय करहली खुर्द, वरुण सिंह बभनियांव, ग्राम प्रधान करहली कृष्णकुमार, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बिरउपुर बलराम यादव, नगर के ग्राम प्रधान राम कृपाल यादव आदि का कहना है कि लगन, जुताई बुआई आदि के लिए रुपये की ही जरूरत है। ऐसी परिस्थितियों में कोई कर्ज भी नहीं दे रहा है।
दुबौलिया प्रतिनिधि के मुताबिक बृहस्पतिवार देर शाम तक महिलाएं बैंकों के बाहर बैठी थीं। जबकि सुबह से लगी कतार में धक्का मुक्की होती रही। लेनिक लोगों को मायूसी हाथ लगी जब पता चला कि बैंकों में कैश उपलब्ध नहीं है। इसके बाद लोग घर लौट गए।
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बृहस्पतिवार को अधिकतर एटीएम पर सुबह नौ बजे से लाइन लग गई। आईसीआईसीआई, पंजाब नेशनल, एसबीआई, एचडीएफसी आदि के एटीएम पर लोग दौड़ लगाते रहे। कोर्ट एरिया के एचडीएफसी एटीएम के पास खड़े दिलीप का कहना था कि बच्चों के गुल्लक से अब तक खर्च चलता रहा लेकिन अब हालात नियंत्रण से बाहर होने की कगार पर हैं। यादुवेश का कहना है कि लगन के चलते व्यवहार करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घर में जो कुछ था उसे बैंक में वापस दे आए, मिले थे सिर्फ चार हजार रुपये।
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बनकटी प्रतिनिधि के मुताबिक भारतीय स्टेट बैंक के अलावा अधिकतर बैंक कैशलेस चल रहे हैं। बुधवार से तो और स्थिति खराब हो गई। किसान फसल बोने के लिए खाद और बीज का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। सिंडीकेट बैंक, पूर्वांचल बैंक पक्कवा बाजार, देईसांड़, बानपुर, बनकटी, लालगंज, महसों, महादेवा व स्टेट बैंक बनकटी के सामने लंबी लाइनें रकम मिलने के इंतजार में दिनभर लगी रहीं। मुर्तजा शंकरपुर कैलाश, जवाहर थाल्हापार बताते हैं कि नोट की परेशानी से हम गरीबों को गांवों में दिहाड़ी नहीं मिल पा रही है।
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नगर बाजार में बैंकों के अलावा डाकघर से भी लोगों को कोई सहयोग नहीं मिल रहा। पोस्टमास्टर लालजी सिंह का कहना है कि पिछले 15 दिन से कैश के लिए पत्र भेजा जा रहा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यह बात खाताधारक समझने को भी तैयार नहीं। हालात इतने बदतर हो रहे हैं कि नोकझोंक और गालियां भी सुननी पड़ रही हैं। डाकघर में 15 दिन से रुपये नहीं हैं।
बहादुरपुर प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र में ग्रामीण बैंक एकसड़ा, एसबीआई पोखरनी, बक्सर, पीएनबी कलवारी में सुबह लाइन में लगे लोगों का कहना है कि चार पांच दिन हो गया लाइन लगाते। जब तक नंबर आता तब तक बैंक में रकम खत्म हो जाती है। क्षेत्र के ओमप्रकाश पांडेय करहली खुर्द, वरुण सिंह बभनियांव, ग्राम प्रधान करहली कृष्णकुमार, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बिरउपुर बलराम यादव, नगर के ग्राम प्रधान राम कृपाल यादव आदि का कहना है कि लगन, जुताई बुआई आदि के लिए रुपये की ही जरूरत है। ऐसी परिस्थितियों में कोई कर्ज भी नहीं दे रहा है।
दुबौलिया प्रतिनिधि के मुताबिक बृहस्पतिवार देर शाम तक महिलाएं बैंकों के बाहर बैठी थीं। जबकि सुबह से लगी कतार में धक्का मुक्की होती रही। लेनिक लोगों को मायूसी हाथ लगी जब पता चला कि बैंकों में कैश उपलब्ध नहीं है। इसके बाद लोग घर लौट गए।