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शरीयत में दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Sun, 13 Nov 2016 11:17 PM IST
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दारुल उलूम अरबिया गौसिया में जलसे में उपस्थित महिलाएं।
मदरसा अरबिया गौसिया पुरानी बस्ती में रविवार को तहफ्फुजे शरीयत पर महिलाओं के एक दिनी जलसे का आयोजन किया गया। एक जुट महिलाओं और लड़कियों ने कहा कि किसी भी दशा में शरीयत में सरकार की दखलंदाजी की पुरजोर मुखालिफत की जाएगी।
आफरीन फात्मा के कलाम पाक की तिलावत से कार्यक्रम शुरू हुआ। जलसे को खिताब करते हुए उम्मेसलमा ने बताया कि एक जमाने में जब बच्चियों को जिंदा दफन कर दिया जाता था तब पैगंबर ने औरतों के हक की आवाज बुलंद की थी। इस दौरान निकाह, तलाक, खुआ जैसे मुद्दों पर तफसील से जानकारी दी गई। महिलओं के अधिकार, तालीम आदि मुद्दे पर साफीय खातून, जरीन फात्मा, तैयबा खातून, हाजरा खान आदि ने तफसीली तकरीर की। नूरशमा, हेना खातून, फरहत जहां, सैयदा खातून, हाजिरा खातून आदि ने भी संबोधित किया। तैय्यबा समा, शगुफ्ता, जन्नतनिंशा, शहजादी, रजिया खातून, आदि रहीं। मुल्क की खुुशहाली व अमन अमान से ताअल्लुक दुआ के साथ जलसा खत्म हुआ।
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आफरीन फात्मा के कलाम पाक की तिलावत से कार्यक्रम शुरू हुआ। जलसे को खिताब करते हुए उम्मेसलमा ने बताया कि एक जमाने में जब बच्चियों को जिंदा दफन कर दिया जाता था तब पैगंबर ने औरतों के हक की आवाज बुलंद की थी। इस दौरान निकाह, तलाक, खुआ जैसे मुद्दों पर तफसील से जानकारी दी गई। महिलओं के अधिकार, तालीम आदि मुद्दे पर साफीय खातून, जरीन फात्मा, तैयबा खातून, हाजरा खान आदि ने तफसीली तकरीर की। नूरशमा, हेना खातून, फरहत जहां, सैयदा खातून, हाजिरा खातून आदि ने भी संबोधित किया। तैय्यबा समा, शगुफ्ता, जन्नतनिंशा, शहजादी, रजिया खातून, आदि रहीं। मुल्क की खुुशहाली व अमन अमान से ताअल्लुक दुआ के साथ जलसा खत्म हुआ।
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