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आवास घोटाला: छरदही में 22 अनुसूचित जनजाति को मिला पीएम आवास
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जिले में एक भी नहीं एसटी फिर भी 22 लोगों को मिला पीएम आवास
बस्ती। कुदरहा ब्लॉक में शासन के निर्देश को ताक पर रखकर योजनाओं की बंदरबांट की जा रही है। जिले में एक भी अनुसूचित जनजाति का परिवार मौजूद नहीं है फिर भी 22 लोगों को इसका अनुचित लाभ देते हुए प्रधानमंत्री आवास का आवंटन हुआ है।
कुदरहा ब्लॉक के छरदही गांव में प्रधानमंत्री आवास में योजना का अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए 22 अपात्रों को अनुसूचित जनजाति कोटे से आवास आवंटित कर धन की बंदरबांट कर ली गई। जबकि सरकारी आंकड़ों में यह स्पष्ट है कि जिले में एक भी एसटी परिवार नहीं है। शिकायत के बावजूद इस मामले में प्रशासन की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुदरहा ब्लॉक के विभिन्न गांवों में सरकारी धन के बंदरबांट का एक और मामला सामने आया है। यहां ब्लॉक के छरदही गांव निवासी राज कुमार ने जन सुनवाई पोर्टल के अलावा जिले के आला अफसरों से शिकायत दर्ज कराई है कि उनके गांव में पंचायत चुनाव से पहले आवास के नाम पर सरकारी धन की लूट की गई है। यहां अनुसूचित जनजाति के नाम पर 22 अपात्रों को आवास आवंटित कर धन को जिम्मेदारों ने खुद रख लिया। इस गांव में 124 आवास वर्ष 2020-21 में दिए गए हैं। इनमें से 22 अनुसूचित जनजाति जबकि 47 अनुसूचित जाति को 40 सामान्य श्रेणी के लोगों के अलावा 15 अल्पसंख्यकों को आवास का आवंटन हुआ है। इसमें कई अनियमितता बरती गई।
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पूरे गांव पंचायत में जहां एक भी अनुसूचित जनजाति का परिवार नहीं है जबकि इन्हीं के नाम पर ऐसे लोगों को लाभ पहुंचाया गया, जो संपन्न हैं और उनकी जाति भी दूसरी है। यही नहीं, अपात्रों के चयन के चलते कई आवास अभी तक धरातल पर बने ही नहीं हैं, फिर भी जिम्मेदारों ने सभी किस्त अपात्रों को ही दे दी।
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बोले, बीडीओ
बीडीओ जय प्रकाश ने कहा कि ब्लॉक में एक भी अनुसूचित जनजाति का परिवार निवास नहीं करता है। यदि किसी को एसटी के नाम पर आवास दिया गया है तो उसकी जांच कर लूंगा।
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बोले, प्रभारी डीएम
प्रभारी डीएम/सीडीओ डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि यह मामला अब संज्ञान में आ गया है। इसकी जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कराई जाएगी। पीएम आवास के लिए अनुसूचित जनजाति के नाम पर लिए गए धन की रिकवरी होगी।
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जिले में एक भी अनुसूचित जनजाति नहीं
मुख्य राजस्व अधिकारी नीता यादव ने कहा कि सरकारी अभिलेखों में कुदरहा ब्लॉक का छरदही गांव ही नहीं अपने जिले में अनुसूचित जनजाति का एक भी व्यक्ति नहीं है। ऐसे में आवास दिए जाने का प्रकरण गंभीर है।
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बस्ती। कुदरहा ब्लॉक में शासन के निर्देश को ताक पर रखकर योजनाओं की बंदरबांट की जा रही है। जिले में एक भी अनुसूचित जनजाति का परिवार मौजूद नहीं है फिर भी 22 लोगों को इसका अनुचित लाभ देते हुए प्रधानमंत्री आवास का आवंटन हुआ है।
कुदरहा ब्लॉक के छरदही गांव में प्रधानमंत्री आवास में योजना का अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए 22 अपात्रों को अनुसूचित जनजाति कोटे से आवास आवंटित कर धन की बंदरबांट कर ली गई। जबकि सरकारी आंकड़ों में यह स्पष्ट है कि जिले में एक भी एसटी परिवार नहीं है। शिकायत के बावजूद इस मामले में प्रशासन की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कुदरहा ब्लॉक के विभिन्न गांवों में सरकारी धन के बंदरबांट का एक और मामला सामने आया है। यहां ब्लॉक के छरदही गांव निवासी राज कुमार ने जन सुनवाई पोर्टल के अलावा जिले के आला अफसरों से शिकायत दर्ज कराई है कि उनके गांव में पंचायत चुनाव से पहले आवास के नाम पर सरकारी धन की लूट की गई है। यहां अनुसूचित जनजाति के नाम पर 22 अपात्रों को आवास आवंटित कर धन को जिम्मेदारों ने खुद रख लिया। इस गांव में 124 आवास वर्ष 2020-21 में दिए गए हैं। इनमें से 22 अनुसूचित जनजाति जबकि 47 अनुसूचित जाति को 40 सामान्य श्रेणी के लोगों के अलावा 15 अल्पसंख्यकों को आवास का आवंटन हुआ है। इसमें कई अनियमितता बरती गई।
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पूरे गांव पंचायत में जहां एक भी अनुसूचित जनजाति का परिवार नहीं है जबकि इन्हीं के नाम पर ऐसे लोगों को लाभ पहुंचाया गया, जो संपन्न हैं और उनकी जाति भी दूसरी है। यही नहीं, अपात्रों के चयन के चलते कई आवास अभी तक धरातल पर बने ही नहीं हैं, फिर भी जिम्मेदारों ने सभी किस्त अपात्रों को ही दे दी।
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बोले, बीडीओ
बीडीओ जय प्रकाश ने कहा कि ब्लॉक में एक भी अनुसूचित जनजाति का परिवार निवास नहीं करता है। यदि किसी को एसटी के नाम पर आवास दिया गया है तो उसकी जांच कर लूंगा।
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बोले, प्रभारी डीएम
प्रभारी डीएम/सीडीओ डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि यह मामला अब संज्ञान में आ गया है। इसकी जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कराई जाएगी। पीएम आवास के लिए अनुसूचित जनजाति के नाम पर लिए गए धन की रिकवरी होगी।
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जिले में एक भी अनुसूचित जनजाति नहीं
मुख्य राजस्व अधिकारी नीता यादव ने कहा कि सरकारी अभिलेखों में कुदरहा ब्लॉक का छरदही गांव ही नहीं अपने जिले में अनुसूचित जनजाति का एक भी व्यक्ति नहीं है। ऐसे में आवास दिए जाने का प्रकरण गंभीर है।