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Basti News: सत्यापन न जांच...कागजात पूरे तो नहीं आएगी कोई आंच
Wed, 14 May 2025 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 14 May 2025 11:56 PM IST
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बस्ती। निजी अस्पतालों के पंजीकरण/नवीनीकरण के लिए विभागीय पोर्टल शुरू हो गया है। शुरुआत में प्रतिष्ठित चिकित्सकों के अस्पताल का नवीनीकरण किया जा रहा है। दो दिन में इस तरह के छह अस्पतालों का नवीनीकरण किया जा चुका है।
इसमें से एक भी अस्पताल का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ है। यही वजह है कि विभाग की तरफ से किसी भी अस्पताल के आवेदन किन्हीं कमी के चलते निरस्त नहीं किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार सेटिंग बनने के बाद विभाग के ही कुछ शातिर लोग प्रपत्रों की कमी पूरी करा दा रहे हैं, ताकि पोर्टल पर ऑनलाइन फीडिंग में कोई गड़बड़ी न होने पाए।
जिले भर में महज 50 निजी अस्पताल ही ऐसे हैं जो मानक के अनुरूप संचालित होते पाए जा सकते हैं। इन अस्पतालों का संचालन खुद प्रतिष्ठित चिकित्सक ही करते है। इसके अलावा जुगाड़ से संचालित किए जा रहे अस्पतालों की लंबी फेहरिस्त है।
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बिना जांच और सत्यापन के ही यह अस्पताल भी पंजीकरण/नवीनीकरण की बहती गंगा में हाथ धोने को तैयार हैं। अधोमानक अस्पतालों के पंजीकरण/ नवीनीकरण के लिए मरीज माफियाओं ने महकमे में तगड़ी सेटिंग बना ली है। चर्चा हैं कि अगर उच्चाधिकारियों ने संज्ञान नहीं लिया तो ऑनलाइन पंजीकरण/ नवीनीकरण की बहार में पांच साल के लिए इनका भी बेड़ा पार हो जाएगा।
क्योंकि जुगाड़ से चलने वाले अधिकतर अस्पताल मरीज माफियाओं के संरक्षण में है। इनके पास न तो स्थाई चिकित्सक हैं और न ही पंजीकरण के अनुरूप मरीजों के लिए इलाज की व्यवस्था है। पंजीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल लांच करके शासन ने एक चिकित्सक की डिग्री एक से अधिक जगह इस्तेमाल न होने की व्यवस्था बनाई तो शातिरों ने इसकी भी काट खोज ली है। यूनानी चिकित्सक एवं अन्य डॉक्टर की समकक्ष डिग्री लगाकर आवेदन का कोरम पूरा कर दिया गया है।
जानकार बताते हैं कि अधिकांश निजी अस्पतालों की ओर से आवेदन में दी गई चिकित्सक की डिग्री के अनुसार केवल परामर्श केंद्र खोलने तक की अनुमति मिल सकती है। लेकिन, इसकी आड़ में प्रसव, आर्थो और अन्य सर्जरी की व्यवस्था पहले की तरह संचालित किए जाने की तैयारी है।
ऐसे मरीजों का ऑपरेशन भाड़े के चिकित्सकों से कराया जाता है। सूत्रों के अनुसार महकमे में जिनकी सेटिंग है, उनका कोई स्थलीय सत्यापन नहीं किया जा रहा है। सिर्फ प्रपत्रों को जांच कर कोरम पूरा कर लिया जा रहा है।
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इसमें से एक भी अस्पताल का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ है। यही वजह है कि विभाग की तरफ से किसी भी अस्पताल के आवेदन किन्हीं कमी के चलते निरस्त नहीं किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार सेटिंग बनने के बाद विभाग के ही कुछ शातिर लोग प्रपत्रों की कमी पूरी करा दा रहे हैं, ताकि पोर्टल पर ऑनलाइन फीडिंग में कोई गड़बड़ी न होने पाए।
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जिले भर में महज 50 निजी अस्पताल ही ऐसे हैं जो मानक के अनुरूप संचालित होते पाए जा सकते हैं। इन अस्पतालों का संचालन खुद प्रतिष्ठित चिकित्सक ही करते है। इसके अलावा जुगाड़ से संचालित किए जा रहे अस्पतालों की लंबी फेहरिस्त है।
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बिना जांच और सत्यापन के ही यह अस्पताल भी पंजीकरण/नवीनीकरण की बहती गंगा में हाथ धोने को तैयार हैं। अधोमानक अस्पतालों के पंजीकरण/ नवीनीकरण के लिए मरीज माफियाओं ने महकमे में तगड़ी सेटिंग बना ली है। चर्चा हैं कि अगर उच्चाधिकारियों ने संज्ञान नहीं लिया तो ऑनलाइन पंजीकरण/ नवीनीकरण की बहार में पांच साल के लिए इनका भी बेड़ा पार हो जाएगा।
क्योंकि जुगाड़ से चलने वाले अधिकतर अस्पताल मरीज माफियाओं के संरक्षण में है। इनके पास न तो स्थाई चिकित्सक हैं और न ही पंजीकरण के अनुरूप मरीजों के लिए इलाज की व्यवस्था है। पंजीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल लांच करके शासन ने एक चिकित्सक की डिग्री एक से अधिक जगह इस्तेमाल न होने की व्यवस्था बनाई तो शातिरों ने इसकी भी काट खोज ली है। यूनानी चिकित्सक एवं अन्य डॉक्टर की समकक्ष डिग्री लगाकर आवेदन का कोरम पूरा कर दिया गया है।
जानकार बताते हैं कि अधिकांश निजी अस्पतालों की ओर से आवेदन में दी गई चिकित्सक की डिग्री के अनुसार केवल परामर्श केंद्र खोलने तक की अनुमति मिल सकती है। लेकिन, इसकी आड़ में प्रसव, आर्थो और अन्य सर्जरी की व्यवस्था पहले की तरह संचालित किए जाने की तैयारी है।
ऐसे मरीजों का ऑपरेशन भाड़े के चिकित्सकों से कराया जाता है। सूत्रों के अनुसार महकमे में जिनकी सेटिंग है, उनका कोई स्थलीय सत्यापन नहीं किया जा रहा है। सिर्फ प्रपत्रों को जांच कर कोरम पूरा कर लिया जा रहा है।