{"_id":"653c0f91a4f631ce4c007417","slug":"nhai-passenger-shed-not-safe-on-lumbini-duddhi-route-basti-news-c-207-1-bst1001-6252-2023-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर एनएचएआई के यात्री शेड सुरक्षित नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर एनएचएआई के यात्री शेड सुरक्षित नहीं
विज्ञापन
लुम्बिनी दुद्धी मार्ग के एकसरा के पास यात्री शेड पर अतिक्रमण।
-अतिक्रमणकारियों ने कर लिया कब्जा, टू-लेन सड़क के किनारे दस जगहों पर बनाए गए यात्री शेड
- डंप कर दिया गया मौरंग- बालू, चल रहीं बिल्डिंग मटेरियल की दुकानें
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) जिले में सड़क परियोजनाओं का निर्माण कर भूल गई है। लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर टू-लेन सड़क के दोनों तरफ बनाए गए यात्री शेड तक सुरक्षित नहीं रह गए हैं। एनएचएआई ने सड़क की देखरेख से किनारा किया तो अतिक्रमणकारियों ने इन यात्री शेडों पर कब्जा कर लिया।
कुछ जगहों पर यात्री शेड के नीचे मौरंग, बालू डंप कर दिए गए हैं। यहां बाकायदा बिल्डिंग मटेरियल की दुकानें चल रही है। वहीं कुछ स्थानों पर यह शेड उपले रखने के काम आ रहे हैं। यात्रियों को वाहनों के इंतजार के लिए सड़क के किनारे असुरक्षित खड़े होना पड़ रहा है।
एनएचएआई के अधीन लुंबिनी- दुद्धी मार्ग की कुल लंबाई जिले में 55 किलोमीटर है। रुधौली आमी नदी के पुल से टांडा पुल के बीच इस टू-लेन सड़क के दोनों तरफ एक दर्जन से अधिक स्थानों पर यात्री शेड बनाए गए थे। खासकर मार्ग के किनारे पड़ने वाले नुक्कड़, चौराहा और बाजार में यह स्थल चिह्नित किए गए थे। ताकि इस मार्ग पर आवागमन के लिए इन यात्री शेडों में सुरक्षित खड़े होकर वाहनों का इंतजार किया जा सके। प्रत्येक यात्री शेड के निर्माण पर चार लाख रुपये खर्च हुए थे। इस लागत से कुर्सियां और छाजन का इंतजाम हुआ था। मगर यह उपयोग में आने से पहले ही उपेक्षा का शिकार हो गया।
विज्ञापन
आम राहगीरों की सुविधा को नजरंदाज कर लोगों ने इन शेडों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। एनएचएआई को भी इन स्थलों की सुध नहीं है। यहां तक कि किसी यात्री शेड पर सूचक बोर्ड भी नहीं लगाए गए। अधिकांश जगहों पर यात्री शेड अतिक्रमण के शिकार होकर रह गए हैं। अतिक्रमणकारी इन शेडों के जरिये खुलेआम व्यवसाय कर रहे हैं। इस अंधेरगर्दी पर एनएचएआई के अफसर चुप हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
फुटहिया से कलवारी तक यात्री शेडों पर कब्जा
टू- लेन सड़क के दोनों किनारों पर फुटहिया से कलवारी के बीच कलवारी, बेलवाडाड़, शिवचौराहा, अकसड़ा, नगर बाजार के दक्षिण, उत्तर, महरीपुर समेत 11 जगहों पर यात्री शेड बनाए गए हैं। इसकी पहचान के लिए जागरूकता संबंधी साइन बोर्ड नहीं लगाए गए, जिससे यह आमजन के उपयोग से वंचित रह गए, जिससे धीरे- धीरे इन शेडों पर लोगों का कब्जा होता चला गया। बेलवाडाड के पास बनाए यात्री शेड में गिट्टी, मौरंग, बालू डंप कर दिया गया है। नगर बाजार से पहले दोनों तरफ बने स्टैंड पर भी गिट्टी, मौरंग ढेर है। यहां बिल्डिंग मटेरियल की दुकान चल रही है। इसके अलावा कलवारी, फुटहिया आदि जगहों के शेड भी उपेक्षित पड़े हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -
बांसी मार्ग पर शेडों में उपले रख रहे लोग
लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर बस्ती से रुधौली के बीच भी एक दर्जन यात्री शेड बनाए गए हैं। मगर यहां भी जागरूकता का अभाव है। यात्री शेडों में ग्रामीण उपले आदि रख रहे हैं। पड़िया, विशुनपुरवा, मुस्तफाबाद, पुरैना आदि जगहों पर यात्री शेडों में उपले, पुआल आदि रखा गया है, जिससे आम राहगीर इसकी पहचान नहीं कर पा रहे हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -
यहां बीच बाजार में खड़ी हो रहीं बसें, लग रहा जाम
इस मार्ग पर नगर बाजार, कलवारी, रुधौली, पुरैना, विशुनपुरवा आदि प्रमुख बाजारों में बसें एवं अन्य यात्री वाहन यात्री शेडों पर रुकने के बजाय बीच सड़क पर यात्रियों को बैठाने के लिए खड़े हो रहे हैं। भीड़-भाड़ के समय इन बसों के रुकने से जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
एनएचएआई का सिर्फ कैंप कार्यालय
एनएचएआई का जिले में अब सिर्फ कैंप कार्यालय बचा है। मड़वानगर टोल प्लाजा के निकट एक कमरे में अस्थायी कार्यालय बनाया गया है। मगर यहां जिम्मेदार यदा- कदा पहुंचते हैं, और निकल जाते हैं। परियोजना प्रबंधक स्तर के अधिकारी एवं इंजीनियर गोरखपुर में नियमित बैठ रहे हैं, जिससे यहां अयोध्या- गोरखपुर और लुंबिनी- दुद्धी सड़क परियोजना की नियमित निगरानी नहीं हो पा रही है।
-- -- -- -- -- -- -
झिरझिरवा पुल पर पड़ गया था दरार, राहगीरों ने दी सूचना
निगरानी न होने के चलते ही लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर नगर बाजार के पास झिरझिरवा पुल में पिछले पखवाड़े दरार पड़ गई थी। पुल के छत में दो से तीन सेंटीमीटर की गैपिंग आ गई थी। एनएचएआई के जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी। कुछ यात्रियों की नजर इस पर पड़ी तो लोग सकते में आ गए। तत्काल एनएचएआई को इसकी सूचना दी गई। तब जाकर जिम्मेदार हरकत में आए।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
यात्री शेड बनाने के बाद वहां पहचान के लिए साइन बोर्ड नहीं लगाया गया, जिससे आम राहगीर जागरूकता के अभाव में इसका उपयोग नहीं कर सकें। अब निजी क्षेत्र के लोग इसका उपयोग कर रहे हैं।
-राम आशीष दुबे, खडऊवा।
-- -- -- -- -- -- -- -- --
एनएचएआई की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने सड़क की हर स्तर से सुरक्षा सुनिश्चित करें। इसके लिए नियमित निगरानी होनी चाहिए। ऐसा न होने से यात्री शेडों पर लोगों का कब्जा हो गया है।
-राम बउझ, बैजलपुर।
-- -- -- -- -- -- -- --
यात्री शेड कब्जा हो जाने से हम लोग सड़क के किनारे असुरक्षित होकर वाहनों का इंतजार करते हैं। सरकारी बस एवं अन्य यात्री वाहन सवारी बैठाने के लिए सड़क पर ही खड़े हो जा रहे हैं।
-सताक्षी श्रीवास्तव, चकदहा।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
यात्री शेडों पर गाड़ी रुकने के लिए सड़क के किनारे जगह बनाया गया है। ताकि सवारी बैठाते समय दुर्घटना न होने पाए। मगर एनएचएआई की लापरवाही के चलते यह अनुपयोगी हो गए। अब बाजार में सवारी वाहन खड़े हो रहे हैं।
-राम गोपाल, कलवारी।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
यात्री शेडों पर अतिक्रमण की जानकारी नहीं है। निरीक्षण कराकर सत्यता जांची जाएगी। यदि अतिक्रमण पाया गया तो कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को सूचित किया जाएगा।
-इं. भावेष अग्रवाल, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई।
विज्ञापन
- डंप कर दिया गया मौरंग- बालू, चल रहीं बिल्डिंग मटेरियल की दुकानें
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) जिले में सड़क परियोजनाओं का निर्माण कर भूल गई है। लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर टू-लेन सड़क के दोनों तरफ बनाए गए यात्री शेड तक सुरक्षित नहीं रह गए हैं। एनएचएआई ने सड़क की देखरेख से किनारा किया तो अतिक्रमणकारियों ने इन यात्री शेडों पर कब्जा कर लिया।
कुछ जगहों पर यात्री शेड के नीचे मौरंग, बालू डंप कर दिए गए हैं। यहां बाकायदा बिल्डिंग मटेरियल की दुकानें चल रही है। वहीं कुछ स्थानों पर यह शेड उपले रखने के काम आ रहे हैं। यात्रियों को वाहनों के इंतजार के लिए सड़क के किनारे असुरक्षित खड़े होना पड़ रहा है।
विज्ञापन
एनएचएआई के अधीन लुंबिनी- दुद्धी मार्ग की कुल लंबाई जिले में 55 किलोमीटर है। रुधौली आमी नदी के पुल से टांडा पुल के बीच इस टू-लेन सड़क के दोनों तरफ एक दर्जन से अधिक स्थानों पर यात्री शेड बनाए गए थे। खासकर मार्ग के किनारे पड़ने वाले नुक्कड़, चौराहा और बाजार में यह स्थल चिह्नित किए गए थे। ताकि इस मार्ग पर आवागमन के लिए इन यात्री शेडों में सुरक्षित खड़े होकर वाहनों का इंतजार किया जा सके। प्रत्येक यात्री शेड के निर्माण पर चार लाख रुपये खर्च हुए थे। इस लागत से कुर्सियां और छाजन का इंतजाम हुआ था। मगर यह उपयोग में आने से पहले ही उपेक्षा का शिकार हो गया।
विज्ञापन
आम राहगीरों की सुविधा को नजरंदाज कर लोगों ने इन शेडों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। एनएचएआई को भी इन स्थलों की सुध नहीं है। यहां तक कि किसी यात्री शेड पर सूचक बोर्ड भी नहीं लगाए गए। अधिकांश जगहों पर यात्री शेड अतिक्रमण के शिकार होकर रह गए हैं। अतिक्रमणकारी इन शेडों के जरिये खुलेआम व्यवसाय कर रहे हैं। इस अंधेरगर्दी पर एनएचएआई के अफसर चुप हैं।
फुटहिया से कलवारी तक यात्री शेडों पर कब्जा
टू- लेन सड़क के दोनों किनारों पर फुटहिया से कलवारी के बीच कलवारी, बेलवाडाड़, शिवचौराहा, अकसड़ा, नगर बाजार के दक्षिण, उत्तर, महरीपुर समेत 11 जगहों पर यात्री शेड बनाए गए हैं। इसकी पहचान के लिए जागरूकता संबंधी साइन बोर्ड नहीं लगाए गए, जिससे यह आमजन के उपयोग से वंचित रह गए, जिससे धीरे- धीरे इन शेडों पर लोगों का कब्जा होता चला गया। बेलवाडाड के पास बनाए यात्री शेड में गिट्टी, मौरंग, बालू डंप कर दिया गया है। नगर बाजार से पहले दोनों तरफ बने स्टैंड पर भी गिट्टी, मौरंग ढेर है। यहां बिल्डिंग मटेरियल की दुकान चल रही है। इसके अलावा कलवारी, फुटहिया आदि जगहों के शेड भी उपेक्षित पड़े हैं।
बांसी मार्ग पर शेडों में उपले रख रहे लोग
लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर बस्ती से रुधौली के बीच भी एक दर्जन यात्री शेड बनाए गए हैं। मगर यहां भी जागरूकता का अभाव है। यात्री शेडों में ग्रामीण उपले आदि रख रहे हैं। पड़िया, विशुनपुरवा, मुस्तफाबाद, पुरैना आदि जगहों पर यात्री शेडों में उपले, पुआल आदि रखा गया है, जिससे आम राहगीर इसकी पहचान नहीं कर पा रहे हैं।
यहां बीच बाजार में खड़ी हो रहीं बसें, लग रहा जाम
इस मार्ग पर नगर बाजार, कलवारी, रुधौली, पुरैना, विशुनपुरवा आदि प्रमुख बाजारों में बसें एवं अन्य यात्री वाहन यात्री शेडों पर रुकने के बजाय बीच सड़क पर यात्रियों को बैठाने के लिए खड़े हो रहे हैं। भीड़-भाड़ के समय इन बसों के रुकने से जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
एनएचएआई का सिर्फ कैंप कार्यालय
एनएचएआई का जिले में अब सिर्फ कैंप कार्यालय बचा है। मड़वानगर टोल प्लाजा के निकट एक कमरे में अस्थायी कार्यालय बनाया गया है। मगर यहां जिम्मेदार यदा- कदा पहुंचते हैं, और निकल जाते हैं। परियोजना प्रबंधक स्तर के अधिकारी एवं इंजीनियर गोरखपुर में नियमित बैठ रहे हैं, जिससे यहां अयोध्या- गोरखपुर और लुंबिनी- दुद्धी सड़क परियोजना की नियमित निगरानी नहीं हो पा रही है।
झिरझिरवा पुल पर पड़ गया था दरार, राहगीरों ने दी सूचना
निगरानी न होने के चलते ही लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर नगर बाजार के पास झिरझिरवा पुल में पिछले पखवाड़े दरार पड़ गई थी। पुल के छत में दो से तीन सेंटीमीटर की गैपिंग आ गई थी। एनएचएआई के जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी। कुछ यात्रियों की नजर इस पर पड़ी तो लोग सकते में आ गए। तत्काल एनएचएआई को इसकी सूचना दी गई। तब जाकर जिम्मेदार हरकत में आए।
यात्री शेड बनाने के बाद वहां पहचान के लिए साइन बोर्ड नहीं लगाया गया, जिससे आम राहगीर जागरूकता के अभाव में इसका उपयोग नहीं कर सकें। अब निजी क्षेत्र के लोग इसका उपयोग कर रहे हैं।
-राम आशीष दुबे, खडऊवा।
एनएचएआई की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने सड़क की हर स्तर से सुरक्षा सुनिश्चित करें। इसके लिए नियमित निगरानी होनी चाहिए। ऐसा न होने से यात्री शेडों पर लोगों का कब्जा हो गया है।
-राम बउझ, बैजलपुर।
यात्री शेड कब्जा हो जाने से हम लोग सड़क के किनारे असुरक्षित होकर वाहनों का इंतजार करते हैं। सरकारी बस एवं अन्य यात्री वाहन सवारी बैठाने के लिए सड़क पर ही खड़े हो जा रहे हैं।
-सताक्षी श्रीवास्तव, चकदहा।
यात्री शेडों पर गाड़ी रुकने के लिए सड़क के किनारे जगह बनाया गया है। ताकि सवारी बैठाते समय दुर्घटना न होने पाए। मगर एनएचएआई की लापरवाही के चलते यह अनुपयोगी हो गए। अब बाजार में सवारी वाहन खड़े हो रहे हैं।
-राम गोपाल, कलवारी।
यात्री शेडों पर अतिक्रमण की जानकारी नहीं है। निरीक्षण कराकर सत्यता जांची जाएगी। यदि अतिक्रमण पाया गया तो कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को सूचित किया जाएगा।
-इं. भावेष अग्रवाल, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई।