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Basti News: सभी सीएचसी पर होगा नवजातों का इलाज, मां भी रहेगी साथ

Sat, 24 Oct 2026 02:40 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2026 02:40 AM IST
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Newborns will receive treatment at all CHCs, with their mothers staying alongside them.
परशुरामपुर में एनबीएसयू में भर्ती बच्चे की जांच करती स्टॉफ नर्स संवाद - फोटो : Archive
बस्ती। जन्म के बाद नवजातों को सांस लेने में परेशानी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होने पर अब इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। जिले के बचे 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर भी न्यूबॉर्न बेबी स्टेबलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) का संचालन शुरू हो गया है। तीन केंद्रों पर पहले से ही यह सुविधा उपलब्ध थी। यहां कम वजन वाले और बीमार नवजातों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। खास बात यह है कि इन यूनिटों में माताएं भी बच्चों के साथ रह सकेंगी और उन्हें स्तनपान करा सकेंगी।
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जिले में अब सभी 14 सीएचसी पर एनबीएसयू की सुविधा उपलब्ध है। हर्रैया, भानपुर और रुधौली में यह यूनिट पहले से संचालित थीं। परशुरामपुर, विक्रमजोत, गौर, कप्तानगंज, मरवटिया, बहादुरपुर, कुदरहा, बनकटी, सांऊघाट, सल्टौआ और दुबौलिया में नई यूनिट शुरू की गई हैं। हालांकि, दुबौलिया में संचालन को लेकर तकनीकी दिक्कत की बात भी सामने आई है।
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एनबीएसयू में ढाई किलोग्राम से कम वजन वाले और बीमार नवजातों को भर्ती करने की व्यवस्था है। यहां वार्मर मशीनों के जरिये बच्चों के शरीर का तापमान बनाए रखने के साथ उनकी निगरानी और उपचार किया जाता है। इसके लिए उपकरणों के साथ चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्टाफ नर्सों की तैनाती की गई है। माताओं के बैठने के लिए कुर्सियां और स्तनपान के लिए अलग कक्ष भी बनाया गया है।
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50 वार्मर और 27 फोटोथेरेपी मशीनें क्रियाशील
जिले की 14 सीएचसी के एनबीएसयू में 56 वार्मर मशीनें उपलब्ध हैं, जिनमें 50 क्रियाशील हैं। वहीं, 29 फोटोथेरेपी मशीनों में 27 काम कर रही हैं। विभाग के अनुसार, इसी माह शुरू हुई 11 नई यूनिटों में 312 नवजात भर्ती किए गए। इनमें 306 का उपचार किया गया, जबकि छह को बेहतर इलाज के लिए उच्च केंद्रों पर रेफर करना पड़ा।
जिला महिला अस्पताल में स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के साथ कंगारू मदर केयर (केएमसी) यूनिट भी है। मेडिकल कॉलेज में भी एसएनसीयू संचालित है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सीएचसी स्तर पर उपचार की सुविधा बढ़ने से गंभीर स्थिति में ही नवजातों को उच्च केंद्रों पर भेजना पड़ेगा। इससे परिजनों की भागदौड़ कम होगी और बड़े अस्पतालों की एसएनसीयू पर दबाव घटेगा।

कोट:::जिले के 11 अस्पतालों में एनबीएसयू का संचालन शुरू किया गया है। यहां कम वजन वाले और बीमार नवजातों के इलाज के साथ माताओं के ठहरने की व्यवस्था भी है, ताकि वे बच्चों की देखभाल और स्तनपान कर सकें। -डॉ. राजीव निगम, सीएमओ
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