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बस्ती: नए चेहरों के आने से रोचक हुई चुनावी जंग
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नए चेहरों के आने से रोचक हुई चुनावी जंग
बस्ती। नए चेहरों की एंट्री ने विधानसभा चुनाव को रोचक बना दिया है। बसपा ने जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर नए चेहरे उतारे हैं तो कांग्रेस ने तीन सीटों पर नए चेहरों पर भरोसा जताया है। वहीं, भाजपा और सपा ने एक-एक सीट पर नए चेहरे पर दांव लगाया है।
विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने 2017 का इतिहास दोहराने की चुनौती है। तब यहां की सभी पांच सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। चार सीटों पर बसपा ने कड़ी टक्कर दी थी तो एकमात्र सदर सीट पर सपा-कांग्रेस गठनबंधन दूसरे नंबर पर था। ऐसे में सपा, बसपा और कांग्रेस के सामने सियासी जमीन को विस्तार देने के साथ चुनाव जीत कर विधानसभा में प्रतिनिधित्व पाने की दोहरी चुनौती है। जिसके लिए राजनीतिक दलों ने नए चेहरों पर दांव खेला है। साथ ही जातीय और धार्मिक समीकरणों को साधने की भी जुगत भिड़ाई गई है। बहुजन समाज पार्टी ने जिले की चार सीटों पर नए चेहरे उतारे हैं। सदर विधानसभा सीट से आलोक रंजन वर्मा, कप्तानगंज से जहीर अहमद, रुधौली से अशोक मिश्रा और महादेवा सुरक्षित सीट से लक्ष्मीचंद्र खरवार को चुनावी मैदान में उतार कर सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले से मतदाताओं का ध्यान खींचने की कोशिश की है।
कांग्रेस ने सदर से देवेंद्र श्रीवास्तव, हर्रैया से महिला उम्मीदवार लबोनी सिंह और महादेवा सुरक्षित सीट से बृजेश आर्या को पहली बार टिकट देकर मैदान में उतारा है। समाजवादी पार्टी ने कप्तानगंज विधानसभा सीट से अतुल चौधरी पर भरोसा जताया है। अतुल पर जीत के साथ कप्तानगंज विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे पिता राम प्रसाद चौधरी की राजनैतिक विरासत को पाने की दोहरी चुनौती है। वहीं, भाजपा ने विधायक संजय प्रताप जायसवाल की पत्नी संगीता जायसवाल को मैदान में उतारा है। उन पर भी 2012 में कांग्रेस और 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने के साथ पति संजय प्रताप जायसवाल का सियासी कद बढ़ाने की चुनौती है।
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नौ में से आठ उम्मीदवार पहली बार लड़ रहे विस चुनाव
राजनीतिक दलों ने जिन नौ नए चेहरों पर दांव लगाया है, उनमें से एक को छोड़कर बाकी आठ पहली बार विधानसभा के चुनावी समर में किस्मत आजमाने उतरे हैं। एकमात्र कांग्रेस के देवेंद्र श्रीवास्तव 2002 के विधानसभा चुनाव में भी सदर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे थे।
2017 विधानसभा चुनाव के नतीजे
विधानसभा क्षेत्र, चुनाव जीते निकटतम प्रतिद्वंद्वी
हर्रैया, अजय कुमार सिंह (भाजपा) राजकिशोर सिंह (सपा)
कप्तानगंज, सीपी शुक्ला (भाजपा) राम प्रसाद चौधरी (बसपा)
रुधौली, संजय प्रताप जायसवाल (भाजपा) राजेंद्र प्रसाद चौधरी (बसपा)
बस्ती सदर, दयाराम चौधरी (भाजपा) महेंद्र नाथ यादव (सपा)
महादेवा सुरक्षित, रवि सोनकर (भाजपा) दूधराम (बसपा)
2012 विधानसभा चुनाव के नतीजे
विधानसभा क्षेत्र, चुनाव जीते निकटतम प्रतिद्वंद्वी
हर्रैया राजकिशोर सिंह (सपा) ममता पांडेय (बसपा)
कप्तानगंज राम प्रसाद चौधरी (बसपा) त्रयंबक पाठक (सपा)
रुधौली संजय प्रताप जायसवाल (कांग्रेस) राजेंद्र प्रसाद चौधरी (बसपा)
बस्ती सदर जितेंद्र कुमार (बसपा) अभिषेक पाल (कांग्रेस)
महादेवा सुरक्षित राम करन आर्या (सपा) दूधराम (बसपा)
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बस्ती। नए चेहरों की एंट्री ने विधानसभा चुनाव को रोचक बना दिया है। बसपा ने जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर नए चेहरे उतारे हैं तो कांग्रेस ने तीन सीटों पर नए चेहरों पर भरोसा जताया है। वहीं, भाजपा और सपा ने एक-एक सीट पर नए चेहरे पर दांव लगाया है।
विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने 2017 का इतिहास दोहराने की चुनौती है। तब यहां की सभी पांच सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। चार सीटों पर बसपा ने कड़ी टक्कर दी थी तो एकमात्र सदर सीट पर सपा-कांग्रेस गठनबंधन दूसरे नंबर पर था। ऐसे में सपा, बसपा और कांग्रेस के सामने सियासी जमीन को विस्तार देने के साथ चुनाव जीत कर विधानसभा में प्रतिनिधित्व पाने की दोहरी चुनौती है। जिसके लिए राजनीतिक दलों ने नए चेहरों पर दांव खेला है। साथ ही जातीय और धार्मिक समीकरणों को साधने की भी जुगत भिड़ाई गई है। बहुजन समाज पार्टी ने जिले की चार सीटों पर नए चेहरे उतारे हैं। सदर विधानसभा सीट से आलोक रंजन वर्मा, कप्तानगंज से जहीर अहमद, रुधौली से अशोक मिश्रा और महादेवा सुरक्षित सीट से लक्ष्मीचंद्र खरवार को चुनावी मैदान में उतार कर सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले से मतदाताओं का ध्यान खींचने की कोशिश की है।
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कांग्रेस ने सदर से देवेंद्र श्रीवास्तव, हर्रैया से महिला उम्मीदवार लबोनी सिंह और महादेवा सुरक्षित सीट से बृजेश आर्या को पहली बार टिकट देकर मैदान में उतारा है। समाजवादी पार्टी ने कप्तानगंज विधानसभा सीट से अतुल चौधरी पर भरोसा जताया है। अतुल पर जीत के साथ कप्तानगंज विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे पिता राम प्रसाद चौधरी की राजनैतिक विरासत को पाने की दोहरी चुनौती है। वहीं, भाजपा ने विधायक संजय प्रताप जायसवाल की पत्नी संगीता जायसवाल को मैदान में उतारा है। उन पर भी 2012 में कांग्रेस और 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने के साथ पति संजय प्रताप जायसवाल का सियासी कद बढ़ाने की चुनौती है।
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नौ में से आठ उम्मीदवार पहली बार लड़ रहे विस चुनाव
राजनीतिक दलों ने जिन नौ नए चेहरों पर दांव लगाया है, उनमें से एक को छोड़कर बाकी आठ पहली बार विधानसभा के चुनावी समर में किस्मत आजमाने उतरे हैं। एकमात्र कांग्रेस के देवेंद्र श्रीवास्तव 2002 के विधानसभा चुनाव में भी सदर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे थे।
2017 विधानसभा चुनाव के नतीजे
विधानसभा क्षेत्र, चुनाव जीते निकटतम प्रतिद्वंद्वी
हर्रैया, अजय कुमार सिंह (भाजपा) राजकिशोर सिंह (सपा)
कप्तानगंज, सीपी शुक्ला (भाजपा) राम प्रसाद चौधरी (बसपा)
रुधौली, संजय प्रताप जायसवाल (भाजपा) राजेंद्र प्रसाद चौधरी (बसपा)
बस्ती सदर, दयाराम चौधरी (भाजपा) महेंद्र नाथ यादव (सपा)
महादेवा सुरक्षित, रवि सोनकर (भाजपा) दूधराम (बसपा)
2012 विधानसभा चुनाव के नतीजे
विधानसभा क्षेत्र, चुनाव जीते निकटतम प्रतिद्वंद्वी
हर्रैया राजकिशोर सिंह (सपा) ममता पांडेय (बसपा)
कप्तानगंज राम प्रसाद चौधरी (बसपा) त्रयंबक पाठक (सपा)
रुधौली संजय प्रताप जायसवाल (कांग्रेस) राजेंद्र प्रसाद चौधरी (बसपा)
बस्ती सदर जितेंद्र कुमार (बसपा) अभिषेक पाल (कांग्रेस)
महादेवा सुरक्षित राम करन आर्या (सपा) दूधराम (बसपा)