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पुरानी करेंसी खपाने का केंद्र बना नेपाल
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Thu, 22 Mar 2018 11:46 PM IST
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कोतवाली क्षेत्र के प्लास्टिक काॅम्प्लेक्स के पास 1 करोड़ 11 लाख पुरानी नोटो के पांच लोग गिरफ्तार।
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। जिले में नेपाल के रास्ते गोरखपुर होते हुए चलन से बाहर हो चुकी भारतीय मुद्रा की खेप के पहुंचने का सिलसिला जारी है। आजमगढ़ के धंधेबाजों के लिए यह सबसे मुफीद रूट है। इसके पहले भी कई बार जाली नोटों के बरामदगी होती रही है लेकिन हर बार यही हुआ कि ‘कैरियर’ तो पकड़ में आए लेकिन रैकेट चलाने वाले आका हमेशा पुलिस की पकड़ से दूर रहे। हालांकि बृहस्पतिवार को एसपी दिलीप कुमार ने दावा किया कि जल्द ही गिरोह के संचालक भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
यह धंधा पूरी तरह से कमीशन पर आधारित होता है। कमीशन का प्रतिशत अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग होता है। सूत्रों की मानें तो वर्तमान में पाकिस्तान से नकली नोट बांग्लादेश और फिर नेपाल के रास्ते सोनौली अथवा अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों से भारत में पहुंच जाती है। गोरखपुर के रास्ते इसे आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर आदि जनपदों तक पहुंचाया जाता है। जिले में वर्ष 1991 में नकली नोटों के कारोबार की शुरुआत हुई। जिले के पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र इस कारोबार के केंद्र रहे। वर्ष 2000 के आसपास आजमगढ़ के सरायमीर थाना क्षेत्र के सिकरौर निवासी अब्दुल्ला नामक व्यक्ति को नकली नोटों के साथ मुबारकपुर क्षेत्र में पकड़ा गया था। वर्ष 2006 के आसपास फूलपुर कोतवाली क्षेत्र में चिड़ीमार गांव के पास छापा मारकर पुलिस ने प्रिंटर, स्याही, कंप्यूटर व करीब दो लाख रुपये के नकली नोट और ऐसे कागज बरामद किए थे जिन पर गांधी जी की तस्वीर छपी थी।
वर्ष 2011 से 2015 के बीच करीब आधा दर्जन लोग नकली नोट के साथ गिरफ्तार हो चुके हैं लेकिन इस कारोबार को चला कौन रहा है, आज तक पता नहीं चल सका है। अब बैंकों तक में इन धंधेबाजों की पहुंच हो गई है। एटीएम से भी नकली नोट निकलने की शिकायतें मिलती रहती हैं। सूत्रों की मानें तो नकली नोट दो तरह से छापे जाते थे। एक तो स्थानीय स्तर पर जो आसानी से पकड़ में आ जाते थे। इसके चलते स्थानीय स्तर पर नकली नोट छापने का धंधा समाप्त हो चुका है। अब यह धंधा विदेशी नकली नोटों पर केंद्रित हो गया है।
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यह धंधा पूरी तरह से कमीशन पर आधारित होता है। कमीशन का प्रतिशत अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग होता है। सूत्रों की मानें तो वर्तमान में पाकिस्तान से नकली नोट बांग्लादेश और फिर नेपाल के रास्ते सोनौली अथवा अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों से भारत में पहुंच जाती है। गोरखपुर के रास्ते इसे आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर आदि जनपदों तक पहुंचाया जाता है। जिले में वर्ष 1991 में नकली नोटों के कारोबार की शुरुआत हुई। जिले के पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र इस कारोबार के केंद्र रहे। वर्ष 2000 के आसपास आजमगढ़ के सरायमीर थाना क्षेत्र के सिकरौर निवासी अब्दुल्ला नामक व्यक्ति को नकली नोटों के साथ मुबारकपुर क्षेत्र में पकड़ा गया था। वर्ष 2006 के आसपास फूलपुर कोतवाली क्षेत्र में चिड़ीमार गांव के पास छापा मारकर पुलिस ने प्रिंटर, स्याही, कंप्यूटर व करीब दो लाख रुपये के नकली नोट और ऐसे कागज बरामद किए थे जिन पर गांधी जी की तस्वीर छपी थी।
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वर्ष 2011 से 2015 के बीच करीब आधा दर्जन लोग नकली नोट के साथ गिरफ्तार हो चुके हैं लेकिन इस कारोबार को चला कौन रहा है, आज तक पता नहीं चल सका है। अब बैंकों तक में इन धंधेबाजों की पहुंच हो गई है। एटीएम से भी नकली नोट निकलने की शिकायतें मिलती रहती हैं। सूत्रों की मानें तो नकली नोट दो तरह से छापे जाते थे। एक तो स्थानीय स्तर पर जो आसानी से पकड़ में आ जाते थे। इसके चलते स्थानीय स्तर पर नकली नोट छापने का धंधा समाप्त हो चुका है। अब यह धंधा विदेशी नकली नोटों पर केंद्रित हो गया है।
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