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बंट रही कांबिनेशन वाली दवा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Mar 2016 11:45 PM IST
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मानव शरीर पर प्रतिकूल असर के मद्देनजर इन फिक्स डोज कांबिनेशन ड्रग्स को बैन किया गया है।
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बस्ती। केंद्र सरकार की ओर से कंबिनेशन की 344 दवाओं की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध का सरकारी अस्पतालों पर कोई असर नहीं है। जिला अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में बुखार में दी जाने वाली प्लेन पैरासिटामाल की जगह आईबूप्रोफेन कांबिनेशन की दवा काउंटर से वितरित की जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि कांंबिनेशन की दवाओं की बिक्री रोकने के लिए औषधि निरीक्षक लगातार छापेमारी कर रहे हैं, लेकिन अस्पतालों की तरफ उनकी निगाह नहीं पड़ रही है। सीएमओ का कहना है कि सरकारी खरीद की दवाएं स्टोर में बहुत अधिक हैं। जब तक नई दवाएं नहीं आ जाती हैं तब तक इसको मरीजों को देना मजबूरी है।
कांबिनेशन की दवाओं पर प्रतिबंध के बाद थोक व फुटकर बाजार में खलबली मची है। जो दवाएं मार्केट में पहुंच गई हैं उनकी वापसी के लिए दबाव पड़ रहा है। इसको देखते हुए बस्ती केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी गुरुवार को बैठक कर इसकी बिक्री नहीं करने का निर्णय लिया। इसके बाद भी औषधि निरीक्षक डॉ अवधेश कुमार बाजार में लगातार छापेमारी कर रहे हैं।
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दूसरी ओर जिला अस्पताल के काउंटर से कांबिनेशन की दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं। कारण कि बुखार में दी जाने वाली प्लेन पैरासिटामाल यहां है ही नहीं। इसके अलावा एजिथ्रोमाइसिन, पेंटाप्रोजाल, आबूपैरासिटामाल और सिफैक्सिन आर्निडाजॉल नाम की कंबिनेशन वाली दवाएं सरकारी अस्पताल के काउंटर से मरीजों को दी जा रही हैं।
इस बारे में औषधि निरीक्षक डॉ अवधेश और जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ आरकेश ने बताया कि स्टाक में पर्याप्त मात्रा में पहले की दवाएं पड़ी हैं। अचानक सारी कंबिनेशन की दवाएं हटा देने से मरीजों के लिए दिक्कत खड़ी हो सकती है। इसलिए नया स्टॉक आने तक पूर्व की दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं।
औषधि निरीक्षक ने बताया कि सरकारी स्टॉक से भी प्रतिबंधित कंबिनेशन वाली दवाएं हटाकर प्लेन या सिंगल कंपोनेंट की दवा मरीजों को देने का निर्देश शासन और डीजी हेल्थ ने दिया है। इसका अनुपालन कराने में वक्त लगेगा।
दोहरा मानदंड ठीक नहीं : बीसीडीए
निजी दुकानों पर छापेमारी कर दुकानदारों पर दबाव बनाने को बीसीडीए के पदाधिकारियों ने गलत बताया। बीसीडीए के जिलाध्यक्ष राजेश सिंह ने कहा कि हमने तो केंद्र सरकार की ओर से कंबिनेशन की जिन दवाओं की बिक्री रोकी गई हैं, उस पर अमल शुरू कर दिया है। बैठक कर होलसेल व फुटकर दवा कमेटी को जनहित में ऐसी दवाएं न बेचने को कह दिया गया। लेकिन नियमों को सरकारी अस्पतालों पर भी लागू कराना चाहिए। दवा विक्रेताओं का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।
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हैरानी की बात यह है कि कांंबिनेशन की दवाओं की बिक्री रोकने के लिए औषधि निरीक्षक लगातार छापेमारी कर रहे हैं, लेकिन अस्पतालों की तरफ उनकी निगाह नहीं पड़ रही है। सीएमओ का कहना है कि सरकारी खरीद की दवाएं स्टोर में बहुत अधिक हैं। जब तक नई दवाएं नहीं आ जाती हैं तब तक इसको मरीजों को देना मजबूरी है।
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कांबिनेशन की दवाओं पर प्रतिबंध के बाद थोक व फुटकर बाजार में खलबली मची है। जो दवाएं मार्केट में पहुंच गई हैं उनकी वापसी के लिए दबाव पड़ रहा है। इसको देखते हुए बस्ती केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी गुरुवार को बैठक कर इसकी बिक्री नहीं करने का निर्णय लिया। इसके बाद भी औषधि निरीक्षक डॉ अवधेश कुमार बाजार में लगातार छापेमारी कर रहे हैं।
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दूसरी ओर जिला अस्पताल के काउंटर से कांबिनेशन की दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं। कारण कि बुखार में दी जाने वाली प्लेन पैरासिटामाल यहां है ही नहीं। इसके अलावा एजिथ्रोमाइसिन, पेंटाप्रोजाल, आबूपैरासिटामाल और सिफैक्सिन आर्निडाजॉल नाम की कंबिनेशन वाली दवाएं सरकारी अस्पताल के काउंटर से मरीजों को दी जा रही हैं।
इस बारे में औषधि निरीक्षक डॉ अवधेश और जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ आरकेश ने बताया कि स्टाक में पर्याप्त मात्रा में पहले की दवाएं पड़ी हैं। अचानक सारी कंबिनेशन की दवाएं हटा देने से मरीजों के लिए दिक्कत खड़ी हो सकती है। इसलिए नया स्टॉक आने तक पूर्व की दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं।
औषधि निरीक्षक ने बताया कि सरकारी स्टॉक से भी प्रतिबंधित कंबिनेशन वाली दवाएं हटाकर प्लेन या सिंगल कंपोनेंट की दवा मरीजों को देने का निर्देश शासन और डीजी हेल्थ ने दिया है। इसका अनुपालन कराने में वक्त लगेगा।
दोहरा मानदंड ठीक नहीं : बीसीडीए
निजी दुकानों पर छापेमारी कर दुकानदारों पर दबाव बनाने को बीसीडीए के पदाधिकारियों ने गलत बताया। बीसीडीए के जिलाध्यक्ष राजेश सिंह ने कहा कि हमने तो केंद्र सरकार की ओर से कंबिनेशन की जिन दवाओं की बिक्री रोकी गई हैं, उस पर अमल शुरू कर दिया है। बैठक कर होलसेल व फुटकर दवा कमेटी को जनहित में ऐसी दवाएं न बेचने को कह दिया गया। लेकिन नियमों को सरकारी अस्पतालों पर भी लागू कराना चाहिए। दवा विक्रेताओं का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।