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भारत बंद का मिला-जुला असर रहा
basti
Updated Mon, 02 Apr 2018 11:34 PM IST
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प्रदर्शन करते आंबेडकर वादी।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती।
भीम आर्मी सहित विभिन्न आंबेडकरवादी संगठनों के भारत बंद आह्वान का मिला-जुला असर शहर सहित ग्रामीणांचलों में रहा। प्रदर्शनकारियों को देखते ही कई ने दुकान बंद कर दी, मगर जैसे ही वे हटे फिर से दुकानें खुल गईं। दिन भर इसका क्रम जारी रहा। इधर, भीम सेना ने बंदी का सफल बताया है।
सोमवार सुबह बड़ी संख्या में आंदोलनकारी कटेश्वरपार्क में एकत्रित हुए। यहां डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद जुलूस निकाला। जुलूस पक्के, गांधीनगर, कंपनीबाग होते शास्त्री चौक पहुंचा। जहां सभा की गई। इसके बाद कलेक्ट्रेट पर पहुंचकर ज्ञापन दिया।
एससी/एसटी एक्ट को निष्प्रभावी करने और डॉ. अंबेडकर प्रतिमा तोड़े जाने के विरोध में भीम आर्मी व विभिन्न आंबेडकरवादी संगठनों ने विरोध में भारत बंद का एलान किया था। इसी कड़ी में बस्ती बंदी को लेकर तैयारी हुई थी। बंदी का मिला-जुला असर रहा। तमाम दुकानें जहां खुली रहीं वहीं कई बंद भी रहीं, मगर शाम होते ही सब कुछ सामान्य हो गया। बंदी की घोषणा भीम आर्मी और उसके दस संगठनों ने किया था। प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में उच्च न्यायालय से मांग की गई कि एससी/एसटी एक्ट को मूल रूप से लागू करे। केंद्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को निष्प्रभावी बनाते हुए संसद के दोनों सदनों में विधेयक लाकर कानून बनाए, जिससे इस वर्ग का संरक्षण हो सके। डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने के मामले में कड़ा रुख अख्तियार कर दोषियों को फांसी दी जाए। डीएम की अनुपस्थिति में ज्ञापन एसडीएम सदर हरिश्चंद्र सिंह ने लिया। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमलेश सचान ने बताया कि बंदी सफल रही। डॉ. अंाबेडकर के सम्मान में व्यापार मंडल और अधिवक्ता संगठनों ने बंदी का समर्थन किया। इस मौके पर जिलाध्यक्ष के अलावा बुद्धि प्रकाश, प्रमोद कुमार, आशीष नारायण भारतीय, बौद्ध नायब पटेल, शैैलेंद्र बौद्ध, रामसेवक, हृदय गौतम, सरोज गौतम, राहुल राज, शिवराम कन्नौजिया सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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धरना चार को
बस्ती। एससी/एसटी एक्ट में समर्थन में बहुजन क्रांति मोर्चा सहित अन्य आंबेडकरवादी संगठन चार अप्रैल को कलेक्ट्रेट पर धरना देंगे। धरना 11 बजे से पांच बजे शाम तक होगा। यह जानकारी मोर्चा के जिला प्रभारी विजय प्रताप विक्रम ने दी है।
एसडीएम को दिया मांग पत्र
बस्ती। दलित शोषण मुक्ति मंच ने उच्चतम न्यायालय के एससी/एसटी एक्ट को निष्प्रभावी किए जाने के फैसले के विरोध में सोमवार को तीन सूत्री मांगपत्र एसडीएम सदर हरिश्चंद्र सिंह को दिया। ज्ञापन देने वालों में मंच के संयोजक सत्यराम, शेषमणि, सियाराम सोनकर, राम प्रकाश, शिवचरन, विनोद कुमार, उर्मिला चौधरी आदि मौजूद रहे।
जीआरपी और आरपीएफ रही चौकन्नी
बस्ती। भीम आर्मी और आंबेडकरवादी संगठनों के भारत बंद के आह्वान को लेकर जीआरपी और आरपीएफ चौकन्नी रही। क्योंकि यह आशंका थी कि प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशन पहुंच कर ट्रेनों का आवागमन बाधित कर सकते हैं। इन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुबह से ही रेलवे पुलिस की पैनी नजर प्रदर्शनकारियों पर थी। जीआरपी और आरपीएफ की सक्रियता के चलते प्रदर्शनकारी जिले भर में कहीं भी ट्रेनों का संचलन बाधित नहीं कर सके। देर शाम प्रदर्शन समाप्त होने पर रेलवे पुलिस ने राहत की सांस ली। जीआरपी इंस्पेक्टर रामकृष्ण मिश्र ने बताया कि कहीं भी प्रदर्शनकारी ट्रेन नहीं रोके। दिन भर रेलवे पुलिस फोर्स और राजकीय रेलवे पुलिस स्टेशनों पर नजर जमाए हुई थी।
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भीम आर्मी सहित विभिन्न आंबेडकरवादी संगठनों के भारत बंद आह्वान का मिला-जुला असर शहर सहित ग्रामीणांचलों में रहा। प्रदर्शनकारियों को देखते ही कई ने दुकान बंद कर दी, मगर जैसे ही वे हटे फिर से दुकानें खुल गईं। दिन भर इसका क्रम जारी रहा। इधर, भीम सेना ने बंदी का सफल बताया है।
सोमवार सुबह बड़ी संख्या में आंदोलनकारी कटेश्वरपार्क में एकत्रित हुए। यहां डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद जुलूस निकाला। जुलूस पक्के, गांधीनगर, कंपनीबाग होते शास्त्री चौक पहुंचा। जहां सभा की गई। इसके बाद कलेक्ट्रेट पर पहुंचकर ज्ञापन दिया।
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एससी/एसटी एक्ट को निष्प्रभावी करने और डॉ. अंबेडकर प्रतिमा तोड़े जाने के विरोध में भीम आर्मी व विभिन्न आंबेडकरवादी संगठनों ने विरोध में भारत बंद का एलान किया था। इसी कड़ी में बस्ती बंदी को लेकर तैयारी हुई थी। बंदी का मिला-जुला असर रहा। तमाम दुकानें जहां खुली रहीं वहीं कई बंद भी रहीं, मगर शाम होते ही सब कुछ सामान्य हो गया। बंदी की घोषणा भीम आर्मी और उसके दस संगठनों ने किया था। प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में उच्च न्यायालय से मांग की गई कि एससी/एसटी एक्ट को मूल रूप से लागू करे। केंद्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को निष्प्रभावी बनाते हुए संसद के दोनों सदनों में विधेयक लाकर कानून बनाए, जिससे इस वर्ग का संरक्षण हो सके। डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने के मामले में कड़ा रुख अख्तियार कर दोषियों को फांसी दी जाए। डीएम की अनुपस्थिति में ज्ञापन एसडीएम सदर हरिश्चंद्र सिंह ने लिया। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमलेश सचान ने बताया कि बंदी सफल रही। डॉ. अंाबेडकर के सम्मान में व्यापार मंडल और अधिवक्ता संगठनों ने बंदी का समर्थन किया। इस मौके पर जिलाध्यक्ष के अलावा बुद्धि प्रकाश, प्रमोद कुमार, आशीष नारायण भारतीय, बौद्ध नायब पटेल, शैैलेंद्र बौद्ध, रामसेवक, हृदय गौतम, सरोज गौतम, राहुल राज, शिवराम कन्नौजिया सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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धरना चार को
बस्ती। एससी/एसटी एक्ट में समर्थन में बहुजन क्रांति मोर्चा सहित अन्य आंबेडकरवादी संगठन चार अप्रैल को कलेक्ट्रेट पर धरना देंगे। धरना 11 बजे से पांच बजे शाम तक होगा। यह जानकारी मोर्चा के जिला प्रभारी विजय प्रताप विक्रम ने दी है।
एसडीएम को दिया मांग पत्र
बस्ती। दलित शोषण मुक्ति मंच ने उच्चतम न्यायालय के एससी/एसटी एक्ट को निष्प्रभावी किए जाने के फैसले के विरोध में सोमवार को तीन सूत्री मांगपत्र एसडीएम सदर हरिश्चंद्र सिंह को दिया। ज्ञापन देने वालों में मंच के संयोजक सत्यराम, शेषमणि, सियाराम सोनकर, राम प्रकाश, शिवचरन, विनोद कुमार, उर्मिला चौधरी आदि मौजूद रहे।
जीआरपी और आरपीएफ रही चौकन्नी
बस्ती। भीम आर्मी और आंबेडकरवादी संगठनों के भारत बंद के आह्वान को लेकर जीआरपी और आरपीएफ चौकन्नी रही। क्योंकि यह आशंका थी कि प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशन पहुंच कर ट्रेनों का आवागमन बाधित कर सकते हैं। इन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुबह से ही रेलवे पुलिस की पैनी नजर प्रदर्शनकारियों पर थी। जीआरपी और आरपीएफ की सक्रियता के चलते प्रदर्शनकारी जिले भर में कहीं भी ट्रेनों का संचलन बाधित नहीं कर सके। देर शाम प्रदर्शन समाप्त होने पर रेलवे पुलिस ने राहत की सांस ली। जीआरपी इंस्पेक्टर रामकृष्ण मिश्र ने बताया कि कहीं भी प्रदर्शनकारी ट्रेन नहीं रोके। दिन भर रेलवे पुलिस फोर्स और राजकीय रेलवे पुलिस स्टेशनों पर नजर जमाए हुई थी।