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Basti News: अपनी और दूसरों की जान खतरे में डाल रहे नाबालिक ई-रिक्शा चालक

Sat, 09 Dec 2023 11:26 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 09 Dec 2023 11:26 PM IST
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Minor e-rickshaw drivers are putting their own and others' lives in danger
बस्ती। आजकल शहर में ई- रिक्शा की भरमार हो गई है। गली- मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों तक आपको कदम- कदम पर ई-रिक्शा वाले मिल जाएंगे। पक्के, कचहरी, कटरा, मालवीय मार्ग, रोडवेज, अस्पताल चौराहा, रेलवे स्टेशन, पांडेय बाजार, करूआ बाबा चौक समेत हर चौक-चौराहे, बाजार में ई-रिक्शा चालकों में सवारी के लिए प्रतिस्पर्धा होती रहती है। सवारी के लालच में रेस लगाने वाले इन ई-रिक्शा वालों की वजह से कई बार लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। क्योंकि ई-रिक्शा वाले न नियम मानते हैं और कायदे-कानून का पालन करते हैं। वैसे भी काफी संख्या में नाबालिक सड़कों पर ई-रिक्शा दौड़ा रहे हैं। उन्हें नियम की जानकारी भी नहीं होती। जहां इच्छा वाहन रोक देते हैं और जहां मर्जी सवारी भरने लगते हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही से इन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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बिना गियर के बटन से स्टार्ट होने वाले ई-रिक्शा केवल एक्सीलेटर से चलता है। 14 से 17 साल तक के किशोर इन वाहनों को सड़क पर दौड़ा रहे हैं। इनमें सवारी भरने की होड़ मची रहती है। सवारी उतारने और बैठाने के लिए दाहिने- बाए कट मारना इनकी आदत में शुमार है। इनके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस हैं और न ही नियम कायदे की कोई जानकारी। ये किशोर पूरी मस्ती में वाहन चला रहे हैं। अचानक लेन बदलना या फिर ब्रेक लगाना इनका शगल हो गया है। इस दौरान ई- रिक्शा में बैठे यात्री और अगल- बगल चलने वाले अन्य राहगीरों की सांसें थम जाती हैं।
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राहगीरों से होती हैं अक्सर झड़प
सड़क पर चलते समय कार, आटो, बाइक सवार लोगों की ई- रिक्शा के अव्यस्क चालकों से अक्सर झड़प होती है। उनके अनियमित चलने के दौरान अन्य वाहनों के चालक भी खतरे में पड़ जाते हैं। मुसीबत से उबरने के तुरंत बाद ई- रिक्शा के अव्यस्क चालक पर नाराज हो पड़ते हैं। ऐसा वाकया कहीं न कहीं अक्सर देखने को मिल रहा है। कभी- कभी तो ई- रिक्शा में बैठे यात्री खुद चालक के मनमाने रवैये पर नाराज हो जाते हैं।
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चार हजार ई-रिक्शाें का हुआ पंजीयन
ई-रिक्शा के चलन के शुरूआती दौर में तो इनका पंजीयन नहीं हो रहा था। मगर तेजी से बढ़ी बिक्री के चलते परिवहन विभाग से इनका भी पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। इधर दो से तीन सालों के अंदर जिले में चार हजार ई- रिक्शा का पंजीयन हो चुका है। इसके अलावा लगभग इतने ही संख्या में बिना पंजीयन के पुराने ई- रिक्शा है।
जिम्मेदार भी नहीं देते हैं ध्यान
शहर में अव्यस्कों द्वारा चलाए जा रहे ई- रिक्शा पर पुलिस विभाग, नगर पालिका एवं प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसीलिए बेरोकटोक किशोर ई- रिक्शा के साथ इधर- उधर चहलकदमी करते दिख रहे हैं। कम उम्र में पैसे कमाने की ख्वाहिश में कुछ किशोर नशे के लती भी हो रहे हैं। तरह- तरह के मादक पदार्थों का सेवन कर ई-रिक्शा चला रहे हैं।



ई- रिक्शा चलाने के लिए भी ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य हैं। अव्यस्क लोग सड़कों पर किसी प्रकार का वाहन नहीं चला सकते हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
-कामेश्वर सिंह, प्रभारी निरीक्षक, यातायात

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