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सिंचाई के लिए उपयोगी साबित नहीं हो रही हैं नहरें
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सिंचाई के लिए उपयोगी साबित नहीं हो रही हैं नहरें
बभनान (बस्ती)। खेतों की सिंचाई के लिए रजवाहों से माइनर निकाले गए हैं। लेकिन, क्षेत्र के तमाम माइनरों में आज तक पानी नहीं पहुंचा। लिहाजा किसानों का नहरों से सिंचाई का सपना, सपना ही रह गया। वे खेतों की सिंचाई के लिए आज भी निजी स्रोतों पर निर्भर हैं। जो महंगाई में कृषि लागत बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।
सरयू नहर खंड चार गोंडा से जनपद के गौर ब्लॉक के सोनहटी गांव से टिनिच रजवाहा गुजरता है। इससे कई माइनर निकलते हैं। करीब महीनाभर पूर्व टिनिच रजवाहे में पानी छोड़ा गया था लेकिन नहर का निर्माण पूरा ना होने के कारण पानी इधर उधर बहने लगा। इसके बाद पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। जिससे रहवाहे से जुड़े माइनरों में पानी नहीं पहुंच सका। पिछले साल नहर खंड ने सिल्ट सफाई के नाम पर जिलेभर के रहवाजे और माइनरों को ठीक कराने का काम किया था। इसके बावजूद सभी आज भी सूखे पड़े हैं। जो विभाग द्वारा कराए गए कार्यों पर तमाम प्रश्न खड़े करते हैं। क्षेत्रीय किसान जीत बहादुर सिंह, रामानंद, कमलेश कुमार, विनय कुमार, राम शंकर, मधुसूदन, अनिल कुमार, अशोक कुमार आदि ने बताया कि नहरों का जाल बिछा दिया गया है। लेकिन सब बेमतलब साबित हो रहे हैं। बिना पानी के नहरें सिर्फ एक गड्ढा हैं। जिसमें लोग कूड़ कचरा फेंकते हैं। किसानों के लिए ये नहरें कभी उपयोगी नहीं होंगी। सरजू नहर खंड चार एसडीओ अमित कुमार ने बताया कि खरीफ के सीजन में नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा।
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बभनान (बस्ती)। खेतों की सिंचाई के लिए रजवाहों से माइनर निकाले गए हैं। लेकिन, क्षेत्र के तमाम माइनरों में आज तक पानी नहीं पहुंचा। लिहाजा किसानों का नहरों से सिंचाई का सपना, सपना ही रह गया। वे खेतों की सिंचाई के लिए आज भी निजी स्रोतों पर निर्भर हैं। जो महंगाई में कृषि लागत बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।
सरयू नहर खंड चार गोंडा से जनपद के गौर ब्लॉक के सोनहटी गांव से टिनिच रजवाहा गुजरता है। इससे कई माइनर निकलते हैं। करीब महीनाभर पूर्व टिनिच रजवाहे में पानी छोड़ा गया था लेकिन नहर का निर्माण पूरा ना होने के कारण पानी इधर उधर बहने लगा। इसके बाद पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। जिससे रहवाहे से जुड़े माइनरों में पानी नहीं पहुंच सका। पिछले साल नहर खंड ने सिल्ट सफाई के नाम पर जिलेभर के रहवाजे और माइनरों को ठीक कराने का काम किया था। इसके बावजूद सभी आज भी सूखे पड़े हैं। जो विभाग द्वारा कराए गए कार्यों पर तमाम प्रश्न खड़े करते हैं। क्षेत्रीय किसान जीत बहादुर सिंह, रामानंद, कमलेश कुमार, विनय कुमार, राम शंकर, मधुसूदन, अनिल कुमार, अशोक कुमार आदि ने बताया कि नहरों का जाल बिछा दिया गया है। लेकिन सब बेमतलब साबित हो रहे हैं। बिना पानी के नहरें सिर्फ एक गड्ढा हैं। जिसमें लोग कूड़ कचरा फेंकते हैं। किसानों के लिए ये नहरें कभी उपयोगी नहीं होंगी। सरजू नहर खंड चार एसडीओ अमित कुमार ने बताया कि खरीफ के सीजन में नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा।
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