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मार्च में मई जैसी गर्मी, फसलों पर संकट के बादल
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मार्च में मई जैसी गर्मी, फसलों पर संकट के बादल
बस्ती। मार्च का महीना बीतने में अभी सप्ताह भर से ज्यादा समय बचा है, लेकिन अभी से मई जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। वैसे तो मौसम विभाग लगातार कह रहा है कि इस बार गर्मी ज्यादा पड़ सकती है। मगर मार्च में ही इस कदर बढ़ जाएगी, इसका अनुमान किसी को नहीं था।
जानकारों का कहना है कि तापमान बढ़ोत्तरी की गति यूं ही बनी रही तो अप्रैल के पहले सप्ताह में ही पारा 40 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा छू लेगा जो सामान्य से करीब 07.9 डिग्री सेल्सियस अधिक है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 21 डिग्री और अधिकतम 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अभी से इतनी गर्मी पड़ते देख किसानों के चेहरे मुरझाने लगे हैं। रबी की फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉक्टर अमरनाथ मिश्र के मुताबिक इसका सबसे प्रमुख कारण एंटी साइक्लोन है। राजस्थान में जो एंटी साइक्लोन आमतौर पर मार्च के आखिर में बनता था, वह इस बार जल्दी बन गया है। पश्चिमी विक्षोभ भी निष्क्रिय है। इसके कारण थार मरुस्थल और पाकिस्तान से गर्म हवाएं अभी से आने लगी हैं, जो तापमान को लगातार बढ़ा रही हैं। अभी इसके बढ़ते रहने की आशंका है।
क्या है एंटी साइक्लोन
एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन का मतलब असल में हवा का बिखरना है। एंटी-साइक्लोन में हवा की दिशाएं साइक्लोनिक हवाओं की दिशा के विपरीत होती हैं। साइक्लोनिक सर्कुलेशन में कम दबाव (लो प्रेशर) का क्षेत्र बनता है और हवाएं आपस में मिलकर उठती हैं। वहीं, एंटी-साइक्लोनिक साइक्लोनिक सर्कुलेशन में उच्च दाब (हाई-प्रेशर) एरिया बनता है जिसमें हवाएं बिरखती हैं और नीचे गिरती हैं। एंटी साइक्लोन के बीच के हिस्से में हाई-प्रेशर के चलते एक तेज हवा का ब्लास्ट ऊपर से नीचे की तरफ होता है और गर्म हवाएं नीचे आती हैं। हवा पर दबाव ज्यादा होने की वजह से वह और गर्म होती है और उसकी नमी भी कम होती है।
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फसलों पर प्रभाव
- तेजी से चढ़ रहे पारे से किसानों को फसल खराब होने का डर सता रहा है। किसानों का कहना है कि तेज गर्मी और बढ़ते तापमान में गेहूं समय से पहले पक सकता है। यदि खेतों में नमी कम हो जाती है तो गेहूं का दाना सिकुड़ सकता है और उत्पादन कम होने की आशंका है। कृषि रक्षा विशेषज्ञ अजय कुमार तिवारी का कहना है कि गेहूं का दाना सामान्य तापमान में पकता है। वे कहते हैं कि जब गर्मी अधिक होती है, तो अनाज न तो अच्छी तरह से फूलता है और न ही ठीक से पकता है। अधपके और सख्त अनाज के कारण गेहूं का स्वाद कम हो जाता है और पौष्टिकता भी कम हो सकती है।
गर्मी में स्वास्थ्य का रखें ख्याल
- जूस, खूब पानी पिएं और छोटे ठंडे भोजन जैसे सलाद और फल खाएं ।
- सूती जैसे प्राकृतिक रेशों से बने हल्के रंग के, ढीले ढाले कपड़े पहनें।
- धूप से दूर रहें। अगर आपको बाहर जाना है, तो सनस्क्रीन लगाएं, टोपी पहनें, छतरी का इस्तेमाल करें।
- गर्मी के आसपास अपने दिन की योजना बनाएं, सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच बाहर जाने से बचें।
- गीले तौलिये या ठंडे पैक को अपनी बाहों या गर्दन पर रखें या अपने पैरों को ठंडे पानी में डालें।
- शारीरिक गतिविधि कम से कम करें, घर के सभी काम सुबह जल्दी करें जब यह सबसे ठंडा हो।
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बस्ती। मार्च का महीना बीतने में अभी सप्ताह भर से ज्यादा समय बचा है, लेकिन अभी से मई जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। वैसे तो मौसम विभाग लगातार कह रहा है कि इस बार गर्मी ज्यादा पड़ सकती है। मगर मार्च में ही इस कदर बढ़ जाएगी, इसका अनुमान किसी को नहीं था।
जानकारों का कहना है कि तापमान बढ़ोत्तरी की गति यूं ही बनी रही तो अप्रैल के पहले सप्ताह में ही पारा 40 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा छू लेगा जो सामान्य से करीब 07.9 डिग्री सेल्सियस अधिक है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 21 डिग्री और अधिकतम 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अभी से इतनी गर्मी पड़ते देख किसानों के चेहरे मुरझाने लगे हैं। रबी की फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉक्टर अमरनाथ मिश्र के मुताबिक इसका सबसे प्रमुख कारण एंटी साइक्लोन है। राजस्थान में जो एंटी साइक्लोन आमतौर पर मार्च के आखिर में बनता था, वह इस बार जल्दी बन गया है। पश्चिमी विक्षोभ भी निष्क्रिय है। इसके कारण थार मरुस्थल और पाकिस्तान से गर्म हवाएं अभी से आने लगी हैं, जो तापमान को लगातार बढ़ा रही हैं। अभी इसके बढ़ते रहने की आशंका है।
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क्या है एंटी साइक्लोन
एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन का मतलब असल में हवा का बिखरना है। एंटी-साइक्लोन में हवा की दिशाएं साइक्लोनिक हवाओं की दिशा के विपरीत होती हैं। साइक्लोनिक सर्कुलेशन में कम दबाव (लो प्रेशर) का क्षेत्र बनता है और हवाएं आपस में मिलकर उठती हैं। वहीं, एंटी-साइक्लोनिक साइक्लोनिक सर्कुलेशन में उच्च दाब (हाई-प्रेशर) एरिया बनता है जिसमें हवाएं बिरखती हैं और नीचे गिरती हैं। एंटी साइक्लोन के बीच के हिस्से में हाई-प्रेशर के चलते एक तेज हवा का ब्लास्ट ऊपर से नीचे की तरफ होता है और गर्म हवाएं नीचे आती हैं। हवा पर दबाव ज्यादा होने की वजह से वह और गर्म होती है और उसकी नमी भी कम होती है।
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फसलों पर प्रभाव
- तेजी से चढ़ रहे पारे से किसानों को फसल खराब होने का डर सता रहा है। किसानों का कहना है कि तेज गर्मी और बढ़ते तापमान में गेहूं समय से पहले पक सकता है। यदि खेतों में नमी कम हो जाती है तो गेहूं का दाना सिकुड़ सकता है और उत्पादन कम होने की आशंका है। कृषि रक्षा विशेषज्ञ अजय कुमार तिवारी का कहना है कि गेहूं का दाना सामान्य तापमान में पकता है। वे कहते हैं कि जब गर्मी अधिक होती है, तो अनाज न तो अच्छी तरह से फूलता है और न ही ठीक से पकता है। अधपके और सख्त अनाज के कारण गेहूं का स्वाद कम हो जाता है और पौष्टिकता भी कम हो सकती है।
गर्मी में स्वास्थ्य का रखें ख्याल
- जूस, खूब पानी पिएं और छोटे ठंडे भोजन जैसे सलाद और फल खाएं ।
- सूती जैसे प्राकृतिक रेशों से बने हल्के रंग के, ढीले ढाले कपड़े पहनें।
- धूप से दूर रहें। अगर आपको बाहर जाना है, तो सनस्क्रीन लगाएं, टोपी पहनें, छतरी का इस्तेमाल करें।
- गर्मी के आसपास अपने दिन की योजना बनाएं, सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच बाहर जाने से बचें।
- गीले तौलिये या ठंडे पैक को अपनी बाहों या गर्दन पर रखें या अपने पैरों को ठंडे पानी में डालें।
- शारीरिक गतिविधि कम से कम करें, घर के सभी काम सुबह जल्दी करें जब यह सबसे ठंडा हो।