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तीसरी लहर में भी आशा निभाएंगी खास भूमिका
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तीसरी लहर में भी आशा निभाएंगी खास भूमिका
सतर्कता : बाहर से आने वालों की ट्रेसिंग और व टेस्टिंग की है जिम्मेदारी
- ग्राम निगरानी समिति में आशा का होता है अहम रोल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। समुदाय व स्वास्थ्य विभाग के बीच की अहम कड़ी आशा वर्कर्स की एक बार फिर ओमिक्रॉन की लहर में अहम भूमिका होगी। बाहर से आने वालों की ट्रेसिंग से लेकर टेस्टिंग तक की जिम्मेदारी आशा की होगी। ग्राम निगरानी समिति में आशा अहम रोल निभाती हैं। कोविड की दूसरी लहर में आशा वर्कर्स की सक्रियता से ही संक्रमण के बड़े पैमाने पर फैलाव को रोका जा सका था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से फिर से निगरानी समितियों को सक्रिय करने के साथ ही आशा को संवेदीकृत किया जा रहा है।
जिले में वर्तमान में 1210 निगरानी समितियां काम कर रही हैं। समिति में आशा नियमित रूप से सक्रिय हैं। पिछले दिनों प्रदेश शासन ने नाइट कर्फ्यू की घोषणा के साथ ही जिले की निगरानी समितियों को सक्रिय करने का निर्देश दिया है। एसीएमओ डॉ. एफ हुसैन ने बताया कि कोविड की रोकथाम में निगरानी समितियों विशेषकर आशा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आशा को निर्देशित किया गया है कि विदेश या गैर प्रांत से कोई प्रवासी उनके गांव में आता है तो इसकी सूचना तत्काल ब्लॉक के प्रभारी चिकित्साधिकारी को दें। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में जाकर प्रवासी की कोविड जांच करेगी। आशा को यह भी निर्देशित किया गया है कि प्रवासी के स्वास्थ्य पर नजर रखें तथा किसी तरह की समस्या होने पर सूचना अधिकारियों को दे। इस समय विदेश विशेषकर हाई रिस्क वाले देशों से आने वालों से ओमिक्रॉन फैलने का खतरा है। ऐसे में आशा की सजगता से इसे रोका जा सकता है।
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टीकाकरण में निभा रही जिम्मेदारी
कोविड टीकाकरण में आशा अहम जिम्मेदारी निभा रही है। आशा गांव में टीके से छूटे हुए लोगों की सूची तैयार कर रही है। टीकाकरण शिविर लगने पर वह उन लोगों को सूचित करने के साथ ही उन्हें टीका लगवाने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।
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सतर्कता : बाहर से आने वालों की ट्रेसिंग और व टेस्टिंग की है जिम्मेदारी
- ग्राम निगरानी समिति में आशा का होता है अहम रोल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। समुदाय व स्वास्थ्य विभाग के बीच की अहम कड़ी आशा वर्कर्स की एक बार फिर ओमिक्रॉन की लहर में अहम भूमिका होगी। बाहर से आने वालों की ट्रेसिंग से लेकर टेस्टिंग तक की जिम्मेदारी आशा की होगी। ग्राम निगरानी समिति में आशा अहम रोल निभाती हैं। कोविड की दूसरी लहर में आशा वर्कर्स की सक्रियता से ही संक्रमण के बड़े पैमाने पर फैलाव को रोका जा सका था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से फिर से निगरानी समितियों को सक्रिय करने के साथ ही आशा को संवेदीकृत किया जा रहा है।
जिले में वर्तमान में 1210 निगरानी समितियां काम कर रही हैं। समिति में आशा नियमित रूप से सक्रिय हैं। पिछले दिनों प्रदेश शासन ने नाइट कर्फ्यू की घोषणा के साथ ही जिले की निगरानी समितियों को सक्रिय करने का निर्देश दिया है। एसीएमओ डॉ. एफ हुसैन ने बताया कि कोविड की रोकथाम में निगरानी समितियों विशेषकर आशा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आशा को निर्देशित किया गया है कि विदेश या गैर प्रांत से कोई प्रवासी उनके गांव में आता है तो इसकी सूचना तत्काल ब्लॉक के प्रभारी चिकित्साधिकारी को दें। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में जाकर प्रवासी की कोविड जांच करेगी। आशा को यह भी निर्देशित किया गया है कि प्रवासी के स्वास्थ्य पर नजर रखें तथा किसी तरह की समस्या होने पर सूचना अधिकारियों को दे। इस समय विदेश विशेषकर हाई रिस्क वाले देशों से आने वालों से ओमिक्रॉन फैलने का खतरा है। ऐसे में आशा की सजगता से इसे रोका जा सकता है।
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टीकाकरण में निभा रही जिम्मेदारी
कोविड टीकाकरण में आशा अहम जिम्मेदारी निभा रही है। आशा गांव में टीके से छूटे हुए लोगों की सूची तैयार कर रही है। टीकाकरण शिविर लगने पर वह उन लोगों को सूचित करने के साथ ही उन्हें टीका लगवाने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।
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