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Basti News: कटान के मुहाने पर माईपुर बड़कापुरवा व मदरहवा

Tue, 20 Aug 2024 01:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 20 Aug 2024 01:31 AM IST
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Maipur Barkapurwa and Madarhwa at the mouth of Katan
कलवारी-रामपुर तट बांध के पास महुआपार कला गांव के पास बहती सरयू नदी। 
लोग गांवों को खाली कर किराये के मकान व रिश्तेदार के यहां ले रहे शरण
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संवाद न्यूज एजेंसी
गायघाट। सरयू नदी स्थित कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण बसे माईपुर बड़कापुरवा और मदरहवा गांव में दो दिनो से नदी कटान कर रही है। आशियान कटने के डर से ग्रामीण गांव छोड़ रहे हैं। कोई अपने रिश्तेदार के यहां शरण ले रहा है तो कोई किराये पर मकान लेकर उनमें गृहस्थी का सामान सुरक्षित कर रहा है। बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है।
रविवार की रात सरयू नदी का जलस्तर घटने के साथ कटान तेज हो गई। रविवार को राम भवन पासवान और मनीष पासवान का रिहायशी छप्पर नदी में समा गया था। प्रशासन उन्हें प्राथमिक विद्यालय में शरण दिया है। नदी कटान करते-करते गांव के मुहाने तक आ गई है। मजबूरी में लोग अपना घर खाली कर रहे हैं। सोमवार को कटान घर के करीब आता देखकर आशा पत्नी प्रेमचंद, भोले और मनोज पासवान आदि अपने घरों से सामान निकाल कर ट्रॉली से लेकर बैराड़ी पहुंचा रहे थे। पूछने पर बताया कि बैराड़ी में किराये पर मकान लिया है। वहीं सामान पहुंचा रहे हैं।
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रुमाली पत्नी रामजी ने कटान की डर से मकान तोड़कर मलबा व सामान लेकर सिकंदरपुर अपने रिश्तेदार के यहां शरण ले लिया। प्रभाविताओं का आरोप है कि कटान से सैकड़ों बीघा खड़ी फसल बर्बाद हो चुकी है। गांव का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। मगर, बाढ़ खंड की ओर से कटान रोकने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि महुआपार में अंधाधुंध बालू खदान व बाढ़ खंड की ओर से अधूरे ड्रेजिंग के कारण सरयू नदी की धारा गांव की तरफ मुड़ गई है।
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तत्कालीन डीएम प्रियंका निरंजन ने दिए थे विस्थापित करने का निर्देश
2023 में तत्कालीन डीएम प्रियंका निरंजन ने बाढ़ पीड़ितों को चिह्नित कर तटबंध के उत्तर सरकारी जमीन पर आवासीय पट्टा देकर विस्थापित करने के निर्देश दिए थे। बाढ़ पीड़ितों को विस्थापित करने के लिए चिह्नित जमीन पर कुछ लोगों का अवैध कब्जा है। इसे कब्जा मुक्त कराने के लिए तब प्रशासन ने 14 लोगों को नोटिस दिया था। मगर, अधिकारियों की शिथिलता के चलते अब तक जमीन को न तो कब्जा मुक्त कराया गया और न ही पट्टा आवंटित किया गया।

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कोट
तटबंध के दक्षिण बसे गांव को कटान से बचाने के लिए कोई स्थायी समाधान नही हैं। कटान से बचाव के लिए सामान मंगाए जा रहें हैं।
-दिनेश कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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