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Basti News: अलाव के धुएं से बढ़ रहा फेफड़े का संक्रमण
Tue, 21 Jan 2025 11:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 21 Jan 2025 11:15 PM IST
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ठंड से जिला अस्पताल में रोज पहुंच रहे 40 से 50 सांस के मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ठंड और कोहरा से जनजीवन प्रभवित है। वायु प्रदूषण और अलाव का धुआं सांस और टीबी के मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। मरीजों के फेफड़े में बैक्टिरिया और वायरस का संक्रमण बढ़ रहा है। जिला और टीबी अस्पताल में सांस के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। टीबी के पुराने मरीज फेफड़े में संक्रमण की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ के पास रोज 60 से 70 मरीज सांस तेज चलने और सांस फूलने की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। टीबी अस्पताल में टीबी के पुराने रोगी सांस फूलने और फेफड़े में बैक्टिरिया की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। क्षय रोग के वरिष्ठ परामर्शदाता डाॅ. आरके वर्मा के मुताबिक, ठंड के कारण टीबी के पुराने मरीजों के फेफड़े में बैक्टिरिया और वायरस के संक्रमण की समस्या बढ़ी है। कफ जमने के कारण फेफड़े सिकुड़ रहे हैं। टीबी की चपेट में आने वाले बच्चे फेफड़ा कमजोर होने के कारण अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के टीबी व चेस्ट फिजिशियन डाॅ. मो. जमाल ने बताया कि ठंड के कारण सांस के मरीजों की संख्या बढ़ी है। वायु प्रदूषण और अलाव के धूएं से सांस और टीबी के मरीजों को नुकसान पहुंच रहा है। यहां आने वाले मरीजों में 50 फीसदी से अधिक सांस फूलने और फेफड़े में संक्रमण की समस्या को लेकर पहुंच रहे है।
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..
- सतर्कता बरतें
सर्दी से करें बचाव, शरीर को गर्म वस्त्र से ढक कर रखें।
सांस फूलने पर चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।
सांस और टीबी के मरीज दवा बंद न करें।
अलाव जलाने से बचें, धुआं से पहुंचता है नुकसान
धूप निकलने पर ही बच्चों को घर से बाहर भेजें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ठंड और कोहरा से जनजीवन प्रभवित है। वायु प्रदूषण और अलाव का धुआं सांस और टीबी के मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। मरीजों के फेफड़े में बैक्टिरिया और वायरस का संक्रमण बढ़ रहा है। जिला और टीबी अस्पताल में सांस के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। टीबी के पुराने मरीज फेफड़े में संक्रमण की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ के पास रोज 60 से 70 मरीज सांस तेज चलने और सांस फूलने की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। टीबी अस्पताल में टीबी के पुराने रोगी सांस फूलने और फेफड़े में बैक्टिरिया की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। क्षय रोग के वरिष्ठ परामर्शदाता डाॅ. आरके वर्मा के मुताबिक, ठंड के कारण टीबी के पुराने मरीजों के फेफड़े में बैक्टिरिया और वायरस के संक्रमण की समस्या बढ़ी है। कफ जमने के कारण फेफड़े सिकुड़ रहे हैं। टीबी की चपेट में आने वाले बच्चे फेफड़ा कमजोर होने के कारण अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं।
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जिला अस्पताल के टीबी व चेस्ट फिजिशियन डाॅ. मो. जमाल ने बताया कि ठंड के कारण सांस के मरीजों की संख्या बढ़ी है। वायु प्रदूषण और अलाव के धूएं से सांस और टीबी के मरीजों को नुकसान पहुंच रहा है। यहां आने वाले मरीजों में 50 फीसदी से अधिक सांस फूलने और फेफड़े में संक्रमण की समस्या को लेकर पहुंच रहे है।
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- सतर्कता बरतें
सर्दी से करें बचाव, शरीर को गर्म वस्त्र से ढक कर रखें।
सांस फूलने पर चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।
सांस और टीबी के मरीज दवा बंद न करें।
अलाव जलाने से बचें, धुआं से पहुंचता है नुकसान
धूप निकलने पर ही बच्चों को घर से बाहर भेजें।