{"_id":"617c3febe5e3381c8f0a82d1","slug":"learning-english-sitting-on-sackcloth-basti-news-gkp4147243189","type":"story","status":"publish","title_hn":"टाट-पट्टी पर बैठकर सीख रहे अंग्रेजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टाट-पट्टी पर बैठकर सीख रहे अंग्रेजी
विज्ञापन
अंग्रेजी माध्यम परिषदीय विद्यालय भूअर निरंजनपुर में टाट पट्टी पर बैठ कर पढ़ते बच्चे।
- फोटो : BASTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टाट-पट्टी पर बैठकर सीख रहे अंग्रेजी
जिले में 169 अंग्रेजी माध्यम के स्कूल हो रहे संचालित
बस्ती। बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर शिक्षा देने के लिए प्राथमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम का दर्जा तो दे दिया, लेकिन सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। ऐसे में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। यही नहीं बच्चों को पूरी किताबें भी नहीं मिल पाई हैं। ऐसे में बच्चें हिंदी माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं।
जिले के 14 विकास खंड में अप्रैल 2018 में पांच-पांच परिषदीय विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम घोषित किया गया था। पूरे तामझाम के साथ स्कूलों का उद्घाटन भी किया गया। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने बच्चों के बैठने के लिए बेंच, कुर्सी और टेबल उपलब्ध कराने की घोषणा की। अभिभावकों को लगा सरकारी स्कूल में उनके बच्चे अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। अप्रैल 2019 में सभी ब्लॉकों में पांच-पांच और प्राथमिक विद्यालय को अंग्रेजी माध्यम घोषित कर दिया गया। इस तरह हर ब्लॉक में दस अंग्रेजी माध्यम के स्कूल हो गए। अब जिले में 169 परिषदीय विद्यालय अंग्रेजी माध्यम के रूप में संचालित हो रहे हैं, लेकिन किसी स्कूल में बेंच, कुर्सी और पूरी किताबें उपलब्ध नहीं हुई।
खुद के दम पर बदली स्कूल की तस्वीर
सदर ब्लॉक के अंग्रेजी माध्यम कंपोजिट विद्यालय परसा जागीर के प्रधानाध्यापक डॉ. शिव प्रसाद ने खुद के प्रयास से स्कूल भवन का कायाकल्प कर दिया, जो निजी स्कूल का टक्कर दे रहा है। यहां 500 से ऊपर बच्चे पढ़ते हैं। सभी कमरों में टाइल्स और बेंच और कुर्सी हैं। स्मार्ट क्लास की सुविधा भी है। परिसर में 125 प्रजाति के औषधीय 300 पौधे लगाए गए हैं। यहां बच्चों का नामांकन कराने के लिए भीड़ लगती है।
विज्ञापन
अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में किताबें पूरी दी गई हैं। अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि कहीं अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई न होने की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
जगदीश शुक्ला, बीएसए
विज्ञापन
जिले में 169 अंग्रेजी माध्यम के स्कूल हो रहे संचालित
बस्ती। बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर शिक्षा देने के लिए प्राथमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम का दर्जा तो दे दिया, लेकिन सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। ऐसे में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। यही नहीं बच्चों को पूरी किताबें भी नहीं मिल पाई हैं। ऐसे में बच्चें हिंदी माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं।
जिले के 14 विकास खंड में अप्रैल 2018 में पांच-पांच परिषदीय विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम घोषित किया गया था। पूरे तामझाम के साथ स्कूलों का उद्घाटन भी किया गया। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने बच्चों के बैठने के लिए बेंच, कुर्सी और टेबल उपलब्ध कराने की घोषणा की। अभिभावकों को लगा सरकारी स्कूल में उनके बच्चे अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। अप्रैल 2019 में सभी ब्लॉकों में पांच-पांच और प्राथमिक विद्यालय को अंग्रेजी माध्यम घोषित कर दिया गया। इस तरह हर ब्लॉक में दस अंग्रेजी माध्यम के स्कूल हो गए। अब जिले में 169 परिषदीय विद्यालय अंग्रेजी माध्यम के रूप में संचालित हो रहे हैं, लेकिन किसी स्कूल में बेंच, कुर्सी और पूरी किताबें उपलब्ध नहीं हुई।
विज्ञापन
खुद के दम पर बदली स्कूल की तस्वीर
सदर ब्लॉक के अंग्रेजी माध्यम कंपोजिट विद्यालय परसा जागीर के प्रधानाध्यापक डॉ. शिव प्रसाद ने खुद के प्रयास से स्कूल भवन का कायाकल्प कर दिया, जो निजी स्कूल का टक्कर दे रहा है। यहां 500 से ऊपर बच्चे पढ़ते हैं। सभी कमरों में टाइल्स और बेंच और कुर्सी हैं। स्मार्ट क्लास की सुविधा भी है। परिसर में 125 प्रजाति के औषधीय 300 पौधे लगाए गए हैं। यहां बच्चों का नामांकन कराने के लिए भीड़ लगती है।
विज्ञापन
अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में किताबें पूरी दी गई हैं। अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि कहीं अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई न होने की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
जगदीश शुक्ला, बीएसए